दिल्ली के मानेसर से शिला देवी श्रमिक वाणी के माध्यम से बताना चाहती है की, इनके पति मजदूरी करते है, लेकिन फिर भी इन्हे ईएसआई का लाभ नहीं मिल रहा है। अस्पातल में जाने के बाद वह सिर्फ मजदूरों के परिवार से चक्कर लगवा जाता है और इलाज नहीं किया जाता है।
दिल्ली के मानेसर से शिला देवी श्रमिक वाणी के माध्यम से बताना चाहती है की, इनके पति मजदूरी करते है, लेकिन फिर भी इन्हे ईएसआई का लाभ नहीं मिल रहा है। अस्पातल में जाने के बाद वह सिर्फ मजदूरों के परिवार से चक्कर लगवा जाता है और इलाज नहीं किया जाता है।