अधिकांश व्यक्तिगत पट्टे पुरुषों के नाम पर होते हैं. सामुदायिक अधिकारों में भी महिलाओं को भी कम प्रतिनिधित्व दिया जाता है. इसके चलते महिलाएं केवल खेत मजदूर बनकर रह जाती हैं. महिलाओं को इसका नुकसान यह होता है कि बैंक, बीमा तथा दूसरी सरकारी सहायता का लाभ नहीं उठा पाती है, जो उनके लिए चलाई जा रही हैं.
उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी जिला से आरती देवी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि वह खेती करना चाहती हैं
कोनार नहर सिंचाई परियोजना विष्णुगढ़ प्रखंड के जोबर,करगालो पंचायत में कोनार सिंचाई परियोजना के तहत नहर एवं पाइपलाइन निर्माण कार्य का भूमि पूजन किया गया इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह कार्य होने पर इस क्षेत्र में कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि एवं रोजगार के कई द्वार खुलेंगे।
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भारत में खेती से जुड़ें कामों में महिलाओं की भागीदारी 70% के लगभग है जबकि वास्तिविकता में यह 15 प्रतिशत के करीब आती है सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगभग 30% महिलाओं को ही “किसान” के तौर पर जाना जाता है. यह भारत में कामकाजी महिलाओं का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा खेती और उससे जुड़े कार्यों में लगा हुआ है.
