मेरा नाम मानु हैं मैं बजरंग नगरसे जयपुर वाणी पर साझा कर रही हु की मुझे IVRS Calling में अब कोई समस्या नही आती हैं |
मैं गलता गेट से रोहित शर्मा जयपुर वाणी पर साझा कर रहा हु की हमारेयहा पर कचरे की गाड़ी नही आती थी अब आने लगी हैं उसके लिया जयपुर वाणी का धन्यवाद |
मैं शबनम , पेंटर कोलोनी से जयपुर वाणी पर साझा कर रही हु की हमारे यह अब पानी की समस्या का हल हो गया हैं उसके लिए जयपुर वाणी का धन्यवाद |
मेरा नाम खुशबु हैं मैं जवाहर नगर से जयपुर वानिया पर साझा कर रही हु की हमारे यहा पानी अच्छा आता हैं उसके लिए धन्यवाद |
यश एक ट्रांस पुरुष है और उन्होंने जयपुर वाणी के द्वारा सभी को माहवारी के इस पहलु को समझाया है जो शायद समुदाय ने पहले न समझा हो , आये सुनते हैं उन्हें ये अनुभव
नमस्ते साथियो मेरा नाम पूजा है और आज हम बात करेंगे की सेनेटरी पेड का निपटान कैसे करे। अक्सर आपने देखा होगा सेनेटरी नैपकिन जैसे मेडिकल कचरे को अक्सर हम घर से निकलने वाले कचरे के साथ मिक्स करके, कचरे की गाड़ी में डाल देतें है | तोह क्या ये निपटान का तरीका सही है ? आइये जानते हैं, सेनेटरी पैड का निपटान कैसे करें? सैनिटरी पैड निपटान पर सही जानकारी होना स्वच्छता के साथ-साथ पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है | ज्यादातर घरों में सूखे और गीले कूड़े के लिए अलग-अलग कंटेनर या कचरा पात्र होते हैं। इस्तमाल किये गए सैनिटरी नैपकिन के लिए कोई भी पक्ष जिम्मेदार नहीं है। ये कचरा परियवर्ण के साथ साथ जानवरो के लिए भी हानिकारक माना जाता है। सैनिटरी पैड को सुरक्षित रूप से निपटाने में पहला कदम उनके लिए एक अलग कचरा पात्र रखना है यह न केवल बदबू, बैक्टीरिया और मक्खियों को दूर रखेगा, बल्कि उन्हें ढक कर भी रखेगा और साथ ही ये जानवरो की पहुंच से भी दूर रहेगा | सही निपटान के लिए जब आप हर तीन घंटे में नैपकिन चेंज कर रहे हैं तोह सेनेटरी पेड को सावधानी से रोल करें और इसको अख़बार में लपटे। नैपकिन के लिए अलग डस्टबिन या थैले में नैपकिन और नए पेड के कवर को डाले। यदि आप कपडे का इस्माल करते हैं और उसे दुबारा उपयोग में नहीं लेने वाले हैं तोह इसे भी इसी प्रकार कागज में लपेट के अलग डस्टबिन में डाले | हमने देखा की कुछ बस्ती जैसे गेटोर की छतरियों में किशोरिया सूती कपडे से बने पेड का इस्तमाल करती हैं, जिसे साबुन से धो कर, तेज़ धुप में सूखा कर दुबारा इस्तमाल में लिया जा सकता हैं। आप ध्यान रखे की कपडे से बने पेड या कपडे का तेज़ धुप में सुखना जरुरी है, ताकि इसका सुरक्षित रूप से दुबारा इस्तमाल किया जा सके। कई बार किशोरी और महिलाये, पेड़ को अँधेरे या रात में धो कर सुबह इस्तमाल में ले लेती है । तेज़ धुप लगने से कड़पे में छुपे बैक्टरिया मर जाते हैं तोह कृपया कपडे को तेज़ धुप में सूखा कर ही दुबारा इस्तमाल में ले । आप चाहे तो कागज के थैले या पेपर बैग में भी वेस्ट सेनेटरी पैड को इकट्ठा कर सकती हैं | यह सेनेटरी पेड वाले एकत्रित कूड़े को बाकी सूखे/गीले कूड़े के साथ मिश्रित होने से बचाएगा। याद रखे की इकट्ठा सैनिटरी नैपकिन के थैले को कचरे की गाड़ी में ही डाले | इसे टॉयलेट में फ्लश न करे क्योंकि वे सीवर और पाइपलाइन को जाम कर सकता हैं। आपने पाया होगा की अंतिम दिन में हम ये सोचते हैं की पेड साफ़ ही है और उसे बिना परवाह किये बिना कागज में लपेटे हुए सीधे डस्टबिन में डाल देते हैं लेकिन ये समझना जरुरी है की पेड का ये सही निपटान का तरीका सही नहीं है, इस लिए पेड को हमे उसी प्रकार से निपटान करना है जैसे हम माहवारी के अन्य दिनों में करते है। सुलभ शौचालिये में नैपकिन बदलते पर इसका डिस्पोसे आप इंसीनिरेटर मशीन के द्वारा भी कर सकते हैं। यहाँ आपको इसे अख़बार में लपेटने की जरूरत नहीं है। इंसीनेटर मशीन में इस्तेमाल किये गए पेड़ को रोल करके डाले इकठ्टे हुए नैपकिन दिन के अंत में एक साथ लाल बटन दबाने से मशीन में ही नष्ट हो जाते हैं । अगर आप स्कूल टीचर या विद्यार्थी हैं तोह यहाँ आप एक सेनेटरी नैपकिन गड्ढे का निर्माण कर सकते हैं जहा सामूहिक रूप से इकठ्टे हुए नैपकिन का निपटान स्कूल में सहायका के साथ मिल कर सकते हैं। जब आप घर पर होते हैं तो सैनिटरी पैड का निपटान करना आसान होता है, और आप इसे अपनी सुविधा अनुसार निपटान कर सकते हैं। साथियो…. आप जान गए हैं की नैपकिन का सही निपटान घरलू स्तर पर कैसे करना है। आप नैपकिन के निपटान के लिए कोनसा तरीका इस्तमाल करते हैं हमे जरूर बताये, हो सकता है की सेनेटरी पेड के निपटान से जुड़े और सवाल आपको परेशान कर रहे होंगे जिसे आप नंबर ३ दबा हम से साँझा कर सकते हैं| हम आपको फिर मिलेंगे और जानकारियों के साथ तब तक के लिए धन्यवाद !
रतन कवंर वियास कॉलोनी से संझार कर रही है अपने मेनोपोज़ के कुछ अनुभव , आये सुनते है और समझते हैं
वार्ड नंबर ११ की नसरीन जी, जो की एक आंगनवाड़ी कार्येकर्ता है और मेनोपॉज यानि मासिक धर्म का बन्द होने होने वाली परेशानी पर चर्चा कर रही है
नमस्ते मेरा नाम चेतना है, मै घाट के बालाजी बस्ती से हूँ और में 11 क्लास की स्टूडेंट हूँ , जयपुर वाणी के माधियम से में आपको माहवारी यानि पैरोड्स के बारे में सामान्य जानकारी देना चाहूंगी | पीरियड्स लड़कियों में दस से पंद्रह साल की उम्र के बिच में कभी भी शुरू हो जाते हैं | पीरियड्स एक सामान्य प्रक्रिया है जो सभी लड़िकयो और महिला में लगभग चालीस साल की उम्र तक होती है | ये प्रक्रिया हर माह 3 से 7 दिन तक होती है जिसके दौरान हमे अपने खान पान , स्वास्थय और और साफ़ सफाई का धियान रखना होता है | माहवारी के दौरान साफ़ कपडे या पैड का इस्तमाल करना चाहिए जिसे हर ३ घंटे के बाद चेंज करना चाहिए | इस्तमाल किये गए पैड को अच्छे से अखबार में लपट के ही कचरेदान में डाले| या फिर अगर अपने कपडे का इस्माल किया है तोह उसे साबुन से धो कर, तेज धुप में सुखाये जाने के बाद ही उस कड़पे को दुबारा इस्माल में ले | आपने देखा होगा की खुले में फेके पेड़ से , गन्दगी फैलती है , मच्छर मखिया पनपती है और बीमारी फैलती है तोह इसके सही निपटान का धियान रखे | आजकल उड़न योजना के तहत भी महिला और किशोरियों को आंगनवाड़ी / स्कूल के द्वारा पेड़ दिए जाते हैं | इसका भी लाभ आप ले सकते हैं | ये ही नहीं,...माहवारी के दौरान खास कर हमे अपने खान पान में हरी सब्जिया फल, ढूढ दही को भी शामिल करना चाहिए | थोड़ा व्यायाम और खुद को आराम भी देना जरुरी है | हमारी मां चाही और आंटी अक्सर खुद का ख्याल रखना भूल जाती है जो की बाद में कमजोरी का कारण बन जाती है | और हाँ ,अगर हर माह में माहवारी ना आने, या काम और ज्यादा अन्य तोह डॉक्टर से इस पर सलाह लेनी चाहिए, डॉकटर से सलाह के बाद ही कोई दवाई ले | इसके साथ हमने देखा होगा की हमारे समाज में कई सारी भ्रान्तिया है जो माहवारी से जुडी है जैसे अचार न खाना, खेलने कूदने पर रोक लगाना, ऐसी भ्रान्तिया को अनदेखा करे, इसकी चर्चा स्कूल में और आशा दीदी के साथ जरूर करे | मुझे याद आया, हमने पिछले कार्यक्रम से ये भी जाना था की माहवारी, त्रासं पुरषो को भी होते हैं | लेकिन उनका लड़को जैसा दिखने के कारन उन्हें इस दौरान काफी परेशानी अति है | वे आसानी से पेड़ नहीं खरीद पाते और कई बार दूर व्यवहार के शिकार हो जाते हैं | इस विषय में आगे की जानकारी आपको नए करेक्रम में दंगे बस यही कुछ बाते थी साथियो.... जो अब आपको भी अब पता हो गई है, क्या आपके पास माहवारी सी जुडी बाते है अगर हाँ तोह हम से समझा करे, आप माहवारी के दौरान खाने के क्या क्या लेते है और इस से आपको क्या फायदा होते है, हमे जरूर बताना | अगर ऐसी कुछ बाटे है दो हमने छोड़ दी और आप बताना चाहते है तोह नंबर ३ दबा कर हम से साँझा करे | जल्द ही मिलेंगे नए कार्येक्रम के साथ | धन्यवाद
स्कूल में जेंडर पर चर्चा और इस विषय में बच्चो के साथ बातचीत पर नूर ने जयपुर वाणी के माधियम से लोगो से कहा है की आशा है की शायद इस चर्चा से बच्चो के बिच बदलाव संभव है और उनमे जागरूकता भी |
