क्या आपके गाँव या मोहल्ले में किसी महिला ने अपने नाम पर जमीन या घर के कागज़ बनवाने की कोशिश की है? क्या उसका जीवन बदला? क्या परिवार का व्यवहार बदला? क्या बेटियों और बहुओं का नाम जमीन और घर के कागज़ में होना चाहिए? कैसे परिवार मजबूत होगा? आपकी राय भले ही पक्ष में हो विपक्ष में अपनी राय जरूर रिकार्ड करें। राय रिकॉर्ड करने के लिए अपने फोन से 3 नंबर का बटन दबाएँ या मोबाइल वाणी ऐप में लाल बटन दबाकर अपनी बात रिकॉर्ड करें।

दोस्तों, महिलाओं के भूमि अधिकार सुरक्षित करने में स्थानीय शासन की भूमिका केंद्रीय है। यदि ग्राम पंचायतें भूमि अधिकार को प्राथमिकता दें, महिलाओं को लाभार्थी सूचियों में शामिल करें, अधिकारियों को प्रशिक्षण दें और समुदाय संगठनों के साथ मिलकर काम करें, तो ग्रामीण भारत में महिलाओं का सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण संभव है। स्पष्ट है कि जमीन पर अधिकार सिर्फ कागज़ी नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और स्वतंत्रता का सवाल है — और इसका समाधान गांव से ही शुरू होगा। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- आपके परिवार में जमीन किसके नाम है? क्या महिलाओं का नाम भी उसमें शामिल है *--- क्या आपकी पंचायत ने कभी महिलाओं को जमीन के अधिकार के बारे में कोई जानकारी या बैठक रखी है? अगर हाँ, तो उसका असर क्या रहा?” *--- अगर महिलाओं के नाम जमीन हो जाए, तो आपके हिसाब से उनकी ज़िंदगी में क्या-क्या बदल सकता है?”

इस आख़िरी कड़ी में पानी बचाने और ज़मीन को सँभालने के आसान तरीकों पर बात होती है। खेती और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की समझ इस एपिसोड का मुख्य संदेश है |

इस एपिसोड में बारिश न होने और फिर अचानक ज़्यादा होने से फसल को होने वाले नुकसान की बात है। मौसम की मार और उससे जूझते किसान की असली परेशानी यहाँ दिखाई देती है।

गांव आजीविका और हम कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ श्री जीब दास साहू जैविक खेती के लिए नीमास्त्र के प्रयोग और लाभ की जानकारी दे रहे हैं ।

इस कड़ी में बदलते मौसम की बात होती है और उसका खेती पर पड़ने वाला असर सामने आता है। किसान नई परिस्थितियों में अपनी फसल को कैसे सँभालने की कोशिश कर रहे हैं, यही इस कहानी की शुरुआत है।

कुल मिलाकर, महिलाओं के लिए संयुक्त स्वामित्व सिर्फ़ काग़ज़ी नियम नहीं है, बल्कि समाज को बदलने का एक मज़बूत ज़रिया है। यह महिलाओं को मज़बूत बनाता है, परिवार में संतुलन लाता है और आने वाली पीढ़ियों के लिए बराबरी की एक अच्छी मिसाल पेश करता है। महिलाओं को ज़मीन और संपत्ति में बराबर हक़ देना एक बेहतर और न्यायपूर्ण समाज की ओर बड़ा कदम है। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- क्या आपके परिवार की ज़मीन या घर महिलाओं के नाम पर भी संयुक्त रूप से दर्ज है? *--- अगर नहीं, तो क्या आप संपत्ति में बेटियों और बहुओं को बराबर अधिकार देने पर विचार करेंगे? *--- क्या आप मानते हैं कि महिलाओं को ज़मीन का अधिकार मिलने से परिवार ज़्यादा सुरक्षित और मज़बूत होता है? *--- क्या अगली पीढ़ी को बराबरी की सीख देने के लिए आप संयुक्त स्वामित्व अपनाना चाहेंगे?

गांव आजीविका और हम कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ श्री जीब दास साहू जैविक खेती के लिए नीमास्त्र निर्माण और उपयोग की जानकारी दे रहे हैं ।

अधिकांश व्यक्तिगत पट्टे पुरुषों के नाम पर होते हैं. सामुदायिक अधिकारों में भी महिलाओं को भी कम प्रतिनिधित्व दिया जाता है. इसके चलते महिलाएं केवल खेत मजदूर बनकर रह जाती हैं. महिलाओं को इसका नुकसान यह होता है कि बैंक, बीमा तथा दूसरी सरकारी सहायता का लाभ नहीं उठा पाती है, जो उनके लिए चलाई जा रही हैं.

गांव आजीविका और हम कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ श्री जीब दास साहू आम के छोटे पौधों में लगने वाले तना छेदक कीड़े और उसके उपचार की जानकारी दे रहे हैं ।