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जिला गढ़वा, से संतोष कुमार कुशवाहा जी ने मोबाईल वाणी के माध्यम से बताया कि यहाँ पर यहाँ के गरीब लोगों को बहुत कम वेतन में मजदूरी करना पड़ता है।जैसे की पारा शिक्षक जो गाँव में रहकर रात-दिन मेहनत करते है फिर भी उनका मानदेय इतना कम है की वो अपना घर-परिवार का भरण-पोषण करने के लिए परेशान रहते है।इन पारा शिक्षकों का वेतन इतना कम है ये अपने बच्चो का इलाज नहीं करा सकते, घर में किसी की शादी करनी हो तो नहीं कर सकते है। इनको बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता है। और यहाँ के विधायक,संसद अपना वेतन बढ़ाने में लगे हुए है।
जिला हजारीबाग,प्रखण्ड इचाक से टेकनारायण कुशवाहा जी ने मोबाईल वाणी के माध्यम से बताया कि हर विभाग में उपस्थिति के अनुसार लोगो को वेतनमान मिलने का काम होता है।विघायकों का भी उपस्थिति के अनुसार ही उनको भी वेतन मिलना चाहिए।उनके कार्य और कार्य क्षेत्र के अनुसार ही भत्ता मिलना चाहिए।ये देखना चाहिए की ये जनता के लिए क्या काम कर रहे है और विकास के क्षेत्र में इन्होने कितना काम किया है। सबका एक आंकड़ा होना चाहिए।विधायकों की देख-रेख के लिए एक आयुक्त का गठन होना चाहिए ताकि विधायकों के कार्यकलाप की देख-रेख की जा सके।इनके काम के अनुसार ही इनको वेतन देना चाहिए ना की दिन -दुनी रात चौगनी विधायकों का वेतनमान बढ़ाना चाहिए। अगर ऐसा होगा तो सरकार के पैसे खर्च होते रहेंगे और किसी तरह का विकास कार्य भी नहीं होगा।विकास कार्य होता है उसपर भी विधायकों द्वारा कई तरह से कमीशन वसूल करने का काम किया जाता है। वसूल करने के लिए बिचौलिए होते है जिनके द्वारा जनताओं का शोषणकिया जाता है।
जिला धनबाद, प्रखंड तोपचाँची से रविंद्र महतो जी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि शिक्षकों को अपने वेतन में बढ़ोतरी कराने के लिए धरना प्रदर्शन करना पड़ता है।और इसके लिए उन्हें लाठी डण्डे तक खाने पड़ते है।जिनके हाथो राज्य ही नहीं देश का दायित्व भी है।किसी भी पद के लिए आज के समय में उच्च-से-उच्च योग्यताधारी का चयन किया जाता है।इस पद को पाने के लिए उन्हें कई वर्षो तक मेहनत करनी पड़ी।परन्तु विधायकों के लिए शैक्षणिक योग्यता का कोई मापदंड नहीं है।ऐसे में लोग अपने पथ से भटक जा रहे है। राज्य और देश के विकास के लिए ये चिंताजनक है।
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झारखण्ड में गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी आदि की संख्या देश के अन्य राज्यों की तुलना में अधिक है, बावजूद इसके यहां के विधायकों के वेतन में इजाफा बार बार हो रहा है।जहाँ एक तरफ राज्य में अनुबंध पर कार्यरत सहिया और शिक्षकों को फण्ड के आभाव में 6-6 महीने तक वेतन नही दिया जाता है, वहीं समय-समय पर विधायकों का वेतन में वृद्धि किया जाना नैतिकता के आधार पर कितना उचित हैं?

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Feb. 16, 2017, 7:45 p.m. | Location: 438: JH, Bokaro, Nawadih | Tags: MLAsalaryhike int-DT discussion int-JKR autopub | Category: General