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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग से गीता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि किसानों का शहरों की ओर पलायन कम आय, शिक्षा और स्वास्थ्य समस्याओं से उपजी समस्या है, जबकि गाँव में ही कृषि का विकल्प,जैसे- फूड प्रोसेसिंग, जैविक खेती, पशुपालन,इत्यादि खोजना एक दीर्घकालिक और बेहतर समाधान है। लेकिन,अचानक खर्चे के लिए पैसे चाहिए और इस जरूरत के लिए मौसमी पलायन भी जरूरी हो जाता है। कृषि का विकल्प गाँव में खोजना एक स्थायी समाधान हो सकता है। कम पानी वाली फसलों को लगाया जा सकता है। गाँव के पास ही कृषि से जुड़े छोटे उद्योग (जैसे- दूध डेयरी, अचार-पापड़, जूट लगा सकते हैं। मछली पालन, मधुमक्खी पालन, या जैविक खेती भी किसानों के लिए एक उत्तम विकल्प है।
झारखंड राज्य के हजारीबाग जिला से पिंकी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि भीषण गर्मी या ठंड से फसल को बचाने के लिए स्मार्ट सिंचाई बेहद असरदार है। जैसे ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई से कम पानी में अधिक समय तक मिट्टी की नमी बनाए रखी जा सकती हैफसलों की जरूरत के अनुसार समय पर सिंचाई करें और जल का कुशल उपयोग करें। शाम के समय पानी देने से अधिक लाभ मिलता है।वर्षा जल संचयन तालाब और जल निकाय बना कर बारिश का पानी बचाया जा सकता है सर्दियों में पाले और ठंड से सब्ज़ियों को बचाने के लिए पौधों को ढकना, हल्की सिंचाई और उपयुक्त संरक्षण जैसे टनल तकनीक अपनाएं जा सकते हैं फसल पर कीट या रोग के शुरुआती लक्षण तुरंत पहचान कर जैविक या नियंत्रित कीटनाशक का उपयोग किया जा सकता है
झारखंड राज्य के हजारीबाग जिला से पिंकी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि बेमौसम बारिश से फसल खराब हो जाते हैं। बारिश के कारण मिट्टी में नमी बहुत बढ़ जाती है। जलभराव के कारण सब्जी के पौधों की जड़ों पर फंगस लग रहा है। खेतों में पानी भरने से आलू में झुलसा रोग हो रहा है। पौधे पीले होकर सूख रहे हैं। मटर की फसल भी बारिश से प्रभावित हुई है। फसलों को बचाने के लिए जल निकासी की व्यवस्था पर ज्यादा ध्यान दिया है इसके बाद एक लीटर पानी में 2 ग्राम कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का घोल बनाकर सब्जी के पौधों की जड़ों में डाला है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि कई महिलाएं खेती करती हैं लेकिन उनको जमीन में अधिकार नहीं दिया जाता है। 80 % जमीन पुरुषों के नाम होती है। इसका मुख्या कारण पितृसत्ता है। समाज में यह धारणा रही है कि वंश पुरुष के नाम से चलता है इसलिए संपत्ति बेटों को दिया जा रहा है। महिलाओं के ससुराल जाने के कारण उनको मायके में अधिकार नहीं दिया जाता है ताकि सम्पाती का विभाजन न हो सके। समाजिक दबाव के कारण पहले महिला अपने अधिकार के लिए दावा नहीं कर पाती थी लेकिन हिन्दू उत्तराधिकारी अधिनयम 2005 के संसोधन के बाद पुत्र के तरह पुत्रियों को भी अधिकार दिया गया है
इस आख़िरी कड़ी में पानी बचाने और ज़मीन को सँभालने के आसान तरीकों पर बात होती है। खेती और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की समझ इस एपिसोड का मुख्य संदेश है |
इस एपिसोड में बारिश न होने और फिर अचानक ज़्यादा होने से फसल को होने वाले नुकसान की बात है। मौसम की मार और उससे जूझते किसान की असली परेशानी यहाँ दिखाई देती है।
