क्या आपके गाँव या मोहल्ले में किसी महिला ने अपने नाम पर जमीन या घर के कागज़ बनवाने की कोशिश की है? क्या उसका जीवन बदला? क्या परिवार का व्यवहार बदला? क्या बेटियों और बहुओं का नाम जमीन और घर के कागज़ में होना चाहिए? कैसे परिवार मजबूत होगा? आपकी राय भले ही पक्ष में हो विपक्ष में अपनी राय जरूर रिकार्ड करें। राय रिकॉर्ड करने के लिए अपने फोन से 3 नंबर का बटन दबाएँ या मोबाइल वाणी ऐप में लाल बटन दबाकर अपनी बात रिकॉर्ड करें।
बिहार राज्य के नवादा जिला से पूजा कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि महिलाओं को शिक्षित होना चाहिए और सामाजिक कृतियों के खिलाफ आवाज़ उठाना चाहिए। महिलाओं को समानता का अधिकार पाने के लिए शिक्षित और जागरूक होना चाहिए।उनको स्वयं सहायता समूह बनाकर अपनी बातों को रखना चाहिए। उनको समान वेतन और समानता की मांग करनी चाहिए। समानता के लिए कानून में सुधार होना चाहिए।
बिहार राज्य के नवादा जिला से पूजा कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि महिलाओं को जमीन में अधिकार देने से लोग कतराते हैं। कहा जाता है कि लड़कियां शादी के बाद पराए घर की हो जाती है। हिन्दू उत्तराधिकारी संशोधन कानून के तहत बेटी को जन्मजात हक होने के बावजूद अक्सर परिवारिक समबंध खराब होने या भाई बहन में तनाव के डर से हिस्सा नहीं दिया जाता है। यह मान्यता है कि बेटा से वंश आगे बढ़ता है और वह बुढ़ापा का सहारा बनता है। कुछ लोगों का मानना है कि जब शादी में अधिक खर्चा कर देते हैं तो जमीन में हिस्सा देने की जरूरत नहीं है। बेटा और बेटी को बराबर का अधिकार दिया गया है।लोगों को यह डर रहता है कि बेटी को जमीन में अधिकार देने से रिश्ते खराब न हो सकते हैं । महिलाएं इसी डर से अपना अधिकार नहीं मांगती है। बेटी भी बराबर का हक़दार है।
बिहार राज्य के नवादा जिला से पूजा कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि कई महिलाएं ऐसी है जो सुरक्षा संबंध चिंता के कारण अपने कानूनी और संपत्ति के अधिकार को मांगने में झिझकती हैं।उनको सामाजिक दबाब और परिवार में समबंध खराब होने का डर रहता है।कुछ महिलाओं में ज्ञान की कमी भी रहती है।उनको कानूनी अधिकार, जैसे -पैतृक संपत्ति में हक़ के बारे में जानकारी भी नहीं होती है।महिलाओं को उनके हक़ के लिए अभी भी संघर्ष करना पड़ता है।
बिहार राज्य के नवादा जिला से पूजा कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि कई महिलाओं को उनके पैतृक संपत्ति के बारे में पता ही नहीं रहता है। महिलाओं को संपत्ति में अधिकार देने से सम्बंधित हिन्दू उत्तराधिकारी अधिनियम 1956 लाया गया था। इस अधिनियम के तहत बेटी को जन्म से पुत्र के समान अधिकार होता है। पति के मृत्यु के बाद उनके संपत्ति में पत्नी का अधिकार हो जाता है
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दोस्तों, महिलाओं के भूमि अधिकार सुरक्षित करने में स्थानीय शासन की भूमिका केंद्रीय है। यदि ग्राम पंचायतें भूमि अधिकार को प्राथमिकता दें, महिलाओं को लाभार्थी सूचियों में शामिल करें, अधिकारियों को प्रशिक्षण दें और समुदाय संगठनों के साथ मिलकर काम करें, तो ग्रामीण भारत में महिलाओं का सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण संभव है। स्पष्ट है कि जमीन पर अधिकार सिर्फ कागज़ी नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और स्वतंत्रता का सवाल है — और इसका समाधान गांव से ही शुरू होगा। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- आपके परिवार में जमीन किसके नाम है? क्या महिलाओं का नाम भी उसमें शामिल है *--- क्या आपकी पंचायत ने कभी महिलाओं को जमीन के अधिकार के बारे में कोई जानकारी या बैठक रखी है? अगर हाँ, तो उसका असर क्या रहा?” *--- अगर महिलाओं के नाम जमीन हो जाए, तो आपके हिसाब से उनकी ज़िंदगी में क्या-क्या बदल सकता है?”
बिहार राज्य के नवादा जिला के नारदीगंज प्रखंड से मुन्नी कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि विद्यालय में बच्चों को बचपन से अधिकार प्राप्त हैं।जिन बच्चों को छह वर्ष से अधिक उम्र होने पर स्कूल में दर्ज किया जाए और वे चौदह वर्ष की उम्र तक अपनी प्रारंभिक शिक्षा कक्षा आठवी पूरी ना कर पाए तो चौदह साल से ज्यादा उम्र होने पर भी निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार मिलेगा।
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बिहार राज्य के नवादा जिला के नारदीगंज प्रखंड से अनीता कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि महिलाओं के लिए भूमि का अधिकार ,आर्थिक सुरक्षा ,आश्रय ,बेहतर स्वास्थ ,शिक्षा और घर व समाज के अधिक शक्ति के लिए जरूरी है क्योंकि यह उन्हें वित्तीय स्वतंत्रता सम्मान और निर्णय लेने की क्षमता देता है। जो महिला सशक्तिकरण और समग्र सामाजिक, आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। हर महिला को जमीन में अधिकार लेना चाहिए
