परंपरा तभी बदलेगी, जब सोच बदलेगी। जब समाज यह समझेगा कि महिलाओं को भूमि और संपत्ति में समान अधिकार देना परिवार और राष्ट्र दोनों के हित में है, तभी भारत वास्तविक अर्थों में समानता और न्याय की दिशा में आगे बढ़ेगा। तब तक आप हमें बताइए कि , *---- आपके परिवार में जमीन किसके नाम है? क्या महिलाओं का नाम भी उसमें शामिल है *---- हम अपने परिवार और समाज में ऐसी कौन-सी पहल कर सकते हैं, जिससे महिलाओं को ज़मीन में बराबर की हिस्सेदारी सुनिश्चित हो? *---- अगर महिलाओं के नाम जमीन हो जाए, तो आपके हिसाब से उनकी ज़िंदगी में क्या-क्या बदल सकता है?”

दिल्ली से राजेश कुमार पाठक ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि अभी इन्होने श्रमिक वाणी पर एक बहन की बात सुनी। जिसमें कहा गया था कि उनको माँ और भाइयों ने मायके में रहने के लिए सम्पत्ति में हिस्सा दिया। राजेश ऐसी माँ और भाइयों की सराहना करते हैं।अपनी आपबीती बताते हुए राजेश कुमार पाठक ने कहा कि खुद ये और इनकी पत्नी दृष्टिबाधित हैं और एक बेटी विकलांग थी। सास ने रहने के लिए गांव में जमीन का एक टुकड़ा अपनी दृष्टिबाधित बेटी को देना चाहा तो इनके दोनों साले अपनी माँ [ इनकी सास ] का गला दबाने के लिए दौड़ पड़े।यदि ग्रामीणों ने बीच बचाव ना किया होता तो इनके दोनों साले इनकी सास को मार डालते।इनको जमीन भी नही मिलती और सास की मौत भी हो जाती।आज इनकी पत्नी और बेटी इस दुनियां में नही हैं।समाज बहुत कठोर है। मगर धरती वीरों और अच्छे लोगों से भरी है।आज भी माँ अपने संतान और बेटी के लिए मरने से पहले कुछ कर जाना चाहती है। ताकि बेटी आबाद रहे

मध्य प्रदेश राज्य के अलीराजपुर जिला से रमेश देवड़ा ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि पैतृक जमीन को कोई छीन नही सकता है। किसी को आप का जमीन छीनने का अधिकार नही होता है।क्योंकि पिता के जमीन के कागजात,पट्टा। इत्यादि होता है। यदि कोई गलत तरीके से जमीन छीनता है तो उसके विरुद्ध क़ानूनी कार्यवाई करना चाहिए।

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दिल्ली के जहांगीरपुरी से दुर्गेश मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि अगर महिलाओं को जमीन में अधिकार मिलेगा तो वह आर्थिक रूप से मजबूत बनेंगी और वह ससुराल और मायके पक्ष से भी मजबूत बनेंगी। आने वाले समय में वह अपना भविष्य मजबूत कर सकती हैं

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दिल्ली से राजेश कुमार पाठक मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि एक महिला की कहानी सुनकर अच्छा लगा जिसमे बताया गया कि वह हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। उनका कहना है कि आने वाले समय में महिला ही मालकिन बनेंगी। ऐसा वक़्त आने वाला है कि पुरुषों के पास कुछ नहीं बचेगा और सारा हक़ महिलाओं को ही मिलेगा।भारत पुरुष प्रधान समाज रहा है

दिल्ली से राजेश कुमार पाठक मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि वह दुर्गेश की कहानी सुने उनको अच्छा लगा। इनका कहना है कि दुर्गेश की माता ने उनका सपोर्ट किया जिसके कारण उनको जमीन में अधिकार मिल गया। महिलाओं को पुरुष भी सपोर्ट नहीं करते हैं। बच्चे भी माँ का सपोर्ट नहीं करते हैं। बच्चे मोबाइल देख देख कर बिगड़ रहे हैं। महिलाओं को हक़ मिलना चाहिए

दिल्ली से राजेश कुमार पाठक मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि वह सुनीता की कहानी सुने तो उनका कहना है कि जो महिला, पति और पिता के संपत्ति में अधिकार ले चूँकि हैं उनको समाज के महिलाओं के पास जाना चाहिए और अपना उदहारण देना चाहिए।