हिमाचलप्रदेश से हस्मत अली साझा मंच के माध्यम से एक बुज़ुर्ग मज़दूर से बातचीत कर रहें हैं, इनका नाम महबूब है और झांसी से आकर गोलथआइ में रह रहें हैं चार माह से. ये ठेकेदार के अंडर रोज़ाना मज़दूरी पे लोहा लगाने का काम करते हैं. इनका कहना है की चार दिन में दो से तीन हज़ार रुपए देहादि बन जाती है. लेकिन ये घर जाना चाहते हैं और इन्हें पेमेंट नहीं दे जा रही है. यहां स्वछता और सुविधाओं का भी आभाव है.

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हिमाचल प्रदेश से मनीष शर्मा जी साझा मंच मोबाईल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि मजदूरों के लिए कानून तो बनते हैं लेकिन वो बाहर नहीं आ पाते हैं ठीकेदार और प्रशासन द्वारा दबा दिया जाता है। ये बहुत ही लम्बी लड़ाई है और इसे कोई भी मजदुर करना पसंद नहीं करते हैं। हर कोई चाहता है की उसे रोजगार मिले। सरकार ध्यान देना चाहिए की कानून ऐसा बनाये की जल्द से जल्द मजदूरों की बात सुनी जाए और उसका समाधान किया जाए