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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला के लोअर बाजार से गीता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि महिला और पुरुषों की असमानता की बात पूर्वजों से चला आ रहा है। काम का बंटवारा में भी ऐसा बंटवारा किया गया है जहाँ पर महिलाओं को ज्यादा विकास ना हो, बौ्धिक विकास ना हो, मशीनरी विकास ना हो आदि। कारखाना में काम का बंटवारा में देखा गया है कि जितनी महिला काम करने के लिए गई है उनको काम में चुनने और फटकने वाला काम दिया गया है। वो सूप से फटकेगी, चुनेंगे जितना कंकड़ है उसको चुनेगी, फटकेगी और झाड़ू देगी ,उनको ऐसा काम दिया गया है जिससे उनका विकास न हो सके। वो छोटी चीज में सिमित रह जाए और पुरुषों को मशीन चलाने का काम दिया गया है। वो मशीन चलाएंगे ,मशीन का मरम्मती करेंगे, मशीन कैसे बनता है वो जानेंगे ,तो इस तरह करके काम का बंटवारा करके महिलाओं को विकास का अवरोध बना के रखा गया है । महिला भी मशीन बना सकती हैं । महिला भी मशीन का मरम्मत कर सकती हैं। इसलिए काम का बंटवारा महिला और पुरुष दोनों को बराबर होनी चाहिए।

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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि द्वितीय विश्व युद्ध के अपराधों के मद्देनजर 1948 में मानवाधिकार की सर्वभौमिक घोषणा को अपना कर अंतररााष्ट्रीय समुदाय ने लिंग,धार्मिक और राजनीतिक मान्यताओं राष्ट्रीय और जातीय मूल या सामाजिक स्थिति की परवाह किए बिना, सभी लोगों के लिए व्यापक सुरक्षा स्थापित करने का प्रयास किया।यह घोषणा मौलिक,राजनीतिक,आर्थिक,सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों को स्थापित करती है। इनमें हिंसा और भेदभाव से मुक्त जीवन जीने का अधिकार, शिक्षा और स्वास्थ्य तक पहुँंच का अधिकार,संपत्ति रखने का अधिकार,मतदान का अधिकार और कार्य के बदले वेतन का अधिकार शामिल है।

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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से अरुण ठाकुर ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं और लड़कियों की अधिकारों को वास्तव में सुनिश्चित करने के लिए विशेष कार्य की आवश्यकता थी। इस कमी को पूरा करने के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा एक कदम उठाया गया था। महिलाओं के विरुद्ध सभी प्रकार के भेदभाव के उन्मूलन पर सम्मेलन,जिसे दिसमबर 1979 में पारित किया गया था।महिला अधिकार सम्मेलन के रूप में जाना जाने वाला यह सम्मेलन है। इसे स्वीकार करने वाले राज्यों को संस्कृति,समाज,शिक्षा,राजनीति और कानून के क्षेत्रों में महिलाओं के विरुद्ध भेदभाव को समाप्त करने के लिए सक्रीय कदम उठाने के लिए बाध्य करता है।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं के अधिकारों के लिए दबाव बढ़ा और फिर उसके बाद सुधार किया गया।मानवाधिकार घोषणा पत्र में स्थापित सामान्य सिदधांतों से समबंधित बाध्यकारी प्रतिबद्धताओं को प्रोत्साहित करने के लिए 1966 में संयुक्त राष्ट्र ने दो मानवाधिकार संधियों को अपनाया। इनके प्रावधान विशेष रूप से महिलाओं पर लागू होते हैं।