आपको क्या लगता है लोग अपने मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति पर क्यों बात करना नहीं चाहते और चुप रहते हैं ?क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है की आपने अपनी मन की बात किसी को समझाने की कोशिश की पर सामने वाला उसे समझ न पाया हो ?आपको क्या लगता है, क्यों मानसिक स्वास्थ्य के बारे में खुल कर बात करने से लोग अभी भी कतराते हैं?

"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के अंतर्गत कृषि विशेषज्ञ जीबदास साहू मानसून आने से पूर्व मिट्टी तैयार करने के बारे में जानकारी दे रहे हैं। इसकी पूरी जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें.

मानसिक स्वास्थ्य के बारे में आपका क्या ख्याल है ?आपके हिसाब से क्या हमारे समाज में मानसिक स्वास्थ्य के बारे में लोगों के अंदर जागरूकता का स्तर कैसा है ?कितना जरुरी होता है ज़िन्दगी के इस पहलूँ पर ध्यान देना ?

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"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के अंतर्गत कृषि विशेषज्ञ जीवदास साहू जामुन के पेड़ में लगने वाले कीड़ों का नियंत्रण के बारे में जानकारी दे रहे हैं। इसकी पूरी जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें.

अमर शहीद कॉर्पोरल विक्की पहाड़े फाउंडेशन छिंदवाड़ा के तत्वाधान में आज दिनांक 4 मई 2025 को स्थान सर्किट हाउस तिराहा व्हीआईपी रोड छिंदवाड़ा शाम 7 बजे से "एक शाम शहीदो के नाम" देशभक्ति गीतों की संध्या एवं श्रद्धाञ्जली कार्यक्रम का आयोजन रखा गया है, साथ ही विशाल मशाल-तिरंगा पद यात्रा शाम 5 बजे से मेजर शहीद अमित ठेंगे चौक से इंदिरा तिराहा, डॉ. बीआर अम्बेडकर तिराह, परासिया रोड होते हुये, कार्यक्रम स्थल सर्किट हाउस पहुँचेगी।

मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रांताध्यक्ष शलभ भदौरिया जी के आदेशानुसार समस्त जिले भर में मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ द्वारा मजदूर दिवस के अवसर पर ज्ञापन सौंपा गया।इसी श्रृंखला में दिनांक 01 मई 2025 को मजदूर दिवस के अवसर पर 21 सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को मध्य प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ छिंदवाड़ा जिला इकाई द्वारा ज्ञापन सौंपा गया।

नमस्कार, आदाब दोस्तों ! स्वागत है आपका मोबाइल वाणी और माय कहानी की खास पेशकश कार्यक्रम भावनाओं का भवर में। साथियों, आज हम बात करेंगे लड़को के रोने पर - जी हाँ सही सुना, लड़को के रोने पर ही आज बात करेंगे ताकि हम समझ पाए बछ्पन के सुने हुए यह जुमले बच्चे के मन पर क्या असर दाल जाता है और आगे चलते उनके मन पर क्या असर पड़ता है। क्यूंकि मानसिक विकार किसी की गलती नहीं इसलिए इससे जूझने से बेहतर है इससे जुड़ी पहलुओं को समझना और समाधान ढूंढना। तो चलिए, सुनते है आज की कड़ी। .....साथियों, अभी आपने सुना की चाहे इंसान कितना भी सख्त दिखने की कोशिश क्यों न करे, ज़िन्दगी के पूछ पलों में उन्हें भी रोने का मन करता है और ऐसे समय में रो लेना कितना ज़रूरी है। पर क्या हमारा समाज इतनी आसानी से लड़कों को रोने की आज़ादी दे दे सकता है ? क्या केबल रोने या न रोने से ही साबित होता है की वो इंसान कितने मज़बूत किरदार का मालिक है ? और क्या इसी एक वाक्य से हम बचपन में ही लिंग भेद का बीज बच्चो के अंदर ने दाल दे रहे है जो पड़े होते होते न जाने कितने और लोगो को अपनी चपेट में ले चूका होता है ! आप के हिसाब से अगर लड़के भी दिलका बोझ हल्का करने के लिए रोयें और दूसरों से नरम बर्ताव करे तो समाज में क्या क्या बदल सकता है ? इस सभी पहलुओं पर अपनी राय प्रतिक्रिया और सुझाव जरूर रिकॉर्ड करें अपने फ़ोन में नंबर 3 दबाकर। और हां साथियों अगर आपके मन में आज के विषय से जुड़ा कोई सवाल हो तो वो भी जरूर रिकॉर्ड करें। हम आपके सवाल का जवाब तलाश कर आप तक पहुंचाने की पूरी कोशिश करेंगे। साथ ही इसी तरह की और भी जानकारी सुनने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें https://www.youtube.com/@mykahaani

"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के अंतर्गत कृषि विशेषज्ञ श्री जीबदास साहू लतर वाली फसल से अच्छी उपज कैसे ली जाए, इसके बारे में जानकारी दे रहे हैं। पूरी जानकारी विस्तार से सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें.