उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अनीता दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि क्या शहरों में मानसिक स्वास्थ्य की वर्जनायें कम हैं ?
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अनीता दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानकारी चाहती है कि क्या महिलाओं के लिए मानसिक स्वास्थ्य की बात करना ज्यादा मुश्किल होता है ?
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अरविन्द श्रीवास्तव कहते हैं कि महिलायें कृषि कार्य करती तो हैं, लेकिन उनके नाम पर जमीन नहीं होने के कारण वो मजदूर वर्ग तक सीमित हो जाती हैं। जिससे उन्हें बहुत कम आय प्राप्त होती है। लेकिन अगर उनके नाम पर जमीन होगी तो वो बहुत सशक्त हो सकती हैं। महिलायें पुरुषों से अधिक मेहनत करती हैं। लेकिन जमीन अपने नाम नहीं रहने के कारण परेशान भी रहती है। सरकार भी कानून बना चुकी है कि पति की मृत्यु के बाद महिला के नाम और उसके बच्चों के नाम पर बराबर ही जमीन होगी विरासत के तौर पर। लेकिन अभी भी समस्या यह है कि महिलाओं को मालिकाना हक बेटों के द्वारा माँ को नहीं मिलता है और वो सिर्फ जमीन पर काम कर पाती हैं। उसका उपयोग अपने अनुसार नहीं कर पाती है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमज़ान अली की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से सुन्नत निशा से हुई। सुन्नत कहती है कि इनका दो जगह जमीन है। लेकिन सरकार द्वारा आवास योजना का लाभ नहीं मिला है
कल के नेता, आज की आवाज़” केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक आह्वान है—युवाओं के लिए, समाज के लिए और नीति निर्माताओं के लिए। यदि युवाओं को सही दिशा, प्रशिक्षण और अवसर दिए जाएं, तो वे भूमि न्याय के आंदोलन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। भविष्य का भारत तभी सशक्त और न्यायपूर्ण होगा, जब आज की युवा आवाज़ भूमि पर समान अधिकार की मांग को मजबूती से उठाएगी। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- आपके परिवार में जमीन किसके नाम है? क्या महिलाओं का नाम भी उसमें शामिल है *--- “हम अपने परिवार और समाज में ऐसी कौन-सी पहल कर सकते हैं, जिससे महिलाओं को ज़मीन में बराबर की हिस्सेदारी सुनिश्चित हो? *--- “अगर महिलाओं के नाम जमीन हो जाए, तो आपके हिसाब से उनकी ज़िंदगी में क्या-क्या बदल सकता है?”
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती जिला से 44 वर्षीय विजय पाल चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि महिलाओं को जमीन का अधिकार मिलना चाहिए। महिलाओं के नाम जमीन नहीं होने से महिलाएँ हमेशा प्रताड़ित की जाती है। परिवार के सदस्य महिला को छोटी छोटी बातों पर उन्हें घर से निकल जाने को कहते है। अगर महिलाओं को जमीन का अधिकार मिलेगा तो इस तरह की दुर्व्यवहार उनके साथ घटित नहीं होगा।
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उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमज़ान अली की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से एक श्रोता से हुई। वो कहती हैं कि उनके नाम पर जमीन है। लेकिन किसान सम्मान निधि का लाभ नहीं मिल रहा है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से 45 वर्षीय विजय पाल चौधरी कहते हैं कि महिलाओं का भी पैतृक संपत्ति में पूरा अधिकार है। साल 2005 से उनका हक कानून भी बन गया है। महिला के नाम जमीन हुआ तो महिला अपना व्यवसाय भी कर सकती है। इसके लिए उन्हें सरकार की तरफ से कुछ अनुदान भी मिल जाता है। जिससे की महिलाओं को आर्थिक रूप से काफी सहायता मिलती है
