रामानंद जी मधुबनी खुटौना से मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि सरकार के लाख प्रयासों के बावजूद गुणवत्तापूर्वक शिक्षा दुर्लभ वस्तु बनती जा रही है। सरकार की पोशाक ,छात्रव्रिति ,मिड -डे मील ,साईकिल योजनाओं जैसी लुभानी वाली योजना भी शिक्षा के लिए निजी विद्यालयों की ओर बढ़ती झुकाव को नहीं रोक पा रही है ,इसका क्या कारण है ?क्योंकि सरकारी विद्यालयों में छात्र -शिक्षिकाओं अनुपात सही नहीं है एवम शिक्षकों का अभाव है। सरकारी शिक्षक अपनी जवाबदेही से भागते है। वेतन काम के कारन उनमे विद्यापन के प्रति उत्त्साह में कमी है ,अतः सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई-लिखाई चौपट है ,दूसरी और निजी विद्यालयों में नियंत्रक विद्यालय संचालक के पास रहता है जो शिक्षक की नियुक्ति करते है तथा नियन्तण रखते है साथ ही अध्यापन की निगरानी भी करते है। जिसमे उनको बताया जाता है कि अच्छी शिक्षा नहीं देने पर छात्रों की संख्या घटेगी जिसका असर विद्यालय के आमदनी पर पड़ेगा ,इसलिए कड़ी मेहनत ,निगरानी और अनुशासन पर ध्यान देना चाहिए।
जिला मधुबनी,प्रखंड खजौली से रामाशीष सिंह जी मोबाईल वाणी के माध्यम से बता रहे है की किसी भी जन-वितरण प्रणाली की दुकान से उपभोक्ताओं को निर्धारित एवम उचित मात्रा में खाद्यान और मिट्टी तेल नहीं मिलता।डीलर, एमओ,एडीएसओ, एसडीओ का प्रत्येक विभाग में सिंडिकेट संगठित गिरोह बना हुआ है।हर स्तर पर पंचायत,प्रखंड,जिला एवम राज्य पर निगरानी समिति है।फिर भी उपभोक्ताओं के हित की रक्षा नहीं हो पा रही।पांच किलो खाद्यान एवम पौने तीन लीटर मिट्टी तेल की जगह चार किलो खाद्यान और दो लोटर मिट्टी तेल मिलता है।प्रत्येक राज्य में 40-45% लोग राशन कार्ड एवम कूपन से वंचित है।शिकायत करने पर भी कोई कार्रवाई नहीं होती है।
रामाशीष जी मधुबनी खजौली से मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि हमे प्रकृति के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। प्रकृति जीवन दयनीय है और इसी से हमारा अस्तित्व है। प्रकृति ने हमारे सभी जीवन के सभी जरूरतों को पूरा किया है लेकिन हम उसके लिए कुछ नहीं करते। हमने प्रकृति से छिना है ज्यादा और सवारां है कम और अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए प्रकृति का शोषण कर रहे है साथ ही हम आज पेड़-पौधे की तेज़ी से कटाई कर रहे है।
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रामाशीष सिंह,जिला मधुबनी के खजौली प्रखंड से मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि मधुबनी जिले के खजौली प्रखंड स्थित साढ़े पांच किलो मीटर लंबी खजौली नैनापट्टी सड़क की स्थिति जर्जर है।इस पथ पर अवागमन में काफी कठिनाई होती है।इसलिए इस जिले में सुधार की आवश्यकता है लेकिन फिर भी स्थानीय जन प्रतिनिधि इस ओर ध्यान नहीं दे रहे है जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
प्रखंड खजौली, जिला मधुबनी से रामाशीष सिंह जी कहते हैं कि राज्य सरकार एवं विभागीय पदाधिकारियों की उदासीनता के कारण राज्य में खाद्य सुरक्षा योजना असफल साबित हो रही है।गौरतलब है कि राज्य के लाखों गरीब एवं असहाय परिवार खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ लेने के लिए दर-दर की ठोकरे खाने को बेवस हैं।साथ ही वंचित लाभुक इस योजना के लाभ लेने हेतु कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं बावजूद इसके सरकार खाद्य सुरक्षा योजना से वंचित लाभुकों को इस योजना का लाभ दिलाने लिए जिला स्तर पर कोई ठोस कदम नही उठाई रही है। सरकार के इस उदासीन रवैये से आम लोगों में काफी आक्रोश है।
प्रखंड खजौली, जिला मधुबनी से रामाशीष सिंह जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते हैं कि खजौली प्रखंड अन्तर्गत कन्हौली पंचायत में विदेशर उपशाखा नहर के किनारे लगभग 5 -7 साल पहले वन विभाग द्वारा वृक्षा रोपण किया गया था।नहर किनारे लगे इन वृक्षों के कारण कन्हौली एवं हरिस्वारा गांव में काफी हरियाली थी लेकिन विडम्बना यह है कि आज वन रक्षी और लकड़ी तस्करों के मिलीभगत से नहर किनारे लगे वृक्षों की संख्या काफी कम हो गई है। वे कहते हैं कि अगर आगे भी ऐसा ही रवैया रहा, तो बहुत जल्द वृक्ष ख़त्म हो जायेंगे और यह जगह वीरान हो जायेगा। अतः समाहर्ता जिला मधुबनी को इस ओर ध्यान देने की जरुरत है।
