पश्चिम चम्पारण से पूर्वी को जोड़ने वाली त्रिवेणी नहर है, जो वाल्मीकि नगर से नरकटियाबाजार सिसवनिया तक उद्गमित है,जो 472आर्डी की है, आज भी कैनाल टूटा हुआ है। 1982के बाद 312आर्डी तक ही पानी पंहुचा,जबकि मरम्मत के नाम पर करोड़ रुपये खर्च किये गये हैं। उक्त नहर से सरकार को 1982के पहले करोड़ों रुपये राजस्व की प्राप्ति होती थी, जबकि पिछले साल मुख्यअभियंता ने त्रिवेणी नहर का निरीक्षण किया थाऔर 472आर्डी तक पानी देने का आश्वासन किसानो को दिया था। सीमा से सटे घोड़ासहन नहर है जो तीन जिले को जोड़ती है,फिर भी कैनाल सूखा हुआ है,जिससे किसान परेशान हैं। कहते हैं किसान परशुराम पुर के बबनसिंह, गम्हरिया के बिजय सिंह,मनना के भागीरथ महतो,चम्पापुर के विनय प्र चौरसिया, मुसहरी के गौरी शंकर ठाकुर,कलवारीमझरिया के अब्दुल्ला अंसारी, नरकटिया बाजार के प्रदीप कुमार आदि ने बताया कि चार दशक पहले त्रिवेणी नहर से गरमा फसल के लिए पानी मिलता था,तो गरमा धान काट कर फिर धान फसल लगा कर अच्छा पैदवार होता था, आज पानी के अभाव है। में गरमा फसल को कौन कहे पानी के खरीफ फसल नही होता है,जिससे अधिकांश किसान खेती छोड़कर अन्य प्रदेश में नौकरी करने को मजबूर है। कहते है अभियंता कार्यपालक अभियंता माधव पंडित ने बताया कि 15जूू से कैनाल में पानी छोड़ा जयेगा।
