अधिकांश व्यक्तिगत पट्टे पुरुषों के नाम पर होते हैं. सामुदायिक अधिकारों में भी महिलाओं को भी कम प्रतिनिधित्व दिया जाता है. इसके चलते महिलाएं केवल खेत मजदूर बनकर रह जाती हैं. महिलाओं को इसका नुकसान यह होता है कि बैंक, बीमा तथा दूसरी सरकारी सहायता का लाभ नहीं उठा पाती है, जो उनके लिए चलाई जा रही हैं.

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नाम सुशील कुमार है , जो उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले से बोलता है , ताशिल शाहबाद में है , थाना पिहानी , पोस्टबंदी में है । एक गाँव निवासी गाँव शिमरापुरबा सर भी है , हमारे पास एक चरागाह भूमि है जो सरकारी भूमि है , चरागाह या लगभग विवाहित भूमि है , चरागाह में भी कई पौधे खड़े हैं । हम इसमें एक गौशाला बनाना चाहते हैं । महोदय , मैंने इसके लिए तहसील स्तर और डी . एम . को कई आवेदन दिए , लेकिन गौशाला पास नहीं हो रही है , और महोदय , मैंने 26 तारीख को श्रमिक मोबाइल बारी पर मामले की सूचना दी थी । उसमें एक संदेश था ।

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