दिल्ली के गुरुग्राम रोड से नन्द किशोर की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बरेली निवासी पप्पू लाल से हुई। पप्पू बताते है कि दिहाड़ी का कार्य सही नहीं चल रहा है। रोजाना कार्य नहीं मिलता है। कभी पाँच सौ तो कभी चार सौ रूपए दिहाड़ी मिलती है। गाँव में काम नहीं मिलता है इसलिए शहर आते है काम के लिए। चौक से ही काम पर जाते है या दिर ठेकेदार के माध्यम से काम करते है। ठेकेदार वैसे काम के पैसे महीने में देते है लेकिन कभी ठेकेदार पैसा देते है तो कभी नहीं देते है। भवन निर्माण का कार्य करने जाते है तो उन्हें सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं मिलती है। कोरोना काल में काम की स्थिति सही नहीं है। राशन पानी,रूम किराया की भी समस्या होती है।
