बिहार राज्य के जमुई ज़िला के गिद्धौर प्रखंड से रंजन मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि जमीन का सीधा सम्बन्ध घरेलु हिंसा से है। समाज में जैसे शिक्षा बढ़ रहा है उसका सीधा प्रभाव समाज पर दिख रहा है। महिला शिक्षा प्राप्त कर रही है ,वो अपने अधिकार प्राप्त करने में कामयाब हो रही है। पहले महिलाओं को जमीन में अधिकार नहीं मिलता है और न ही वो इस पर ध्यान देती थी पर अब जैसे जैसे शिक्षित हो रही है महिलाऍं जमीन पर अधिक ध्यान दे रही है।पहले जमीन नहीं रहने पर महिला को ससुराल में प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता था। महिला के नाम जमीन होने से महिला घरेलु हिंसा का शिकार नहीं होती है। महिलाओं को जमीन का अधिकार जब से मिलने लगा है तब से घरेलू हिंसा पर अंकुश लगने लगा है। जमीन में नाम रहने से परिवार महिला को सम्मानपूर्वक नज़र से देखता है। अब पुरुष महिलाओं के नाम जमीन लेते है।महिला के नाम जमीन खरीदे जाने से सरकार द्वारा टैक्स में छूट मिलता है।

बिहार राज्य के जमुई ज़िला के झाझा प्रखंड से रंजन की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से सिमुलतला निवासी करुणा सिंह से हुई। करुणा बता रही है कि अगर महिलाओं के नाम से जमीन होता है तो उनकी इनकम बढ़ेगी। अगर प्रॉपर्टी में व्यापार करती है तो अन्य महिलाओं को जोड़ कर उनकी तरक्की करने में सहायता कर सकती है। बच्चों की शिक्षा भी अच्छे से करवा सकते है। आत्मनिर्भर बनने पर महिलाएँ प्रताड़ित नहीं हो सकती है वो प्रताड़ना से दूर रहेगी , वह घरेलू हिंसा से बच सकती है।

आपके अनुसार महिलाओं को एक मंनोरंजन या लेनदेन के सामान जैसा देखने की मानसिकता के पीछे का कारण क्या है ? आपके अनुसार महिलाओं को एक सुरक्षित समाज देने के लिए क्या किया जा सकता है ? और किसी तरह के बदसलूकी के स्थिति में हमें उनका साथ किस तरह से देना चाहिए ?

हमारे समझ में आज भी यौन शोषण के बारे में एक अनचाही चुप्पी साध ली जाती है और पीड़ित व्यक्ति को ही कहीं न कहीं हर बात के लिए जिम्मेदर बना देने की प्रथा चली आ रही है। पर ऐसा क्यों है? साथ ही इस तरह के सामाजिक दबावों के अतिरिक्त और क्या वजह होती है जिसके लिए आज भी कई सारे यौन शोषण के केस पुलिस रिपोर्ट में दर्ज नहीं होते हैं ? समाज में फैले यौन शोषण के मानसिकता के लिए कौन और कैसे जिम्मेदार है ? और समाज से इस मानसिकता को हटाने के लिए तुरंत किन - किन बातों पर अमल करना जरुरी है ?

नाम ऋतिक कुमार ,उम्र नहीं बताया गया

कुछ महीने पहले की बात है, सरकार ने महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए कानून बनाया है, जिससे उन्हें राजनीति और नौकरियों में आरक्षण मिलेगा, सवाल उठता है कि क्या कानून बना देने भर से महिलाओं को उनका हक अधिकार, बेहतर स्वास्थय, शिक्षा सेवाएं मिलने लगेंगी क्या? *----- शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और आर्थिक अवसरों तक महिलाओं की पहुंच में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं *----- महिलाओं को जागरूक नागरिक बनाने में शिक्षा की क्या भूमिका है? *----- महिलाओं को कानूनी साक्षरता और उनके अधिकारों के बारे में जागरूक कैसे किया जा सकता है"

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की 2021 की रिपोर्ट बताती है कि दुनिया भर में आर्थिक समानता में महिलाओं की संख्या 58 फीसदी है। लेकिन पुरुषों के बराबर आने में उन्हें अभी सदियां लग जाएंगी। 156 देशों में हुए इस अध्ययन में महिला आर्थिक असमानता में भारत का स्थान 151 है। यानी महिलाओं को आर्थिक आजादी और अचल संपत्ति का हक देने के मामले में एक तरह से हम दुनिया में सबसे नीचे आते हैं। दोस्तों आप हमें बताइए कि *----- पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं के जीवन का बड़ा समय इन अधिकारों को हासिल करने में जाता है, अगर यह उन्हें सहजता से मिल जाए तो उनका जीवन किस तरह आसान हो सकता है? *----- महिलाओं के लिए भूमि अधिकारों तक पहुंच में सुधार के लिए कौन- कौन से संसाधन और सहायता की आवश्यकता हैं?

सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में...

रोजगार और श्रम के मसले पर भी महिलाओं की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है, और इसके पीछे का कारण भी वही हैं जो उन्हें अवसरों का समानता, स्वतंत्र निर्णय लेने में होने वाली परेशानियां है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार, भारत में महिलाओं का 81.8 प्रतिशत रोजगार अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में केंद्रित है। ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट 2021 के ही अनुसार, औसतन भारतीय महिलाओं को पुरुषों की आय का 21% भुगतान किया जाता था। इस सबके पीछे का कारण यह है कि महिलाओं को उनके परिवार में ही हक और बराबरी के बारे न बताया जाता है और न सिखाया जाता है, जिसके चलते महिलाओं के पास विकल्प कम होते जाते हैं, और वह जो मिल रहा है रख लो वाली सोच की आदि हो जाती हैं, जोकि उनकी क्षमताओं के साथ अन्याय है। *----- दोस्तों महिलाओं के हक, अधिकार और समानता के मसले पर आपका क्या सोचते हैं ? *----- क्या आपको भी लगता है कि महिलाओं को पिता की संपत्ती में अधिकार के साथ उनके साथ समानता का व्यवहार किये जाने की आवश्यकता है? या फिर आप कुछ इससे अलग भी सोचते हैं,

बिहार राज्य के जमुई ज़िला के बरहट प्रखंड से आशुतोष की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से हमारे श्रोता से हुई ,ये कहते कि महिलाओं के प्रति हिंसात्मक घटनाओं को खत्म करने के लिए सरकार ने कई कार्य किये है ,कई कठोर कानून बनाए है ।लेकिन हिंसात्मक घटनाओं को कम करने के लिए समाज ही भूमिका अदा कर सकता है। लोग अपने बच्चों को बाहर शिक्षा के लिए भेज रहे है ,किताबी ज्ञान मिल रहा है पर सांसारिक ज्ञान नहीं दे पा रहे है। महिलाओं के साथ होनी वाली घटना से महिला को डरना नहीं चाहिए। समाज में अभी भी लोग महिला के नाम से जमीन लेने से हिचकते है। क्योंकि महिला गलत राह में जाती है ,यह सोच से परिवार वाले महिला को जमीन नहीं देते है। महिला को विश्वास दिलाने की ज़रुरत है। ताकि पति पत्नी एक साथ चल पाए। सरकार को कुटीर उद्योग चलाना चाहिए। ताकि महिलाओं को रोजगार से जोड़ा जा सके