जेंडर हिंसा के खिलाफ चल रहे हमारे इस कार्यक्रम बदलाव का आगाज़ में आज सुनिए यशस्विनी जी को, जो जेंडर आधारित हिंसा पर कानूनी मामलों की जानकार हैं। यशस्विनी जी का कहना है कि अगर हिंसा है तो उसे करने वालों के खिलाफ कार्रवाई का कड़ा प्रावधान भी है. बस जरूरत है तो... कदम बढ़ाने की!

“यह देश संविधान से चलता है’, यह एक लाइन जो हम हर दूसरे दिन किसी न किसी के मुंह से सुनते ही रहते हैं। सविंधान पर इतनी आस्था के बाद भी देश में संविधानिक मूल्यों की भावनाओं का अभाव है। संविधान के प्रति पैदा हुए इस "अभाव" के भाव के लिए वही लोग जिम्मेदार हैं, जो हर एक बात पर कहते हैं कि यह देश संविधान से चलता है।

खलीलाबाद ब्लॉक की बेसिक बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता शनिवार को हुई। उच्च प्राथमिक वर्ग में बनकटवा के शिवम कुमार, बालिका वर्ग में नसीमा तथा प्राथमिक बालक वर्ग में पटखौली के अंश व बालिका वर्ग में सियरा सांथा की चंदा चैंपियन रही। प्रतियोगिताओं में स्थान अर्जित करने वाले बच्चों को खंड शिक्षाधिकारी अर्जुन प्रसाद वर्मा ने पदक व प्रशस्ति पत्र देकर पुरस्कृत किया।

पुलिस अधीक्षक द्वारा धार्मिक स्थलों पर लगे ध्वनि विस्तारक यंत्रों का निरीक्षण करने के उपरान्त बरदहिया बाजार मे पुलिस बल के साथ किया गया। पैदल गस्त शासन के निर्देश पर धार्मिक स्थलों पर लगे ध्वनि विस्तारक यंत्रों का निरीक्षण किया गया तथा सम्बन्धित को निर्धारित मानक के अनुसार ही लाउडस्पीकर का प्रयोग करने के साथ साथ किसी भी प्रकार के अफवाह एवं झूठी व भ्रामक खबरों को प्रचारित प्रसारित नहीं करने तथा किसी भी प्रकार की घटना के सम्बन्ध में तत्काल स्थानीय पुलिस को सूचित करने हेतु अवगत कराने का निर्देश दिया गया।

हंसने-हंसाने से इंसान खुश रहता है, जिससे मानसिक तनाव, चिंता और डिप्रेशन कम होता है। दोस्तों, उत्तम स्वास्थ्य के लिए हंसी-मज़ाक बहुत ज़रूरी है। इसीलिए मोबाइल वाणी आपके लिए लेकर आया है कुछ मजेदार चुटकुले, जिन्हें सुनकर आप अपनी हंसी रोक नहीं पाएंगे। हो जाइए तैयार, हंसने-हंसाने के लिए सुनिए हंसी-मज़ाक में डूबे हंसगुल्ले और रिकॉर्ड कीजिए अपने चुटकुले मोबाइल वाणी पर, फोन में नंबर 3 का बटन दबाकर।

"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ अशोक झा ऑर्गनिक खेती में केचुवा खाद बनाने की विधि की जानकारी दे रहे है। विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें...

लड़कियों और महिलाओं के ख़िलाफ़ हो रही हिंसा रोकने के लिए शुरू हुए इस प्रोग्राम में आपका स्वागत है। किसी भी तरह की हिंसा रोकने के लिए समाज में रहने वालों के सोच-विचार बदलना बहुत ज़रूरी है।आज इस बारे में हम बात करेंगे पुरुषों के योगदान को लेकर और जानेंगे कि पुरुष किस तरह महिला कल्याण और सशक्तिकरण को बढ़ावा दे सकते है।पुरुषों की भागीदारी से जेंडर के नाम पर होने वाली हिंसा को कैसे ख़त्म किया जा सकता है। अपने विचार ज़रूर रिकॉर्ड करें, फोन में नंबर 3 दबाकर।

दोस्तों, अगर गौर किया जाए तो हमारे आसपास होने वाली छोटी—बड़ी लड़ाईयों, झगड़ों, बहस और नाखुशी के पीछे की वजह अधिकारों का हनन है। महिला है तो उससे आत्मनिर्भर बनने का अधिकार छीन लिया जाता है, बच्चा है तो पढने का, किसी से जाति के नाम पर तो किसी से गरीबी के नाम पर अधिकारों का हनन जारी है और यही है फसाद की वजह। आज जब हम 10 दिसंबर को मानव अधिकार दिवस मना रहे हैं तो फिर एक बार इस विषय पर बात करना जरूरी हो जाता है

सरकार एक तरफ जहां स्वच्छ भारत मिशन संकल्प के लिए लोगों को प्रेरित करती है कि खुले में शौच ना जाए शौचालय का प्रयोग करें, वहीं दूसरी तरफ जहां से गांव के विकास की नीव रखी जाती है। वहीं पर बना काफी लागत से सामुदायिक शौचालय पर हमेशा लटक रहा है

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