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उत्तरप्रदेश राज्य के जिला बलरामपुर से श्री देवी सोनी , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती है कि अर्थव्यवस्था के कई आधारों पर हमारा देश समस्याओं का सामना कर रहा है। वे अब तक दुनिया भर में दो हजार चार से दो हजार उन्नीस तक विकसित हो रही थीं और इसी वजह से हमारे देश की अर्थव्यवस्था भी बहुत तेजी से आगे बढ़ रही थी और इसके बाद जिस तरह से कदम उठाए गए हैं , अब उम्मीदवार भी नहीं उठा पा रहे हैं , जैसे दो हजार चौदह और पंद्रह में जब कच्चे तेल की कीमत गिरी और जब बैंक में एनपीए का स्तर बहुत अधिक था , तो सरकार को भी बेडलॉन बैंक तैयार करना चाहिए था । उनके सामने कई समस्याएं थीं , जिसके कारण कोई भी अपनी कंपनी को बंद करने की बात कर सकता था । इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा और संस्थानों को भी बढ़ावा दिया जाना चाहिए । अब अगर आप अर्थव्यवस्थाओं की समस्याओं के बारे में बात करते हैं और यह जीडीपी गिरने पर हमें क्या नुकसान हुआ है , तो आपको यह भी बताएँ कि जब हमारी अर्थव्यवस्था में एक तरह की अस्थिरता होती है और यह गरीबी और बेरोजगारी से भी अधिक खतरनाक हो जाती है । यानी जब हम अनिश्चितता में होते हैं , लोग निवेश नहीं कर पाते हैं , उन्हें डर होता है कि उनका पैसा कम हो जाएगा , तो सरकार को उद्यमियों के बीच विश्वास पैदा करना चाहिए था , लेकिन ऐसा नहीं हुआ ।
उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से श्रीदेवी सोनी ,मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा बढ़ रही है ।कुछ महिला आवाज़ उठाती है तो कुछ चुप रह जाती है। घरेलु हिंसा के प्रति प्रशासन भी सजग नहीं रहते है। कुछ महिलाएँ घर टूटने के डर से आवाज़ नहीं उठती और हिंसा सहती रहती है
सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में।
उत्तरप्रदेश राज्य के जिला प्रिंशु पांडेय , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती है कि किसान भी अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं , इसके बारे में बताया गया है , लोगों ने यह कार्यक्रम सुना है , उन्हें यह बहुत पसंद आया है ,रिपोर्ट के अनुसार , दो हजार तेइस में किसान को एम . एस . पी . देने से सरकार पर इकतीस करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ है । चौदह करोड़ लाख करोड़ के बैंक ऋण माफ किए गए हैं और एक करोड़ आठ लाख कॉर्पोरेट कर ऐसे देश में माफ किया गया है जहां कुल बजट का केवल शून्य बिंदु चार प्रतिशत है । लागत भी उनकी नज़र पकड़ रही है
उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से प्रिंशु पांडेय ,मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि इन्हे राजीव की डायरी कार्यक्रम अच्छा लगा। इसमें घरेलु हिंसा के बारे में बताया गया कि यह घरेलू हिंसा सभ्य समाज का एक कड़वा सच है। आँकड़े कुछ भी रहे पर वास्तिकता में महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा की संख्या कई गुना अधिक है। महिलाओं द्वारा आवाज़ उठाई जाती है तब भी प्रशासन सही से मदद नहीं करते है
