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जिला मधुबनी प्रखंड खजौली से रामाशीष सिंह जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है की खजौली बाजार में दर्जनों बाल मजदूरों को होटलों ,विभिन्न प्रकार के खाद्यानों ,मिठाई दुकानों में बाल मजदूरी करते आसानी से देखा जा सकता है।एक तरफ तो उन्हें उचित मजदूरी भी नहीं मिलती दूसरी तरफ उन्हें सुबह के पांच बजे से लेकर रात के दस बजे तक मजदूरी करनी पड़ती है।आर्थिक परेशानी की वजह से ये बाल मजदूर अपने परिवार के भरन -पोषण के लिए बाल मजदूरी करने को बाध्य है।सरकार को इस समस्या की तरफ ध्यान देने की जरुरत है।
जिला मधुबनी प्रखंड खजौली से रामाशीष सिंह जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है की बिहार राज्य के ग्रामीण क्षेत्रो में शमशान के लिए भूमि के आभाव के कारण नदी और नहरों के तटबंधे शमशान के रूप में तब्दील हो रही है।लोग इनके किनारें जब तब शवदाह कर रहे है। यह स्थिति राज्य में प्रायः सभी गावों की है।कई जगहों की शमशान की भूमि को भी अतिक्रमित कर लिया गया है ,ऐसी स्थिति में मृतक के परिवारजनों के समक्ष समस्या खड़ी हो गयी है की शवदाह कहां करे।सरकार को इस गंभीर समस्या पर विचार करना चाहिए।
जिला मधुबनी प्रखंड खजौली से रामाशीष सिंह जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है की खेलों का जीवन में है विशेष महत्व है।खेल गतिविधियों से सामाजिक समरसता ,एकता और परस्पर मैत्री की भावना को बल मिलता है।भारत विभिन्न भाषाओं और बोलियों के साथ साथ भिन्न भिन्न वेशभूषा वाला एक अनोखा और महान देश है।विविधता में एकता की भावना के साथ हम देशवासी खेल गतिविधियों, शिक्षा और संस्कारों के माध्यम से विभिन्न प्रांतों से परस्पर जुड़े हुए है।खेल एक बड़ी ताकत है ,खेल से शारीरिक और मानसिक विकास होता है।खेल जीवन जीने जीने की कला सिखाता है।खेल से भाईचारा बढ़ाने का मौका मिलता है ,साथ ही दूसरे प्रांतो व देश की सभ्यता ,संस्कृति सिखने का भी मौका मिलता है।
जिला मधुबनी प्रखंड खजौली से रामाशीष सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है की बिहार में पंचायत प्रतिनिधियो को अधिक अधिकार देने की बात सिर्फ भाषणों और कागजों तक ही सिमित है।ध्यान देने की बात है की सांसदों और विधायकों की तरह त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के प्रतिनिधि और जन प्रतिनिधि है जिन्हे जनता द्वारा निर्वाचित भी किया जाता है। सांसदों और विधायकों को वेतनभत्ते और आवास की सुविधाएं दी जाती है।इन सुविधाओं को बनाने के लिए क़ानूनी अधिकार भी उन्हें प्राप्त है।जबकि पंचायत प्रतिनिधियों के पास इस प्रकार का कानून बनाने जैसा कोई अधिकार प्राप्त नहीं है।यह सौतेला वय्वहार नहीं तो और क्या है।इस सोच के साथ स्थानीय स्वराज को मजबूत करने का सपना शायद ही पूरा हो पायेगा
बिहार राज्य के मधुबनी जिले के खजौली प्रखंड से संवाददाता रामाशीष सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से जानकरी दी है कि खजौली प्रखंड के कन्हौली पंचायत के वार्ड नंबर एक में बाँस के खम्भों के सहारे कई वर्षो से बिजली की तारें टिकीं है।जिस कारण आंधी तूफ़ान में आग लगने और एवं जान-माल की बर्बादी की चिंता यहाँ के लोगों को सताती रहती है।लेकिन बिहार राज्य के विधुत विभाग के कर्मचारियों एवं पदाधिकारियों को यहाँ बिजली खम्भे लगाने की चिंता ही नहीं हैं। कई बार बिजली विभाग को इस समस्या के विषय में अवगत कराया गया लेकिन इस पर कोई कार्यवाई नहीं की गयी।
जिला मधुबनी के खजौली प्रखंड से रामाशीष सिंह जी मोबाईल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि इन दिनों शहर एवं देहातों में शादी के मौके पर ध्वनि प्रदूषण किया जा रहा है। यदि लोग गाजे-बाजे का उपयोग नहीं हो तो शायद शादी की रस्म ही अधूरी रह जाएगी।इसकी चिंता न शादी के आयोजकों को है और न ही प्रशाशन को इसका कुप्रभाव जनता भुगत रही है।इन बाजो पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानून भी है पर इसका निराकरण नहीं हो रहा।
जिला मधुबनी के खजौली प्रखंड से रामाशीष सिंह जी मोबाईल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि देश के प्रत्येक भाग से लेकर बिहार-झारखण्ड में लगभग खाद्य सामग्री में मिलावट का गोरख धंधा लम्बे समय से चल रहा है।जैसे दाल,तेल,दूध,मशाला सहित अन्य खाद्य सामग्रीयों में देखा जा सकता है। जिसका लम्बे समय से तो निदान नहीं निकल सका। मौत के सौदागर,व्यापारी जल्द ही मालामाल होने के लिए इस घातक कार्य को अंजाम दे रहे हैं। इसके लिए विभाग द्वारा भी कोई क़ानूनी करवाई नहीं की जा रही है।इन मिलावट खोरो पर हत्या का मामला दर्ज कर इन्हें मौत की सजा देने का प्रावधान होना चाहिए। जिससे लोग मिलावट करने से डरें।
बिहार राज्य के मधुबनी जिले के खजौली प्रखंड से संवाददाता रामाशीष सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से देश में खुल रहे वृद्ध आश्रम और विधवा आश्रम के सम्बन्ध में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जहाँ एक और मनुष्य आसमान की ऊँचाइयाँ छु रहा है,अंतरिक्ष की गहराइयों की खोज कर रहा है,वहीं दूसरी ओर मनुष्यों का नैतिक पतन भी हो रहा है।देश में वृद्धा आश्रम और विधवा आश्रम की जरुरत बताई जा रही है।भारत को श्रवण कुमार का देश कहते हैं लेकिन आज आधुनिकता के रंग में लोग अपने बूढ़े माता-पिता के साथ नौकरों की तरह बर्ताव करते हैं।आज बच्चों के पास दोस्तों के साथ घूमने,पार्टी करने,मॉल में शॉपिंग करने का समय है,लेकिन अपने माता-पिता के साथ बिताने के लिए कुछ समय नहीं है।यही कारण है कि आज वृद्ध आश्रम और विधवा आश्रमों की संख्या बढ़ती जा रही है लोग अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त होने के लिए अपने माता -पिता को वृद्ध आश्रम में रहने पर मजबूर कर देते हैं।सही मायने में अब वो समय आ गया है जब हमें आधुनिकता के साथ-साथ भारतीयता को भी बचाना होगा।
रामाशीष सिंह,जिला मधुबनी के खजौली प्रखंड से मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि बिहार में शिक्षा व्यवस्था चौपट है।विद्यालय है,छात्र भी है लेकिन पढ़ाई दयनीय है।ऐसी स्थिति में शिक्षा की दिशा और दशा के सन्दर्भ में गंभीरता से सोच लेने की जरुरत है।शिक्षा का चौपट होने का एक प्रमुख कारण है शिक्षा का सरकारीकरण भी होना है।जब तक प्राथमिक-माध्यमिक शिक्षा निजी क्षेत्र में थी तब तक शिक्षा की ऐसी व्यवस्था नहीं थी।विद्यालय में पठन-पाठन को लेकर प्रतिस्पर्धा थी ताकि छात्रों की संख्या बढे।वही इनका कहना है की शिक्षा में सुधार के दो विकल्प है शिक्षा राज्य सरकार की विषय सूचि में है,इसे केंद्र सहमति में लेकर शिक्षा व्यवस्था में सुधार करने का प्रयास की जाये या फिर विद्यालय की सरकारीकरण को समाप्त कर इसे निजी क्षेत्र में पुनः प्रतिस्पर्धा के लिए छोड़ दिया जाये।
