भारत में खेती से जुड़ें कामों में महिलाओं की भागीदारी 70% के लगभग है जबकि वास्तिविकता में यह 15 प्रतिशत के करीब आती है सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगभग 30% महिलाओं को ही “किसान” के तौर पर जाना जाता है. यह भारत में कामकाजी महिलाओं का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा खेती और उससे जुड़े कार्यों में लगा हुआ है.
बिहार राज्य के नवादा जिला के नारदीगंज प्रखंड से तारा ने मोबाइल वाणी के माध्यम से सुशीला कुमारी से साक्षात्कार लिया।सुशीला कुमारी ने बताया कि कुछ दिन पहले इन्होने एक समस्या नवादा मोबाइल वाणी पर रिकॉर्ड करवाया था। जिसमे बताया गया था कि सरकार द्वारा दिए जा रहे बीज इनको नही मिल रहा था।इस समस्या के तह तक जाने पर पता चला कि इनका केवाईसी नही हुआ था।पंजीकरण और आधार नंबर भी नही चढ़ा था।नवादा मोबाइल वाणी के सहयोग से इन्होने सभी दस्तावेजों के साथ दोबारा बीज के लिए अप्लाई किया।परिणामस्वरूप सुशीला कुमारी को ब्लॉक से चना और गेहूं का बीज मिल गया है और ये बहुत खुश हैं।
"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ कपिल देव शर्मा गेँहू की फसल को चूहों के आक्रमण से होने वाले नुकसान एवं उपचार सम्बंधित जानकारी दे रहे हैं । विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें...
बिहार राज्य के नवादा जिला से सिवनी कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह पूछना चाहती हैं कि बेहतर फसल के लिए किसानो को क्या करना चाहिए ?
गांव आजीविका और हम कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ श्री जीब दास साहू जैविक खेती के लिए नीमास्त्र के प्रयोग और लाभ की जानकारी दे रहे हैं ।
बिहार राज्य के नवादा जिला के नारदीगंज प्रखंड से सुशीला देवी ने मोबाइल वाणी के माध्यम बताया कि इन्होने चना और गेहूं के के लिए अप्लाई किया है। मगर अभी तक नही आया है। समस्या का समाधान कीजिये
बिहार राज्य के नवादा जिला से सिवानी कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह पूछना चाहती हैं कि धान का फसल में कौन सा खाद पड़ता है
बिहार राज्य के नवादा जिला के नारदीगंज प्रखंड से रोजा देवी ने मोबाइल वाणी के माध्यम बताया कि इन्होने बीज के लिए आवेदन किया है। मगर अभी तक नही मिला है। बहुत परेशान हैं। कृपया इसका समाधान किया जाए
गांव आजीविका और हम कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ श्री जीब दास साहू जैविक खेती के लिए नीमास्त्र निर्माण और उपयोग की जानकारी दे रहे हैं ।
अधिकांश व्यक्तिगत पट्टे पुरुषों के नाम पर होते हैं. सामुदायिक अधिकारों में भी महिलाओं को भी कम प्रतिनिधित्व दिया जाता है. इसके चलते महिलाएं केवल खेत मजदूर बनकर रह जाती हैं. महिलाओं को इसका नुकसान यह होता है कि बैंक, बीमा तथा दूसरी सरकारी सहायता का लाभ नहीं उठा पाती है, जो उनके लिए चलाई जा रही हैं.
