बाल विवाह मुक्त झारखण्ड अभियान की दूसरी कड़ी में यह बताया गया कि बाल विवाह का मतलब 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के की शादी कराना एक अपराध है। क्योकि इस उम्र में बच्चो का शारीरिक और मानसिक विकास पूरा नहीं हो पता है।साथ ही इस कड़ी में यह भी बताया गया कि झारखण्ड में 32% से अधिक लड़कों की शादी कम उम्र में ही करा दी जाती है। यह एक चिंता का विषय है। बाल विवाह का कारण केवल जानकारी का अभाव ही नहीं बल्कि गरीबी और दहेज़ भी एक मुख्य कारण है।लोग यह मानतें हैं की बेटियों की शादी कम उम्र में करने पर अधिक दहेज़ नहीं देना पड़ेगा।लेकिन कम उम्र में शादी करा देने पर वे परिवार नियोजन के बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं और इस स्थिति में उन्हें कई परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है।कम उम्र और जानकारी के अभाव में ही बच्चे होने का खतरा बन जाता है।दोस्तों आपके हिसाब से समाज में आज भी आखिर बाल विवाह क्यों किया जाता है।
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बाल विवाह मुक्त झारखण्ड अभियान की पहली कड़ी में यह बताया गया कि बाल संरक्षण का मलतब बच्चों को हिंसा, बुरे विचार,शारीरिक,मानसिक या किसी तरह के शोषण और बेइज्जती से बचाना। इनसे प्रभावित बच्चों को सहारा और मद्दद प्रदान करना भी बाल संरक्षण का एक हिस्सा होता है. इस कार्य के लिए कई सारे आसरे गृह भी मौजूद हैं।सयुंक्त राष्ट्र के बाल संरक्षण अधिवेशन के मुताबिक 18 वर्ष से कम उम्र के लोगों की गिनती बच्चो में की जाती है। समाज में कई तरीकों से बच्चों के साथ शोषण किया जाता है जैसे- बाल मजदूरी जंहा लोग बच्चो से इस लिए काम करवाते हैं क्योकि बच्चों को कम मजदूरी देना पड़ता है।साथ ही कानून एक्ट की भी जानकारी दी गई। बच्चों की सुरक्षा संबंधित कई सारी जानकारियों के बारे में बताया गया। दोस्तों क्या आपको भी लगता है की बाल विवाह एक हिंसा है। अगर हाँ तो क्यों और यदि ना तो क्यों नहीं।
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