मौसम की बेरूखी खरीफ सीजन पर भारी पड़ रही है। भीषण गर्मी से धान का बिचड़ा तैयार करने के लिए धान की नर्सरी लगाने का काम ठप पड़ा है। विगत दिनों जिले में छिटपुट रूप से हल्की बारिश होने पर बीज दुकानों पर किसानों की भीड़ बढ़ गयी थी। लेकिन फिर मौसम की दगाबाजी से धान का बीज गिराने का कार्य प्रभावित हो गया। 25 मई से रोहिणी नक्षत्र में धान का बीज गिराना अच्छा माना जाता है। इसमें किसान इस लंबी अवधि वाले धान का बीज गिराने का काम शुरू कर देते हैं। लेकिन इस बार प्रचंड गर्मी पड़ने व बारिश नहीं होने से बीज गिराने का कार्य ठप पड़ा है। लिहाजा जिले में करीब 20 प्रतिशत ही धान का बिचड़ा तैयार करने के लिए किसान बीज गिराए हैं। जबकि बारिश हुई रहती तो 30 से 35 प्रतिशत तक धान बीज किसान गिरा चुके होते। किसानों का कहना है कि बारिश में विलंब होने से इस साल धान की खेती पिछड़ने के आसार दिख रहे हैं। किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं। कुछ किसान बीज खरीदने के लिए बारिश की राह देख रहे हैं। इससे निजी बीज दुकानों से धान बीज की खरीदारी की रफ्तार धीमी है। जिले में 1.83 लाख हेक्टेयर में धान की खेती का लक्ष्य है। डीएओ चंद्रदेव प्रसाद ने बताया कि बारिश नहीं होने से धान का बिचड़ा तैयार करने में किसानों को परेशानी हो रही
