हंसने-हंसाने से इंसान खुश रहता है, जिससे मानसिक तनाव, चिंता और डिप्रेशन कम होता है। दोस्तों, उत्तम स्वास्थ्य के लिए हंसी-मज़ाक बहुत ज़रूरी है। इसीलिए मोबाइल वाणी आपके लिए लेकर आया है कुछ मजेदार चुटकुले, जिन्हें सुनकर आप अपनी हंसी रोक नहीं पाएंगे। हो जाइए तैयार, हंसने-हंसाने के लिए...

सोनपुर प्रखंड कार्यालय के बीडीओ कक्षा में विकास मित्र के साथ सोनपुर बीडीओ डॉक्टर सुदर्शन कुमार ने मंगलवार के मुख्यमंत्री प्रखंड परिवहन योजना के अंतर्गत 23 पंचायत के वैसे लाभुक जो इस योजना के लाभ लेना चाहते हैं वे आवेदन पत्र जमा कर सकते है । इसके लेकर पंचायत वासियों के लाभुकों से आवेदन लेने के लेकर विकास मित्र के साथ बैठक कर उपस्थित विकास मित्र को कई दिशा निर्देश दिए । इस सबंध में बीडीओ डॉ सुदर्शन कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री प्रखंड परिवहन योजना के तहत बस खरीदने के लिए प्रखंड स्तर पर कुल सात वाहन खरीदने के लिए सब्सिडी के तहत सरकार प्रोत्साहन देगी । वैसे लाभुक जो कम से कम मैट्रिक पास हो ।उन्हें जाति ,आवासीय, ड्राइविंग लाइसेंस ,आधार कार्ड होना अनिवार्य है । मुख्यमंत्री प्रखंड परिवहन योजना के वैसे लाभुक जिन्हें प्रखंड क्षेत्र के कुल 23 पंचायत से सात लोगों को दी जाएगी । जिसमें अनुसूचित जाति 2, अत्यंत पिछड़ा वर्ग 2, पिछड़ा वर्ग 1, अल्पसंख्यक समुदाय के 1, सामान्य जाति के 1 कुल 7 लाभुक होंगे। जो बस खरीद कर प्रखंड मुख्यालय से जिला मुख्यालय तक लोगों को ले जाने व ले आने के लिए उन्हें कार्य करने होंगे । बस खरीदने पर उन्हें ₹5 लाख की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला के सांस्कृतिक मंच पर सोमवार को पर्यटन विभाग बिहार द्वारा आयोजित ग़ज़ल-संध्या कार्यक्रम के तहत रेडियो एवं दूरदर्शन के लब्ध-प्रतिष्ठित कलाकार सोनपुर प्रखंड के गंगाजल निवासी रोशन सिंह ने गजल गायन की प्रस्तुति दी । श्री रोशन सिंह ने अपने गायन का प्रारंभ सूफियाना अंदाज में अमीर खुसरो के नज़्म से किया । इसके बाद एक से बढ़कर एक गजल की प्रस्तुति उनके द्वारा की गई । गजल गायकी के रिदम के साथ पंडाल में मौजूद श्रोता दीर्घा भी ताली से गूंज भर दी । सांसों की माला में सिमरु में पी का नाम ...... इस सूफी गीत के साथ जब उन्होंने अपने साजिन्दों के साथ स्वर की अटखेलियों को प्रस्तुत किया तो मुख्य पंडाल में मौजूद सभी प्रशासनिक पदाधिकारी, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार समेत श्रोता एवं दर्शक झूमने पर मजबूर हो गए । शेर :- उधर जुल्फों में कंघी हो रही है ख़म निकलता है, इधर रुक-रुक के खिंच-खिंच के हमारा दम निकलता हे इलाही खैर हो उलझन पे उलझने बढती जाती हे, न उनका ख़म निकलता है न हमारा दम निकलता है इसके साथ कई प्रचलित गज़ल जैसे -याद की लहर छोड़ जाऊंगा कल तेरा शहर छोड़ जाऊंगा, ..... हुजूर आपका भी एतराम करता चलूँ इधर से गुजरा तो सोचा सलाम करता चलूँ, ..... दिल की लगी जब रंग दिखाएं ताजमहल में आ जाना ..... जब-जब मेरी याद सताए ताजमहल में आ जाना..... बेवफा यूं तेरा मुस्कुराना भूल जाने के काबिल नहीं है, ..... इन सभी प्रचलित गजलों की प्रस्तुति श्री रोशन सिंह द्वारा उनके अपने अंदाज मे की गई जो काफी सराहनीय रही और श्रोताओं एवं दर्शकों के ऊपर अमिट छाप छोड़ गई । ज़्यादा जानने के लिए इस ऑडियो को क्लिक करें।

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कुश्ती प्रतियोगिता में पहलवानों ने एक ने दूसरे को किया परास्त बिहार केसरी से नवाजे जाने वाले पहलवान को 14000/- नगद व हनुमान गदा के साथ प्रशिस्त पत्र देकर किया जायेगा सम्मानित सोनपुर। विश्व प्रसिद्ध हरिहरक्षेत्र सोनपुर मेला एएनएम ट्रेनिग स्कूल स्थित मल्ल युद्ध प्रतियोगिता के बाद दो दिवसीय कुश्ती प्रतियोगिता का भी आयोजन सोमवार को शुभारंभ हुआ । इस प्रतियोगिता का विधिवत उद्घाटन सारण कुश्ती संघ के अध्यक्ष पिक्कू राय एवं सचिव विकास कुमार ने महावीर जी के पूजा अर्चना करने के उपरांत नारियल फोड़कर इस कुश्ती प्रतियोगिता में दो पहलवानों को एक -दूसरे को हाथ मिलाकर दंगल के मैदान में छोड़ते हुए कुश्ती का शुभारंभ किया। विकास कुमार ने बताया कि इस कुश्ती प्रतियोगिता में राज्य के 110 नामी गिरामी पहलवान शामिल हुए । जिसमे कुछ पहलवान मल्ल युद्ध के भी जीते व हारे पहलवान इस कुश्ती प्रतियोगिता में अपना दांव पेंच और भाग्य के आजमाने के लिए कुश्ती दंगल में कूद पड़े । सारण जिला कुश्ती संघ के सचिव व खेल संयोजक विकास कुमार सिंह ने यह भी बताया कि इस खेल में पहलवानों की 50 से 65 जबकि 65 से 85 और 85 प्लस वेट के पहलवान प्रतियोगिता में भाग लिया। इस कुश्ती प्रतियोगिता में रेफरी की भूमिका में उदय तिवारी, संजीव झा, रामपुजन सहनी रहे । जबकि सहयोगकर्ता रामकृष्ण कुमार, नरेंद्र सिंह, गौरी शंकर, इवेंट मैनेजर राजेश शुभांगी रहे । उन्होंने यह भी बताया कि इस कुश्ती प्रतियोगिता में बिहार केसरी से नवाजे जाने वाले पहलवान को 14000/- नगद व हनुमान गदा के साथ प्रशिस्त पत्र देकर उन्हें सम्मानित किया जाएगा। दूसरे स्थान पर रहने वाले पहलवान को ₹9000 और प्रशिस्त पत्र दिया जाएगा । पहलवान सुमन कुमार कैमूर ने शैलेश बेतिया को पराजित । जबकि रोहित कुमार मिश्रा लहलादपुर छपरा ने सुदामा नयागांव को पराजित किया वही कुणाल कुमार आरा ने अभिषेक कुमार समस्तीपुर को पराजित किया । रितेश बेतिया ने भोला बेतिया को परास्त किया, राहुल भोजपुरी ने हिमांशु कैमूर को परास्त किया जबकि सचिन पटना ने कुणाल आरा को परास्त किया। प्रिंस कटिहार ने भीम छपरा को परास्त किया। रितेश बेतिया ने सत्यम समस्तीपुर को परास्त किया । शुभम कैमूर ने अब्दुल वाजिद दरभंगा को परास्त किया। कर्ण कटिहार ने राजू नवादा को पटकनी दी जबकि राहुल राज भोजपुरी ने अमन कुमार कैमूर को पटकनी दी । इस तरह से एक पहलवान ने दूसरे पहलवानों को दांव पेंच के खेल खेलते हुए दंगल मैदान में एक ने दूसरे को पटकनी देकर अपना दबदबा बनाते हुए सेमीफाइनल में पहुंच गया ,जो मंगलवार के दिन सेमीफाइनल मुकाबले जीते हुए पहलवान की बीच कांटे की टक्कर होगी । हर पहलवान अपने-अपने दांव पेंच लगाएंगे। इस कुश्ती प्रतियोगिता के देखने के लिए दर्शक दीर्घा भारी संख्या में उपस्थित होकर पहलवानों को हौसला बढ़ाने के लिए तालियां से गूंज भरती रही ।

सुनिए एक प्यारी सी कहानी। इन कहानियों की मदद से आप अपने बच्चों की बोलने, सीखने और जानने की समझ बढ़ा सकते है। ये कहानी आपको कैसी लगी? क्या आपके बच्चे ने ये कहानी सुनी? इस कहानी से उसने कुछ सीखा? क्या आपके पास भी कोई नन्ही कहानी है? हमें बताइए, फ़ोन में नंबर 3 का बटन दबाकर।

इसके बरक्स एक और सवल उठता है कि क्या सरकारें चाहती हैं कि वह लोगों का खाने-पीने और पहनने सहित सामान्य जीवन के तौर तरीकों को भी तय करें? या फिर इस व्यवसाय को एक धार्मिक समुदाय को निशाना बनाने के लिए इस तरह के आदेश जारी किये जा रहे हैं। सरकार ने इस आदेश को जारी करते हुए इस बात पर भी ध्यान नहीं दिया कि उसके एक आदेश से कितने लोगों की रोजी रोटी पर असर पड़ेगा

हंसने-हंसाने से इंसान खुश रहता है, जिससे मानसिक तनाव, चिंता और डिप्रेशन कम होता है। दोस्तों, उत्तम स्वास्थ्य के लिए हंसी-मज़ाक बहुत ज़रूरी है। इसीलिए मोबाइल वाणी आपके लिए लेकर आया है कुछ मजेदार चुटकुले, जिन्हें सुनकर आप अपनी हंसी रोक नहीं पाएंगे। हो जाइए तैयार, हंसने-हंसाने के लिए...

यह कहानी एक लड़की की साहस और संघर्ष की है, जिसने अत्याचार को मात दिया और नये जीवन की धारा चलाई। मायके का साथ बना उसका सहारा, बेटे को बड़ा किया सच्चाई की पुकार से। उमा ने सिखाया, हिंसा से ना डरो, आगे बढ़ो, सपनों को हकीकत में बदलो। आपको लगता है कि उमा ने अपने जीवन में सही निर्णय लिया था, जब वह अपने परिवार के खिलाफ खड़ी हुई थी? उमा की कहानी आपको कैसे प्रेरित करती है और आपके विचारों में समाज में इस तरह की स्थितियों पर सहायता और बदलाव कैसे लाया जा सकता है?