झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से उदय राणा ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं को जमीन में काम करने के बावजूद जमीन में नाम क्यों नहीं होता है ? इसका कारण अज्ञानता और जागरूकता की कमी है।कई महिलाएं अपने कानूनी अधिकारों के बारे में नहीं जानती हैं। वे भी जमीन की मालिक हो सकती हैं। साथ ही सामाजिक दबाव और परिवार और समाज के डर से महिलाएं अपना हिस्सा मांगने में हिचकिचाती हैं।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से अजय मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि पितृसत्तात्मक सोच के कारण महिलाओं को जमीन का अधिकार नही मिलता है।लोगों की यह सोच होती है कि जमीन पर सिर्फ पुरुषों का ही अधिकार होना चाहिए।साथ ही पीढ़ियों से बेटों को सम्पत्ति देने की परम्परा चली आ रही है।
झारखंड राज्य के हजारीबाग जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भारत में खेती में सबसे ज्यादा पसीना बहाने के बावजूद महिलाओं के नाम जमीन न होने का मुख्य कारण पितृसत्तात्मक सोच,सांस्कृतिक परंपराएं और अज्ञानता है । उन्हें पुरुष प्रधान समाज में संपत्ति का उत्तराधिकारी नहीं माना जाता और जागरूकता व कानूनी अधिकारों की जानकारी ना होने के कारण भी वे हक से वंचित रह जाती है ।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से संजीत दास मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए समर्पित एक समावेसी समाज सेवी संस्था प्रकृति ने नागपुर जिले के तीस से अधिक गाँव में काम किया है। प्रकृति के मुताबिक पुरुषों की भागीदारी एक प्रभावी रास्ता है। प्रकृति की कार्यकारी निदेश सुवर्ण दामले का कहना है कि उनको इस बात का एहसास शुरुआत में ही हो गया था कि महिलाओं से बात करना और उन्हें उनके अधिकारों के बारे में बताना जरूरी है
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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से भुवनेश्वर कुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी ग्रामीण विकास न्यायपूर्ण समाज और सतत कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।युवा तकनीकी ज्ञान,नवीन विचारों और ऊर्जा के माध्यम से भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने विवादों को सुलझाने और सामुदायिक प्रबंधन में अहम् भूमिका निभा सकती है।जो स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करता है
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलाओं को भूमि पर अधिकार मिलना चाहिए। इस संदर्भ में पुरुष हितधारकों की भागीदारी का विवरण दिया गया है। इनमें सबसे पहले सरकार और व्यवस्था से जुड़े लोग जैसे -सरपंच ,ग्रामसेवक या पटवारी आते हैं। तो वह कहते हैं कि वह क्रियान्वयन स्तर पर इन ऑफिस होल्डर्स के साथ काम करते हैं लेकिन अगर पचास ग्राम प्रधानों से बात किया जाए तो उनमे से सिर्फ पांच ही महिलाओं के भूमि आवंटन और विराशत के मुद्दों पर बात और काम करने के लिए तैयार होंगे।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भूमि स्वामित्व महिला सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है लेकिन भारत में महिलाओं की भूमि हीनता पर लिंग आधारित डेटा की कमी है।हिंदू उत्तराधिकार संशोधन अधिनियम दो हजार पाँच जैसे प्रगतिशील कानून के वजह से देश में भूमि के संयुक्त स्वामित्व में वृद्धि हुई है।
झारखण्ड राज्य के हजारीबाग जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलाएं खेत में हर तरह की काम करती हैं लेकिन उनको सिर्फ मजदूर ही समझा जाता है। महिलाओं के आवाज़ को दबा दिया जाता है। महिला खुद के खेत में काम करती है और पैसा कमाती है फिर भी उनको मजदूर के रूप में ही देखा जाता है
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भूमि अधिकारों की सुरक्षा महिलाओं को सामाजिक रूप से सशक्त बनाती है। भूमि स्वामित्व की सुरक्षित अधिकार महिलाओं की सौदेबाजी की शक्ति बढ़ाते हैं और उन्हें सामुदायिक स्तर पर निर्णय लेने में भाग लेने का अवसर प्रदान करते हैं। सामुदायिक शासन में उनकी भागीदारी से उनके ज्ञान और विचारों को निर्णय लेने की प्रक्रिया शामिल किया जा सका है जिससे निर्णयों की गुणवत्ता बढ़ती है और महिलाएं को सशक्त बनाती है।
