ज्योतिष पाठयक्रम लागू कर देश में अंधश्रद्धा फैला रहा इग्नू विवेकवादी संगठनों ने सौंपा ज्ञापन, चेताया आंदोलन करेंगे -------------------------------------------------------------------------------- सौंसर । ज्योतिष को वैज्ञानिक आधार नहीं है, खगोलशास्त्र ज्यातिष को मान्यता नहीं देता । फिर भी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय ने इस वर्ष से ज्योतिष में दो वर्षीय मास्टर ऑफ आर्ट्स प्रोग्राम शुरू किया है। इग्नू ऐसा कर लोगों में अंधश्रद्धा फैला रहा है, लोगों को भग्यवादी, रूढ़ीवादी बना रहा है। इस पाठयक्रम को मान्यता नहीं मिलना चाहिए यह मांग विवेकवादी संगठन तर्कशील विचार समिति एवं अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने की है। ज्योतिष पाठयक्रम पर प्रतिबंध नहीं लगने पर दोनो संगठनों ने आंदोलन करने की बात कहीं हैं। मंगलवार को दोनो संगठनों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन एसडीएम श्रेयास कूमट को सौंपे हैं। ज्ञापन में कहा है कि एक और भारतीय संविधान अनुच्छेद की धारा 51 ए/एच के अनुसार वैज्ञानिक चिंतन के लिए सरकार कटिबद्ध है। वही दुसरी और इग्नू ज्योतिष विषय का पाठयक्रम शुरू कर संविधान में बनाई गई व्यवस्था के विरूद्ध कार्य कर रहा है। विश्व के 186 वैज्ञानिकों में 19 नोबल पुरस्कार प्राप्त वैज्ञानिक है, इन्हों ने ज्योतिष को नकारा है। इतना ही नही तो युवाओं में वैचारिक क्रांति लोने वाले विवेकवादी तर्कवादी स्वामी विवेकानंद, देश के संत और समाज सुधारकों ने ज्योतिष को लोगों को ठगने, उन्हें गुमराह कर उनका शोषण करने की विद्या बताई है। ज्ञापन सौंपने पीकेएस गुर्वे, वामन ठोंबरे, दिनकर पातुरकर, योगेश गौतम, गणेश अंबाडारे, विजय धुंडे, रत्न्माला पीसे, एकनाथ गुर्वे, डॉ रितु मालोदे, मीराबाई भक्ते, अंकित धामनकर व संगठन के सदस्य उपस्थित थे।
