झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि द्वितीय विश्व युद्ध के अपराधों के मद्देनजर 1948 में मानवाधिकार की सर्वभौमिक घोषणा को अपना कर अंतररााष्ट्रीय समुदाय ने लिंग,धार्मिक और राजनीतिक मान्यताओं राष्ट्रीय और जातीय मूल या सामाजिक स्थिति की परवाह किए बिना, सभी लोगों के लिए व्यापक सुरक्षा स्थापित करने का प्रयास किया।यह घोषणा मौलिक,राजनीतिक,आर्थिक,सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों को स्थापित करती है। इनमें हिंसा और भेदभाव से मुक्त जीवन जीने का अधिकार, शिक्षा और स्वास्थ्य तक पहुँंच का अधिकार,संपत्ति रखने का अधिकार,मतदान का अधिकार और कार्य के बदले वेतन का अधिकार शामिल है।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से अरुण ठाकुर ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं और लड़कियों की अधिकारों को वास्तव में सुनिश्चित करने के लिए विशेष कार्य की आवश्यकता थी। इस कमी को पूरा करने के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा एक कदम उठाया गया था। महिलाओं के विरुद्ध सभी प्रकार के भेदभाव के उन्मूलन पर सम्मेलन,जिसे दिसमबर 1979 में पारित किया गया था।महिला अधिकार सम्मेलन के रूप में जाना जाने वाला यह सम्मेलन है। इसे स्वीकार करने वाले राज्यों को संस्कृति,समाज,शिक्षा,राजनीति और कानून के क्षेत्रों में महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव को समाप्त करने के लिए सक्रीय कदम उठाने के लिए बाध्य करता है।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं के अधिकारों के लिए दबाव बढ़ा और फिर उसके बाद सुधार किया गया।मानवाधिकार घोषणा पत्र में स्थापित सामान्य सिदधांतों से समबंधित बाध्यकारी प्रतिबद्धताओं को प्रोत्साहित करने के लिए 1966 में संयुक्त राष्ट्र ने दो मानवाधिकार संधियों को अपनाया। इनके प्रावधान विशेष रूप से महिलाओं पर लागू होते हैं।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि गरीबी और कुपोषण के चक्र में लड़कियाँ सबसे अधिक पीड़ित होती हैं।शिक्षा और प्रजनन अधिकारों की कमी से यह समस्या और भी बढ़ जाती है।साथ ही भारत में महिलाओं को पुरुषों की तुलना में स्वच्छता,घर के बाहर घूमने की स्वतंत्रता,सामाजिक स्वतंत्रता आदि तक समान पहुँच प्राप्त नहीं है।

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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से सुब्रत कुशवाहा मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि पिछले वर्षो में महिलाओं के अधिकारों में सुधार हुआ है लेकिन निरंतरण प्रगति की कोई गारंटी नहीं है। बढ़ते संघर्षो ,बढ़ते अधिनियकवाद और जलवायु परिवर्तन के विनाशकारी प्रभाव के इस दौर में महिलाओं को शिक्षा, रोजगार ,स्वास्थ्य सेवा ,कानूनी अधिकार, हिंसा और अन्य कई मुद्दों का सामना करना पड़ता है

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से नंदू केशरी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलाओं के अधिकारों का एक प्रमुख दावा यह है कि उन्हें सशक्त और तर्क संगत शिक्षा मिलनी चाहिए जो उन्हें विवेक का प्रयोग करने और सार्वजनिक हित में सार्थक योगदान देने में सक्षम बनाए।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलाओं को कई अधिकार प्राप्त हैं जैसे - हिंसा और भेदभाव से मुक्त जीवन जीने का अधिकार, शिक्षा और स्वास्थ्य तक पहुँंच का अधिकार ,संपत्ति रखने का अधिकार ,मतदान का अधिकार और समान काम के लिए समान वेतन का अधिकार शामिल है।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि लड़कियों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए और उनका प्रयोग करना चाहिए। उन्हें अपनी शिक्षा का सदुपयोग ,आत्मनिर्भरता और गरिमा बनाए रखने के लिए करना चाहिए। उन्हें अपने हक की मांग करने और उसके लिए लड़ने के लिए भी तैयार रहना चाहिए ताकि इनके अधिकार को दबाया नहीं जाए

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से गीता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि आज के जमाने में महिलाओं को सम्मान तभी मिलता है जब वो कम खाती,कम बोलती,कम हंसती और कम रोती है। जो महिला गाली सुनकर भी कुछ नही कहती है वो अच्छी है। मगर यदि महिला सम्पत्ति,अपने हक़,कानून और खुद को आगे बढ़ाने की बात बोलती है,उसे प्रताड़ित किया जाता है तथा दबाया जाता है।