दिल्ली से राजेश कुमार पाठक ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि अभी इन्होने श्रमिक वाणी पर एक बहन की बात सुनी। जिसमें कहा गया था कि उनको माँ और भाइयों ने मायके में रहने के लिए सम्पत्ति में हिस्सा दिया। राजेश ऐसी माँ और भाइयों की सराहना करते हैं।अपनी आपबीती बताते हुए राजेश कुमार पाठक ने कहा कि खुद ये और इनकी पत्नी दृष्टिबाधित हैं और एक बेटी विकलांग थी। सास ने रहने के लिए गांव में जमीन का एक टुकड़ा अपनी दृष्टिबाधित बेटी को देना चाहा तो इनके दोनों साले अपनी माँ [ इनकी सास ] का गला दबाने के लिए दौड़ पड़े।यदि ग्रामीणों ने बीच बचाव ना किया होता तो इनके दोनों साले इनकी सास को मार डालते।इनको जमीन भी नही मिलती और सास की मौत भी हो जाती।आज इनकी पत्नी और बेटी इस दुनियां में नही हैं।समाज बहुत कठोर है। मगर धरती वीरों और अच्छे लोगों से भरी है।आज भी माँ अपने संतान और बेटी के लिए मरने से पहले कुछ कर जाना चाहती है। ताकि बेटी आबाद रहे
