झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से गीता सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि इन्होने 'राजीव की डायरी' कार्यक्रम में जेंडर और जमीन की बात सुनी।यह कार्यक्रम सुनने के बाद इनको लगा कि जब महिलाओं को जमीन में अधिकार दिया जाएगा तभी पुरुषों से बराबरी कर पाएंगी।जमीन और सम्पत्ति के हक़ से महिलाओं को वंचित रखा गया है। अगर महिलाओं के पास जमीन होगा तो उनको गाँव,घर,समाज और राज्य में सम्मान की दृष्टि से देखा जाएगा तथा उनको सम्मान मिलेगा।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और अपने स्वास्थ्य व अधिकारों के लिए खड़े होने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। यह पहल महिलाओं को केवल घर तक सीमित न रखकर उन्हें विकास के मुख्य धारा में लाने के लिए संदेश देना चाहिए।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से मदनलाल मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलाओं को अपने अधिकारों कानूनों और सुरक्षा के प्रति जागरूक करना ताकि वे समाज में बराबरी का हक़ पा सके

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से उदय राणा ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं को जमीन में काम करने के बावजूद जमीन में नाम क्यों नहीं होता है ? इसका कारण अज्ञानता और जागरूकता की कमी है।कई महिलाएं अपने कानूनी अधिकारों के बारे में नहीं जानती हैं। वे भी जमीन की मालिक हो सकती हैं। साथ ही सामाजिक दबाव और परिवार और समाज के डर से महिलाएं अपना हिस्सा मांगने में हिचकिचाती हैं।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से अजय मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि पितृसत्तात्मक सोच के कारण महिलाओं को जमीन का अधिकार नही मिलता है।लोगों की यह सोच होती है कि जमीन पर सिर्फ पुरुषों का ही अधिकार होना चाहिए।साथ ही पीढ़ियों से बेटों को सम्पत्ति देने की परम्परा चली आ रही है।

झारखंड राज्य के हजारीबाग जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भारत में खेती में सबसे ज्यादा पसीना बहाने के बावजूद महिलाओं के नाम जमीन न होने का मुख्य कारण पितृसत्तात्मक सोच,सांस्कृतिक परंपराएं और अज्ञानता है । उन्हें पुरुष प्रधान समाज में संपत्ति का उत्तराधिकारी नहीं माना जाता और जागरूकता व कानूनी अधिकारों की जानकारी ना होने के कारण भी वे हक से वंचित रह जाती है ।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से संजीत दास मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए समर्पित एक समावेसी समाज सेवी संस्था प्रकृति ने नागपुर जिले के तीस से अधिक गाँव में काम किया है। प्रकृति के मुताबिक पुरुषों की भागीदारी एक प्रभावी रास्ता है। प्रकृति की कार्यकारी निदेश सुवर्ण दामले का कहना है कि उनको इस बात का एहसास शुरुआत में ही हो गया था कि महिलाओं से बात करना और उन्हें उनके अधिकारों के बारे में बताना जरूरी है

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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से भुवनेश्वर कुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी ग्रामीण विकास न्यायपूर्ण समाज और सतत कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।युवा तकनीकी ज्ञान,नवीन विचारों और ऊर्जा के माध्यम से भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने विवादों को सुलझाने और सामुदायिक प्रबंधन में अहम् भूमिका निभा सकती है।जो स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करता है

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलाओं को भूमि पर अधिकार मिलना चाहिए। इस संदर्भ में पुरुष हितधारकों की भागीदारी का विवरण दिया गया है। इनमें सबसे पहले सरकार और व्यवस्था से जुड़े लोग जैसे -सरपंच ,ग्रामसेवक या पटवारी आते हैं। तो वह कहते हैं कि वह क्रियान्वयन स्तर पर इन ऑफिस होल्डर्स के साथ काम करते हैं लेकिन अगर पचास ग्राम प्रधानों से बात किया जाए तो उनमे से सिर्फ पांच ही महिलाओं के भूमि आवंटन और विराशत के मुद्दों पर बात और काम करने के लिए तैयार होंगे।