झारखण्ड राज्य के हजारीबाग जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलाएं खेत में हर तरह की काम करती हैं लेकिन उनको सिर्फ मजदूर ही समझा जाता है। महिलाओं के आवाज़ को दबा दिया जाता है। महिला खुद के खेत में काम करती है और पैसा कमाती है फिर भी उनको मजदूर के रूप में ही देखा जाता है
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भूमि अधिकारों की सुरक्षा महिलाओं को सामाजिक रूप से सशक्त बनाती है। भूमि स्वामित्व की सुरक्षित अधिकार महिलाओं की सौदेबाजी की शक्ति बढ़ाते हैं और उन्हें सामुदायिक स्तर पर निर्णय लेने में भाग लेने का अवसर प्रदान करते हैं। सामुदायिक शासन में उनकी भागीदारी से उनके ज्ञान और विचारों को निर्णय लेने की प्रक्रिया शामिल किया जा सका है जिससे निर्णयों की गुणवत्ता बढ़ती है और महिलाएं को सशक्त बनाती है।
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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि देश में सतत विकास लक्ष्यों को अपनाने के साथ ही विशेष रूप से कृषि भूमि पर महिलाओं के भूमि अधिकारों के महत्व को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है क्योंकि इसका उल्लेख सत्रह एस बी सी लक्ष्यों में से तीन मिलता है।कानून में बाधाओं को विशेष रूप से कम करना चाहिए
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राहुल रंजन ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारतीय उतराधिकारी अधिनियम 1954 के तहत ईसाई विधवाओं को संपत्ति का एक तिहाई हिस्सा मिलता है और पुरुष एवं महिला वंशजों को इसका दो तिहाई हिस्सा बराबर बराबर मिलता है। आदिवासियों की अपनी प्रथाएं है।जिनके अनुसार कुछ अपवादों को छोड़ कर आमतौर पर महिलाओं को उनकी भूमि का हिस्सा नहीं मिलता है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से महेंद्र राणा ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारत में महिलाओं के भूमि अधिकार विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों और प्रथागत व्यवस्थाओं के माध्यम से सुनिश्चित कि जाते हैं। हिंदू कानून अपने वर्तमान स्वरूप में महिलाओं को भूमि का स्वामित रखने और उसके मामलों का स्वतंत्र रूप से प्रबंधन करने का अधिकार देता है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भारत में सामाजिक विकास के विमर्श में महिलाओं के भूमि अधिकार हमेशा से एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है। कृषि गरीबी उन्मूलन लिंग आधारित हिस्सा में कमी महिलाओं के कल्याण और सशक्तिकरण के संदर्भ में डब्ल्यू ए एल आर के महत्व पर चर्चा की गयी अब व्यापक अकादमी साहित्य और सामाहिक कार्यवाई के अनुभव से यह स्पष्ट होता है कि महिलाओं के भूमि अधिकार लैंगिक समानता को अधिक प्राप्त करने के महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं थैंक्यू
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से लोकेश रंजन ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि कृषि विकास और ग़रीबी उन्मूलन का एक महत्वपूर्ण साधन हो सकती है लेकिन कई देशों में यह क्षेत्र कमजोर प्रदर्शन कर रहा है जिसका एक कारण है यह की महिलाएं जो अक्सर कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक महत्पूर्ण साधन हो सकती है।लेकिन कई देशों में यह क्षेत्र कमजोर प्रदर्शन कर रहा है
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से अर्जुन मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिला किसान के समक्ष कई चुनौतियाँ होती हैं।जैसे - घर के काम,बच्चों की देखभाल और पानी ईधन,जुटाने की जिम्मेदारी भी महिलाओं पर होती है। जानकारी और शिक्षा की कमी भी एक वजह है। साक्षरता की निम्न दर और पुरुष प्रधान कृषि विस्तार सेवाओं के कारण उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी कम मिल पाती है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भूमि स्वामित्व का अभाव में अधिकांश महिलाओं के पास उनके नाम पर जमीन नहीं होती है। जिसे वे लोन या सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते हैं। ऋण और संसाधनों तक सीमित पहुंच -इसमें बैंक लोन ,खाद उन्नत्ति बीज और यंत्रीकरण तक उनकी पहुंच पुरुषों की तुलना में बहुत कम है। अवैध तकनीक श्रम और असमान वेतन -वे खेतों में सबसे कठिन काम जैसे की रोपाई,निराई ,कटाई ,जुताई करती हैं। लेकिन उन्हें अक्सर किसान के रूप में मान्यता नहीं मिलती है और समान काम के लिए पुरुषों से कम वेतन भी मिलता है
