सीतामढ़ी से खास खबरें 12 सौ यात्रियों को लेकर लुधियाना से सीतामढ़ी पहुँची श्रमिक स्पेशल ट्रेन, ट्रेन में 1175 यात्री सीतामढ़ी के है शामिल , मेडिकल स्क्रीनिंग में तापमान अधिक पाए जाने के बाद कई श्रमिक को रखा गया अलग*_
सीतामढ़ी से खास खबर सीतामढ़ी-रक्तदान समूह सीतामढ़ी के द्वारा किए गए अपील के बाद सीतामढ़ी के सांसद सुनील कुमार पिंटू ने किया रक्तदान, रक्तदान समूह के अतुल कुमार व नीरज गोयनका एवं पूर्व सैनिक अनिल कुमार के अपील पर सांसद समेत जिला परिषद उपाध्यक्ष देवेंद्र शाह ,चुन चुन सिंह समेत अन्य कई ने किया रक्तदान*_
तमिलनाडु से श्रमिक स्पेशल ट्रेन आज सीतामढ़ी पहुंची 1075 यात्री को ,को लेकर ,सीतामढ़ी, डीएम अभिलाषा कुमारी शर्मा, एवं, एसपी, अनिल कुमार, सभी लोगों को अपने अपने झेत्र के केरोटिन सेंटर ,14 दिनों के लिए,भेज दिये हैं,,
बिहार परीक्षा समिति के निर्देश के आलोक में जिला मुख्यालय के पांच मूल्यांकन केंद्रों पर मैट्रिक उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य बुधवार को शुरू हो गया हालांकि लॉक टाउन के कारण परीक्षकों की संख्या कुछ कम ही रही
हरसिद्धि गायाघाट जर्जर मुख्य सड़क के निर्माण को लेकर विधायक ने किया एक दिवसीय अनशन
बड़कागांव क्वारन्टाई सेंटर पर एक की हालत बिगड़ गई जिसे उपचार के लिए मुजफ्फरपुर भेजा गया है सेंटर पर 110 प्रवासियों को क्वारेन्टिन किया गया है इसमें एक की तबीयत अचानक खराब हो गई सूचना मिलते ही अधिकारियों ने तुरंत उसे मुजफ्फरपुर भेज दिया वह 28 तारीख को सेंटर पर आया था उसका ब्लड सैंपल टेस्ट के लिए भेजा गया है
कोरोना संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आए 44 व्यक्तियों का ब्लड सैंपल मंगलवार को लिया गया सैंपल जांच के लिए पटना भेजा जाएगा बताया जाता है कि पूर्वी चंपारण के शिकारगंज एवं पकरीदयाल में कोरोना के 4 पॉजीटिव केस मिलने के बाद जिला प्रशासन के साथ स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट हो गया है पूछताछ में सभी ने बताया कि 30 अप्रैल को दिल्ली से आने के बाद अभी तक 44 लोगों से मिले थे मरीजों के बताए गए कुल 44 लोगों को चिन्हित किया गया तथा उनका सैंपल लिया गया
मोतिहारी 1200 सौ छात्रों पर लेकर कोटा से स्पेशल ट्रेन गुरुवार को पहुंचेगी बापूधाम रेलवे स्टेशन मोतिहारी
रक्सौल भारत नेपाल सीमा पर स्थित है सीमावर्ती गांव के बीच हुए पथराव में सहदेवा गांव के करीब 1 दर्जन से अधिक लोगों को चोट आई है
कोरोना से प्रभावित न हो मातृ पोषण, पोषण की जरूरतें पूरी करना सभी की जिम्मेदारी • यूनिसेफ, डब्ल्यूएफपी सहित अन्य संस्थाओं ने तैयार की मार्गदर्शिका • कोरोना के बीच माताओं के बेहतर पोषण को सुनिश्चित करने की दी सलाह • कोरोना काल में मातृ पोषण कार्यक्रमों के बेहतर संचालन को लेकर मार्गदर्शन पटना/ 5 मई: कोरोना संक्रमणकाल में लोगों का पूरा ध्यान इस संक्रमण से बचाव की तरफ है. वैश्विक स्तर पर इसकी रोकथाम के प्रयासों के साथ उपचार की तकनीक विकसित करने पर भी कार्य किया जा रहा है. महामारी के इस दौर में मातृ स्वास्थ्य के लिए भी कई चुनौतियाँ बढ़ी है.कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण एक तरफ मातृ पोषण सेवाओं को प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा चलाये जा रहे कार्यक्रम प्रभावित हुए हैं तो दूसरी तरफ़ मातृ आहार एवं पोषण पर महिलाओं में जागरूकता बढ़ाने की समस्या भी बढ़ी है. इसको ध्यान में रखते हुए यूनिसेफ, वर्ल्ड फ़ूड प्रोग्राम(डब्ल्यूएफपी), ग्लोबल न्यूट्रीशन क्लस्टर्स एवं ग्लोबल टेक्निकल एस्सिटेंस मैकेनिज्म फॉर न्यूट्रीशन ने संयुक्त रूप से मातृ आहार एवं पोषण सेवाओं को लेकर मार्गदर्शिका तैयार की हैजिसमें कोरोना संक्रमण के इस दौर में मातृ आहार एवं पोषण को सुरक्षित करने के लिए विस्तार से जानकारी दी गयी है. इसलिए जरुरी है मातृ आहार एवं पोषण पर अधिक ध्यान देना: जारी मार्गदर्शिका में बताया गया है बेहतर मातृ पोषण सुनिश्चित कराना पहले से ही एक चुनौती रही है लेकिन कोरोना महामारी ने इस समस्या को और गति दी हैजबकि महिलाओं के लिए बेहतर पोषण की जरूरत अधिक है. गर्भावस्था से स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए पोषक आहार एवं बेहतर पोषण की जरूरत बढ़ जाती है. महामारी के कारण पोषक आहारों की अनुपलब्धता भी देखी गयी है. इससे मातृ पोषण भी प्रभावित हुआ है. एक तरफ विश्वव्यापी लॉकडाउन के कारण आम लोग घर से नहीं निकल पा रहे हैं जिससे पोषक आहारों की उपलब्धता बाधित हुयी हैऔर दूसरी तरफ कोरोना रोकथाम में स्वास्थ्य विभाग की संलिप्तता के कारण मातृ पोषण सेवाएं भी अच्छे तरीके से सुचारू नहीं हो पा रही हैं. वहीं विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक कारण एवं लिंग आधारित भेदभाव भी माताओं के बेहतर पोषण में बाधक बना है. कोरोना संक्रमण काल में महिलाएं भी घर से नहीं निकल रही हैं एवं उन्हें पोषण पर जरुरी सलाह भी प्राप्त नहीं हो पा रही है. इन वजहों के कारण महिलाओं में चिंता, अवसाद, ट्रामा एवं मानसिक परेशानी भी बढ़ रही है. साथ ही घरेलू हिंसा के मामलों एवं सामजिक सहयोग में कमी भी महिलाओं के लिए परेशानी का कारण बन सकता है. इसलिए यह जरुरी हो जाता है कि कोरोना संक्रमण काल में इन बाधाओं को देखते हुए मातृ आहार एवं पोषण सेवाओं पर आम जागरूकता भी बढाई जाए एवं संबंधित सेवाओं को भी दुरुस्त किया जाए. जरुरी कार्रवाई से सुधार है संभव: • सरकार, स्वास्थ्य सेवा प्रदाता एवं निजी सेक्टर कोरोना के दौर में महिलाओं के लिए आहार की उपलब्धता को फंडामेंटल राईट के तहत सुनिश्चित करें • महिलाओं कीपोषण जरूरत को अधिक प्राथमिकता दें. विशेषकर कुपोषित, कम वजन, हाइपरटेंसिव, गर्भावस्था में मधुमेह से पीड़ित, एनीमिक, एचआइवी-एड्स पीड़ित, किशोरी एवं स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही महिलाओं के लिए बेहतर पोषण की अधिक जरूरत है • लिंग आधारित भेदभाव को दूर करते हुए महिलाओं के लिए बेहतर आहार एवं पोषण की उपलब्धता सुनिश्चित करना • सामुदायिक सहभागिता के जरिए महिलाओं को कोरोना पर जागरुक करना एवं स्थानीय स्तर पर सेवा प्रदाताओं की इसमें सहभागिता सुनिश्चित कराना पोषण जरूरत को पूरा करने के लिए दी गयी सलाह: • महिलाओं के जरुरी स्वास्थ्य सेवाओं को अंतराष्ट्रीय सलाह के मुताबिक जारी रखनाजैसे प्रसव पूर्व जांच एवं प्रसव उपरांत जरुरी स्वास्थ्य सेवाओं को जारी रखना • 2 से 3 महीने के लिए जरुरी पोषण सामग्रियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना(आयरन की गोली एवं कैल्शियम की गोली) • लॉन्ग टर्म निति निर्माण के तहत स्थानीय स्तर पर पोषक, सुरक्षित एवं सस्ते आहारों की उपलब्धता सुनिश्चित कराना • सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों के तहत महिलाओं की पोषण जरूरत को पूरा करने की दिशा में कार्य करना
