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इस आख़िरी कड़ी में पानी बचाने और ज़मीन को सँभालने के आसान तरीकों पर बात होती है। खेती और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की समझ इस एपिसोड का मुख्य संदेश है |
चिलगड्डा में प्रखण्ड स्तरीय किसान मेला सह कृषि प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।
इस एपिसोड में बारिश न होने और फिर अचानक ज़्यादा होने से फसल को होने वाले नुकसान की बात है। मौसम की मार और उससे जूझते किसान की असली परेशानी यहाँ दिखाई देती है।
इस कड़ी में बदलते मौसम की बात होती है और उसका खेती पर पड़ने वाला असर सामने आता है। किसान नई परिस्थितियों में अपनी फसल को कैसे सँभालने की कोशिश कर रहे हैं, यही इस कहानी की शुरुआत है।
झारखण्ड किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष ने जरीडीह प्रखण्ड कमिटी का किया विस्तारीकरण।
फसल सुरक्षा योजना के तहत निकाली गई जागरूकता रथ
सरकार की ओर से प्रदत्त खाद, चना, मक्का, मसूर, गेहूं, सरसों आदि बीज समय पर किसानों को नहीं मिलता है. अनुदानित योजना का लाभ जमीनी स्तर पर खेत-बाड़ी में काम कर रहे किसानों को न दे कर पदाधिकारी निजी लाभ के लिए फर्जी लोगों का भी चयन कर लेते हैं. कृषि के क्षेत्र में फर्जी तरीके से काम करने वाले पदाधिकारी बक्से नहीं जायेंगे -उक्त बातें राज्य के पेय जल व स्वच्छता एवं उत्पाद व मद्य निषेध विभाग के मंत्री सह गोमिया विधायक योगेंद्र प्रसाद ने बतौर मुख्य अतिथि पेटरवार प्लस टू उच्च विद्यालय के मैदान में मंगलवार को जिला कृषि विभाग की ओर से आयोजित जिला स्तरीय किसान मेला सह कृषि प्रदर्शनी को संबोधित कर कहा. मंत्री श्री महतो ने कहा कि कृषि को बेहत्तर बनाने के लिए विभिन्न इकाईयां जमीनी हकीकत को ढूंढे और योजना का संचालन व समाधान का उपाय खोजे. ऐसे कार्यक्रम किसानों के सही विकास, जानकारी व प्रोत्साहन के लिए किया जा रहा है. इससे भी बडा कार्यक्रम आयोजित किया जायगा. 50 हजार से दो लाख रूपये तक की ऋण माफी, उत्पादन का सही मूल्य व बाजार उपलब्ध करने, सिंचाई, मिलेट मिशन आदि की योजनाओं की सफलता के लिए राज्य सरकार गंभीर है. मंत्री योगेंद्र प्रसाद एवं चन्दनकियारी के विधायक उमाकांत रजक ने फीता काट कर प्रादर्श प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और स्टॉल का निरीक्षण किया. इन कृषि प्रादर्श का लगा प्रदर्शनी :- अमरुद, कोहड़ा, लौकी, आलू, मूली, बीट, फूल गोभी, बंध गोभी, सरसों, मकई, गेंदा सहित अन्य फूल, बैगन, बेर, डाभा, मटर, ओल, अरहर, टमाटर, संतरा, गाजर, कटहल, बेल, मिर्च, हल्दी, स्ट्रो बेरी, खीरा, मशरूम, तरबूज, शिमला मिर्च, करेला, फोरस बीन, लहसुन, प्याज, अदरख, मुनगा, शलजम, पपीता, बटेर, अमेरिकन पीकन डक का अंडा आदि कृषि उपज प्रदर्शनी में लगाया गया था जिला उद्यान बोकारो, केवीके का प्राकृतिक खेती बारी जागरूकता, कृषि केंद्र, ग्रामीण पोल्ट्री फॉर्म, खेती बारी ग्रीन गार्डेन नर्सरी,भारती महिला संघ का उत्पाद सहित दर्जनों स्टॉल लगाया गया था. बेहत्तर कृषि उपज लाने वाले किसानों को उपहार दे कर प्रोत्साहित किया गया. मौके पर जिला कृषि पदाधिकारीमो शाहिद, एलडीएम बोकारो, पेटरवार बीडीओ संतोष कुमार महतो, सीओ अशोक राम, थाना प्रभारी राजु कुमार मुंडा, जिप सदस्य अशोक मुर्मू, कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ अनिल कुमार, मनोहर मुर्मू, राधानाथ सोरेन, सदमा पंचायत की मुखिया साबित्री देवी, बुंडू मुखिया निहारिका सुकृति, शांति लाल जैन, कृष्णा महतो, शक्तिधर महतो, मुकेश कुमार महतो, प्रकाश महतो, कोलेश्वर सोरेन, अरुण सोरेन, अरबिंद महतो सहित पंचायत, प्रखंड व जिला के पदाधिकारी व जिला भर के किसान काफी संख्या में मौजूद थे.
भारत एक कृषि प्रधान देश है और आज भी यहाँ के 70 प्रतिशत लोग कृषि कार्यों से जुड़े हुए हैं और भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण है. इसलिए किसान, भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ और ग्रामीण समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता हैं। देशभर के किसानों को समाज में उनके योगदान के लिए सम्मानित करने और उनकी सराहना करने के उद्देश्य से भारत में हर साल 23 दिसंबर को राष्ट्रीय किसान दिवस मनाया जाता है। इसी दिन भारत के पांचवें प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती भी होती है। साथियों, राष्ट्रीय किसान दिवस के लिए हर साल एक अलग थीम निर्धारित होती है और इस वर्ष यानी 2024 का थीम है "सतत कृषि और ग्रामीण सशक्तिकरण” जिसका उद्देश्य है किसानों को स्थायी कृषि पद्धतियों के महत्व को समझाना और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देना है।
"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ श्री जीवदास साहू ,टमाटर की खेती के सम्बन्ध में जानकारी दे रहे है। टमाटर के उन्नत किस्म और इसके उपचार की अधिक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें.
