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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से उपेंद्र यादव ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारत में भूमि का उपयोग केवल कृषि के लिए नहीं बल्कि वन और अन्य कृषि कार्य के लिए किया जाता है। ग्रामीण भारत में जमीन को सम्पत्ति और प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जाता है

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि हमारे देश में जमीन सिर्फ खेती का साधन नहीं है,बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा, सुरक्षा और आजीविका का मुख्य आधार है। साठ प्रतिशत से अधिक भूमि कृषि के लिए उपयोग होती है। लेकिन यह सम्पत्ति आवास,औद्योगिक विकास,वनीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में ऋण प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण जरिया है।

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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि संपत्ति कर के लिए कई दस्तावेज लगते हैं जैसे - संपत्ति पहचान संख्या ,पिछले कर का रशीद ,आधार कार्ड ,पैन कार्ड ,मालिक का प्रमाण पात्र ,विक्रय विलय स्वामित्य प्रमाण पत्र आदि।यह प्रक्रिया ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है जो संपत्ति के मालिकों को उनकी सम्पत्तियों पर सही कानूनी दर्जा देती है

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से रौशन लाल मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि ग्रामीण बैंक से आसानी से ऋण ले सकते हैं। दस्तावेज- संपत्ति के मालिकों को संपति कार्ड या अधिकारों का अभिलेख जारी किया जाता है।यह योजना ग्राम पंचायत के संपत्ति कर को सुव्यवस्थित करती है जिसे विकास कार्यों में वृद्धि होती है

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि ग्रामीण संपत्ति रिकॉर्ड अब मुख्य रूप से स्वामित्व योजना के तहत डिजिटल किया जा रहा है। ग्रामवासियों को उनकी आवासीय जमीन और घर का कानूनी स्वामित्व और दस्तावेज प्रदान करता है ड्रोन और जी आईएस मैपिंग तकनीकी का उपयोग करके केंद्र सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्तियों का अस्टीक रिकॉर्ड जो स्वामित कार्ड तैयार कर रही है जिससे संपत्ति विवाद कम होते हैं और बैंक ऋण प्राप्त करना आसान हो जाता है

झारखण्ड राज्य से टेक नारायण प्रसाद कुशवाहा मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि जमीन में समाज में एक अलग स पहचान, सम्मान ,सशक्तिकण ,आर्थिक, सामाजिक ,महत्वाकांक्षा का महत्व देता है। महिलाओं के नाम से जमीन की पट्टा मिलने या वन जंगल का पट्टा मिलने से महिलाओं में आत्मनिर्भर ,आत्म स्वाभिमानी और महिला उस घर की एक सशक्त महिला के रूप में उभरने का स्वाभिमान प्राप्त होता है। महिलाएं पुरुषों को अधिकार नहीं देना चाहते हैं और वह अपने अधीन ही रखना चाहते हैं । पुरुष को यह बात की जागरूकता होना चाहिए कि जमीन महिलाओं के नाम से पट्टा मिलता है तो महिला उस घर की स्वाभिमानी कहलाती है और उस घर में उनकी बहुत बड़ी महत्व देखने को मिलता है तथा इससे महिलाओं के लिए आबादी को एक स्वाभिमान प्राप्त होता है और हमारे देश को एक सशक्तिकरण मिलने की बात कही जाती है जो आज महिलाओं के नाम से जमीन का पट्टा बनाने से महिलाओं में आत्मस्वाभिमान उत्पन्न होता है।

झारखंड राज्य के हजारीबाग जिला से साजिद अंसारी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलाओं के नाम से जमीन होना चाहिए ।महिलाओं को जमीन में अधिकार मिलने से सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिलती है और कानूनी फायदे भी मिलते हैं ।