बिहार राज्य के मुंगेर जिला के नौवागढ़ी से बबिता देवी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानना चाहती हैं कि कोरोना का तीसरा टीकाकरण कब मिलेगा

बिहार राज्य के मुंगेर जिला से मुकेश मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानना चाहते हैं कि कोरोना का तीसरा टीकाकरण कब मिलेगा

बिहार राज्य के मुंगेर जिला के नौवागढ़ी के सदर प्रखंड से विजय शर्मा मोबाइल वाणी के माध्यम से जानना चाहते हैं कि इन्होंने कोरोना का दोनों टीका ले लिया है और तीसरा टीका कब मिलेगा,इसकी जानकारी चाहिए

बिहार राज्य के मुंगेर जिला के नौवागढ़ी से जय सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानना चाहते हैं कि कोरोना का तीसरा टीकाकरण कब मिलेगा

बिहार राज्य के नौवागढ़ी से परशुराम मोबाइल वाणी का माध्यम से यह जानना चाहते हैं कि कोरोना का तीसरा टीकाकरण कब मिलेगा

बिहार राज्य के मुंगेर जिला से संजय कुमार सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से यह जानना चाहते हैं कि कोरोना का तीसरा टीकाकरण कहाँ लेना है और कब मिलेगा

बिहार राज्य के मुंगेर जिला के हवेलीखरगपुर से राहुल कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताया कि उन्होंने कोरोना का पहला और दूसरा टीकाकरण ले लिया है। अब कोरोना का तीसरा टीकाकरण आने के बाद ही वह ले पाएंगे

मुख्यमंत्री बाल ह्रदय योजना से हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को मिल रही संजीवनी - योजना के तहत सफल ऑपरेशन होने के बाद आज सामान्य जिंदगी जी रहा है 10 वर्षीय बाबू सिंह - राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत डीईआईसी मुंगेर के द्वारा लगातार हृदय रोग की स्क्रीनिंग के लिए बच्चों को भेजा जा रहा है पटना मुंगेर, 29 जुलाई.। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी और सात निश्चय पार्ट 2 में शामिल मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के लिए संजीवनी साबित हो रही है। इस योजना के तहत राज्य सरकार के सहयोग से गुजरात के अहमदाबाद स्थित सत्य साई अस्पताल में जन्मजात हृदय रोग का सफल ऑपरेशन होने के बाद मुंगेर जिला के असरगंज प्रखण्ड क्षेत्र अंतर्गत रहमालपुर गांव निवासी दुर्गेश सिंह और खुशबू सिंह का 10 वर्षीय पुत्र आज बिल्कुल सामान्य जिंदगी जी रहा है। जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम प्रबंधक नसीम रजि ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (डीईआईसी) मुंगेर के द्वारा लगातार जिला के विभिन्न प्रखंडों से बाल हृदय रोग से ग्रसित बच्चों को चिह्नित कर स्क्रीनिंग के लिए राजधानी पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) और इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान (आई जीआईसी) भेजा जाता है। वहां स्क्रीनिंग होने के बाद पुनः सभी बच्चों को एक कैम्प जिसमें गुजरात के अहमदाबाद स्थित सत्य साई अस्पताल या अन्य अस्पताल जहां बच्चों के ह्रदय का निःशुल्क ऑपरेशन होना है वहां के डॉक्टर अपने स्तर से स्क्रीनिंग करते हैं कि किन-किन बच्चों को ऑपरेशन के लिए अहमदाबाद ले जाना है। इसके बाद राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री बाल ह्रदय योजना के तहत हृदय रोग से पीड़ित बच्चे का ऑपरेशन निःशुल्क होता है। अभी तक मुंगेर के असरगंज प्रखण्ड क्षेत्र अंतर्गत रहमालपुर गांव स्थित दुर्गेश कुमार सिंह और खुशबू सिंह के 10 वर्ष के पुत्र बाबू सिंह का इस योजना के तहत सफल ऑपरेशन हुआ है। वो आज के समय में बिल्कुल ही सामान्य जिंदगी जी रहा है। उस बच्चे का ऑपरेशन पिछले वर्ष अक्टूबर के महीने में हुआ था। इसके साथ ही सदर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत मोकबिरा गांव निवासी बिहारी महतो की 7 वर्षीय पुत्री शिवानी कुमारी को मार्च महीने के 15 तारीख को स्क्रीनिंग के पटना भेजा गया था। वहीं 29 मार्च को अहमदाबाद के सत्य साई अस्पताल के हृदय रोग के चिकित्सकों के द्वारा शिवानी को ऑपरेशन के लिए अहमदाबाद भेजे जाने की बात कही गई । राज्य सरकार से निर्देश मिलने के बाद बहुत ही जल्द शिवानी को उसके परिवार के एक सदस्य के साथ ऑपरेशन करवाने के लिए अहमदाबाद भेज दिया गया । राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की नोडल अधिकारी डॉ. बिंदू ने बताया कि बाबू सिंह और शिवानी कुमारी के अलावा भी बाल ह्रदय रोग से चिह्नित कई बच्चों को स्क्रीनिंग के लिए पटना स्थित आईजीआईएमएस और आईजीआईसी भेजा गया है। वहां स्क्रीनिंग के बाद सभी बच्चों को वेटिंग फ़ॉर कैम्प के लिए रखा गया है। जिसमें सत्य साई अस्पताल के डॉक्टर अपने स्तर से चेक करने के बाद यह तय करेंगे कि किन-किन बच्चों को ऑपरेशन के लिए अहमदाबाद ले जाया जाएगा। उन्होंने बताया कि मई के महीने में चार और जून के महीने में कुल 6 हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को स्क्रीनिंग के लिए पटना स्थित आईजीआईएमएस भेजा गया है जिन्हें वेटिंग फ़ॉर कैम्प के लिए रखा गया है। मई के महीने में कन्हैया पासवान की बेटी करीना कुमारी, मो.सज्जाद की बेटी साबिहा , अरविंद कुमार की बेटी अनन्या राज और उज्ज्वल कुमार के बेटे आरव सिंह को और जून के महीने में शशि कांत के बेटे लक्ष्य , समीर कुमार के बेटे रणवीर कुमार, मो.इरशाद के बेटे मो. माहिर, सत्येंद्र शेखर कुमार के बेटे सिंह, जयराम चन्द्र की बेटी सोनम कुमारी और पन्नालाल के बेटे गोलू कुमार को स्क्रीनिंग के लिए पटना भेजा गया है। इन सभी बच्चों को वेटिंग फ़ॉर कैम्प के लिए रखा गया है।

शुक्रवार को सदर प्रखंड अंतर्गत नौवागढ़ी दक्षिणी पंचायत के आंगनवाड़ी केंद्र संख्या 37 अंबेडकर नगर एवं 36गढ़ी में आईटीसी मिशन सुनहरा कल एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा परिवार नियोजन जागरूकता रैली निकाली गई रैली का संचालन पवन कुमार पांडे कर रहे थे जबकि कार्यक्रम में उपस्थित यूनिसेफ के डॉ मदन कुमार एएनएम रेणु कुमारी आंगनवाड़ी सेविका पूनम कुमारी ,मनीषा कुमारी एवं आशा दीदी मुख्य रूप से उपस्थित थे।

मंकी पॉक्स से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में, कर्मियों को स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल के पालन का निर्देश - जिला में अभी नहीं आया है इससे संक्रमण का कोई मामला - आम लोगों से स्वच्छता के प्रति सजग रहने की अपील मुंगेर, 28 जुलाई। बिहार में मंकी पॉक्स के दो संदिग्ध मरीज मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड़ में है। इसको ले स्वास्थ्य विभाग के द्वारा जिला के सभी प्रखंडों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधकों तथा सामुदायिक उत्प्रेरकों को मंकीपॉक्स की रोकथाम संबंधी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल (एसओपी) के पालन करने के लिए कहा गया है । स्वास्थ्य कर्मियों को स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल (एसओपी) के पालन का निर्देश- सिविल सर्जन डॉ. पीएम सहाय ने बताया कि जिला स्तर पर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल के पालन करने का निर्देश दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को किसी भी मामले में तुरंत आवश्यक इलाज सुविधा मुहैया कराने के लिए कहा गया है। जिला में अभी तक मंकीपॉक्स का कोई मामला देखने में नहीं आया है। बावजूद इसके लोगों को इस बीमारी के बारे में सभी आवश्यक जानकारी रखनी है। हालांकि यह एक संक्रामक बीमारी है लेकिन इसका इलाज मौजूद है। इसलिए इस बीमारी के प्रति भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है । यह रोग जानलेवा नहीं है । छह से 13 दिन में दिखता है रोग का लक्षण - जिला स्वास्थ्य समिति के जिला कार्यक्रम प्रबंधक ( डीपीएम) नसीम रजि ने बताया कि स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोटोकॉल में इस बात की जानकारी दी गयी है कि मंकीपॉक्स एक संक्रामक रोग है जो एक वायरस के संक्रमण से होता है। यह स्मॉल पॉक्स के समान ही एक रोग है जिसका लक्षण संक्रमण के छह से 13 दिनों के अंदर सामने दिखने लगते हैं। इस बीमारी में संक्रमण के लक्षण बुखार के रूप में दिखते हैं। इसके साथ ही इस बीमारी में सिरदर्द, मांसपेशियों में जकड़न, अत्यधिक कमजोरी रहता है और बुखार के साथ त्वचा पर रैश हो जाता है । इसकी शुरुआत चेहरे से होती है और बाद में यह शरीर के दूसरे हिस्से में भी फैल जाती है। रैश होने पर इसमें खुजली हो सकती और आखिर में यह पपड़ी बन जाता है। इस बीमारी का संक्रमण आमतौर पर खुद ब खुद ठीक हो जाता है। हालांकि इसमें 14 से 21 दिन भी लग सकते हैं। यह बीमारी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से होता है। ऐसे में संक्रमण को दूर रखने के सभी एहतियात का पालन करना आवश्यक है। स्वास्थ्यकर्मियों के लिए पीपीई किट का इस्तेमाल जरूरी - उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देश है कि त्वचा पर रोग के लक्षण दिखने पर रोगी को आइसोलेशन में रख कर इलाज करना है। इसके साथ ही संक्रमण के लिए सभी आवश्यक प्रोटोकॉल का पालन करना है। पीपीई किट, हैंड ग्लब्स तथा मास्क का इस्तेमाल करना जरूरी है। इसके साथ ही संक्रमित व्यक्ति के द्वारा इस्तेमाल किए गए चादर, कपड़े तौलिया जैसी दूषित सामग्री के सम्पर्क में आने से बचना चाहिए और साबुन और पानी या अल्कोहल युक्त हैंड सैनिटाइजर का उपयोग कर अपने हाथों को स्वच्छ रखना आवश्यक है। कम इम्युनिटी वाले व्यक्तियों को मंकी पॉक्स के वायरस से संक्रमित होने की संभावना अधिक है। मंकी पॉक्स होने कि स्थिति में आंखों में दर्द या धुंधली दृष्टि, सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द, बार-बार बेहोश होना और दौरे पड़ना और पेशाब में कमी की परेशानी हो सकती है। इनमें से किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर तत्काल चिकित्सक से सम्पर्क करना आवश्यक है। यह बीमारी प्रत्यक्ष शारीरिक सम्पर्क, शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थ, यौन सम्पर्क या घावों के सम्पर्क में आने और लंबे समय तक निकट सम्पर्क में आने पर सांस की बूंदों से संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के सम्पर्क में आने से हो सकता है।