झारखण्ड राज्य के राँची ज़िला से रूपा मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि मौसम के परिवर्तन से खेती में बहुत समस्या होती है। अगर वर्षा नहीं होती है तो खेत को पर्याप्त पानी जो मिलना चाहिए वो मिल नहीं पता है वही अगर वर्षा ज़रुरत से ज़्यादा हो जाती है तो इससे भी समस्या उत्पन्न हो जाती है। मौसम में लगातार हो रहे परिवर्तन, जैसे अनियमित बारिश, भीषण गर्मी, सूखे और बेमौसम ओलावृष्टि से खेती में उत्पादन कम और नुकसान बहुत ज्यादा हो रहा है। मिट्टी की नमी खत्म हो रही है, फसलें समय से पहले पक रही हैं, कीटों का प्रकोप बढ़ रहा है और खाद्य सुरक्षा के साथ किसानों की आय पर भी गहरा संकट मंडरा रहा है।

इस आख़िरी कड़ी में पानी बचाने और ज़मीन को सँभालने के आसान तरीकों पर बात होती है। खेती और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की समझ इस एपिसोड का मुख्य संदेश है |

इस एपिसोड में बारिश न होने और फिर अचानक ज़्यादा होने से फसल को होने वाले नुकसान की बात है। मौसम की मार और उससे जूझते किसान की असली परेशानी यहाँ दिखाई देती है।

गांव आजीविका और हम कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ श्री जीब दास साहू जैविक खेती के लिए नीमास्त्र के प्रयोग और लाभ की जानकारी दे रहे हैं ।

इस कड़ी में बदलते मौसम की बात होती है और उसका खेती पर पड़ने वाला असर सामने आता है। किसान नई परिस्थितियों में अपनी फसल को कैसे सँभालने की कोशिश कर रहे हैं, यही इस कहानी की शुरुआत है।

गांव आजीविका और हम कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ श्री जीब दास साहू जैविक खेती के लिए नीमास्त्र निर्माण और उपयोग की जानकारी दे रहे हैं ।

यह ऑडियो श्रृंखला पानी, मौसम और खेती से जुड़ी रोज़मर्रा की सच्ची बातों पर आधारित है। इसमें बदलते मौसम का खेती और ज़मीन पर असर, पानी की कमी और उसे बचाने के आसान तरीकों की चर्चा है।

गांव आजीविका और हम कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ श्री जीब दास साहू आम के छोटे पौधों में लगने वाले तना छेदक कीड़े और उसके उपचार की जानकारी दे रहे हैं ।

गांव आजीविका और हम कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ श्री जीब दास साहू आलू के फसल में लगने वाला झुलसा रोग का उपचार की जानकारी दे रहे हैं ।

गांव आजीविका और हम कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ श्री जीब दास साहू आलू के फसल में लगने वाला झुलसा रोग के बारे में जानकारी दे रहे हैं ।