झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से सदाम अंसारी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि 1995 में विश्व नेताओं ने बीजिंग घोषणा और कार्य योजना के माध्यम से लैंगिक समानता के प्रति ऐतिहासिक प्रतिबद्धता जताई थी।।जो महिलाओं के अधिकारों के लिए लक्ष्य निर्धारित करने वाली एक अभूतपूर्व योजना थी।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि सदियों से महिलाएं अधिकारों और अवसरों के लिए संघर्ष कर रही हैं।मताधिकार आंदोलन से लेकर डिजिटल कार्यकर्ताओं तक हर पीढ़ी ने सीमाओं को आगे बढ़ाया है। बाधाओं को तोड़ा है और पीछे हटने से इनकार किया है। हर नीतिगत बदलाव और कानूनी जीत के पीछे निडर नारीवाादियों का हाथ रहा है। जिन्होंने संगठित होकर विरोध प्रदर्शन कर के एवं कार्यवाई की मांग कर के अपनी बात रखी है
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में वृद्धि के कई कारण हैं। जैसे -पुलिस की देरी और अपराधियों को पकड़ने में असमर्थता।यौन अपराधों के खिलाफ कानूनों को लागु करने में पुलिस का रवैया संतोषजनक नही है।पुलिस कर्मियों द्वारा महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार भी किया जाता है
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि पुरुष महिलाओं के अधिकार के खिलाफ होते हैं। क्योंकि पुरुषों के अनुसार, मताधिकार मिलने से पुरुष महिलाओं का भरण-पोषण करने में असमर्थ हो जायेंगे। तलाक की दर में भारी वृद्धि होगी और महिलाओं को श्रम बाजार में प्रवेश करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।राजनीतिक जिम्मेदारियाँ पहले से ही व्यस्त महिलाओं पर आरोप बोझ बढ़ा देंगी। नई महिला की छवि पत्नियों और मताओं के रूप में उन्हें प्राप्त सम्मान और प्रतिष्ठा को नष्ट कर देगी।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राहुल शुक्ला ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारत के लोग महिलाओं के लिए समान अधिकार चाहते हैं।बल्कि अगर पुरुष महिलाओं को अधिकार नही देते हैं तो यह असामान्य और अन्यायपूर्ण व्यवहार होगा। ये भारतीय हैं और इन्होने अंतर को महसूस किया है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि प्रत्येक महिला और लड़की को यौन और प्रजनन संबंधी अधिकार प्राप्त है।इसका अर्थ है कि उन्हें गर्भ निरोधक और सुरक्षित गर्भपात जैसी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँंच का अधिकार है। उन्हें यह चुनने का अधिकार है की वे कब,किससे और कैसे शादी करें।उन्हें यह भी तय करने का अधिकार है कि वे बच्चे पैदा करनाा चाहती हैं या नहीं। महिलाओं को लिंग आधारित हिंसा के भय के बिना जीने में सक्षम होना चाहिए।लेकिन सभी महिलाओं को इन अधिकारों का आनंद लेने में अभी लम्बा समय लगेगा।उदाहरण के लिए दुनियां भर में कई महिलाएं और लड़किया अभी भी सुरक्षित और कानूनी गर्भपात कराने में असमर्थ हैं।कई देशों में जो लोग गर्भपात करना चाहते हैं या जिन्हें इसकी आवश्यकता है,उन्हें अक्सर एक असंभव विकल्प चुनने के लिए मजबूर होना पड़ता है। ऐसे लोगों को या तो अपनी जान जोखिम में डालना पड़ता है या जेल जाना पड़ता है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से अनिज रावत ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि सदियों से और आज भी कार्यकर्ता महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।उनमे से एक है - महिलाओं का मताधिकार।1893 में महिलाओं के मताधिकार के लिए आंदोलन शुरू हुआ। न्यूजीलैंड (माओरी भाषा में ओटेरोवा) 1893 में राष्ट्रीय स्तर पर सभी महिलाओं को मताधिकार देने वाला दुनिया का पहला देश बना। यह आंदोलन विश्व भर में फैल गया और इस संघर्ष में शामिल सभी लोगों के प्रयासों के कारण आज महिलाओं को मताधिकार प्राप्त है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि कई वर्षों से महिला अधिकार आंदोलन असमानता को दूर करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।कानूनों में बदलाव के लिए अभियान चला रहे हैं। ताकि कानून अगर बदल जाए तो हम लोगों के लिए कुछ फायदेमंद हो या अपने अधिकारों के सम्मान की मांग करते हुए सड़कों पर उतर रहे हैं।डिजिटल युग में नए आंदोलन भी देखा जा रहा है। जैसे कि हैजमीटो अभियान,जो लिंग आधारित हिंसा और यौन उत्पीड़न की व्यापकता को उजागर करता है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि हम सभी को मानवाधिकार प्राप्त हैं।इनमें हिंसा और भेदभाव से मुक्त जीवन जीने का अधिकार है। शारीरिक और मानसिकता स्वास्थ्य के उच्तम संभव स्तर का आनंद लेने का अधिकार,शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार,संपत्ति रखने का अधिकार,मतदान करने का अधिकार और समान वेतन अर्जित करने का अधिकार भी शामिल है।लेकिन विश्व में आज भी कई महिलाओं और लड़कियों को लिंग और लैंगिक पहचान के आधार पर भेदभाव का सामना करना पड़ता है।लैंगिक आसमानता कई ऐसी समस्याओं की जड़ है जो महिलाओं और लड़कियों को प्रभावित करती है
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाएं अपने अधिकार नही ले पाती हैं। इसके कई कारण हैं।जैसे अशिक्षा,क़ानूनी जानकारी का अभाव, पितृ सत्तात्मक मानसिकता,इत्यादि।समाज और परिवार में पुरुषों को महत्व देने वाली सोच,महिलाओं की आवाज को दबा दिया जाता है।संपत्ति का स्वामित्व ना होना और रोजगार के अवसरों की कमी के कारण महिलाओं को आर्थिक रूप से पुरुषों पर निर्भर रहना पड़ता है।साथ ही सामाजिक दबाव,बदनामी और परिवार टूटने का डर, महिलाओं को अपने अधिकार के प्रति उदासीन रखता है।
