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उत्तरप्रदेश आगरा से रवि कुमार प्रजापति साझा मंच के माध्यम से यह कहते हैं, कि यह बात सत्य है, कि आज समाज में कई तरह के घटनाओं के बारे में सुनने को मिलता है। खास तौर से आज के युवा वर्ग जब इंटर में जाते हैं, तो वे गलत रास्तों में चलने लगते हैं।बेटा या बेटी कॉलेज में जाते हैं, तो अभिभावकों को विशेष रूप से ध्यान रखने की आवश्यकता होती है। अभिभावकों को बेटा और बेटी में कोई अंतर नहीं रखना चाहिए, दोनों को एक समान शिक्षा देना चाहिए। यह देखा जाता है, कि कई अभिभावक अपने बेटी के पढाई के ऊपर हमेशा रोक लगाते हैं। अभिभावकों का यह सोच रहता हैं, कि यदि बेटियों की शिक्षा से वंचित और उन्हें घर से बाहर निकलने पर रोक लगा दिया जाए, तो समाज में सुधार हो सकेगी। परन्तु आज के समय में अभिभावकों का यह सोच बहुत ही गलत है। कई अभिभावक समाज के डर से अपनी बेटी की शादी बहुत ही कम उम्र में किसी भी वर से कर देते हैं। जिसका ख़ामियाजा लड़की को पूरी जिंदगी भर के लिए भुगतना पड़ता है। अतः रवि कुमार प्रजापति सभी अभिभावकों से यह अनुरोध करते हैं, कि वे अपने बच्चों को एक समान का अधिकार दें। उनमे भेदभाव कभी ना करें।

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राज्य उत्तर प्रदेश के आगरा ज़िला से रवि कुमार प्रजापति साझा मंच के माध्यम से बताते हैं कि उन्होंने इंदर पाल जी की बातें मोबाईल वाणी पर सुना जिसमे बताया गया की मज़दूरों को प्राइवेट नौकरी में बहुत ही कम वेतन पर रखा जाता है। जिसमे उनसे बारह से सोलह घंटे काम कराया जाता है। जिसके बाद भी उन्हें नियमित रूप से वेतन नहीं मिलता। कभी कभी महीने में देरी भी हो जाती है। जिसके कारण उन्हें तमाम परेशानियों से जूझना पड़ता है। इसलिए वो कहना चाहते हैं की हमारे देश में जो मज़दूरों के प्रति शोषण होता है,उस शोषण को रोकने के लिए हमें अपने अधिकारी के तहत लड़ना पड़ता है। परन्तु हमारे साथ यह समस्याएं ज़रूर आती है। यदि हम अपने अधिकारों के लिए लड़े तो हमें कई हद तक उस कंपनी से या उस विद्यालय से निकाल दिया जाता है। उस स्थिति में वो अपने बच्चे को क्या खिलाएं और क्या नहीं खिलाएं ये समस्याएं आम तौर पर मज़दूरों के साथ आती हैं।