दिल्ली एनसीआर के गुरुग्राम रोड से नन्द किशोर की बातचीत श्रमिक वाणी के माध्यम से कापसहेड़ा निवासी अजित कुमार से हुई। अजित बताते है कि जब कोरोना बढ़ा हुआ था तब पुलिस प्रशासन द्वारा हमारी सुरक्षा के लिए कड़े प्रबंध किया हुआ था ताकि लोग घरों से बेवजह बाहर न निकले। कोरोना से बचाव के नियमों का पालन कर रहे थे ,मास्क और सैनिटाइज़र का प्रयोग करते थे। उस वक़्त वोडाफ़ोन कंपनी में काम करते थे ,तो घर से काम करते है और वेतन पूरी मिली थी। कोरोना काल में सब्ज़ियाँ महँगे हो गए थे। जरूरत के सामान महँगे बिक रहे थे। उस वक़्त डर बहुत था ,बुखार हो गया था तो लगता था कोरोना हो गया ,घर वाले भी दूरी बनाए हुए थे। लोगों को भी तबियत के बारे बताने डर लगता था। मास्क और सैनिटाइज़र का प्रयोग करते थे , इसलिए कोरोना का उतना डर नहीं था
