आपको बताना चाहते हैं कि कोई भी कंपनी अपने मज़दूरों को बिना नोटिस और ठोस कारण के काम से नहीं निकाल सकती, अगर आपके साथ ऐसा हुआ है तो आप लेबर ऑफिस जा सकते हैं। लेकिन हम आपको सुझाव देते हैं कि आप लेबर ऑफिस तभी जाएं जब आपके पास पुख्ता सबूत मौजूद हों, क्योंकि कंपनियां अपने दस्तावेज़ इस तरह मेंटेन करती हैं की कोई भी उसमें ग़लतियाँ नहीं निकाल सकता। हम आपको यह सुझाव भी देते हैं कि पहले आप अपने नियोक्ता से यूनियनों के द्वारा बात करें, और अगर कोई समाधान नहीं मिलता है तभी यूनियन के साथ लेबर ऑफिस जाएं। पहले आपको एक सरल और संक्षेप लिखित शिकायत लेबर ऑफिस में देनी होगी, उसके साथ वह सभी दस्तावेज़ लगाएँ जो यह साबित करें कि आप उस कंपनी में काम कर रहे थे। कंपनी के साथ हुई बातचीत का कुछ लिखित दस्तावेज़ है तो वह भी इस शिकायत के साथ अटैच करें जो बोहत जरूरी होता है। लेबर कमिश्नर दोनों पाकशों को सुनने के बाद आपके और आपके कंपनी के बीच समझौता करने की कोशिश करते हैं, नियम के मुताबिक अगर 45 दिन में समझोता/सेटलमेंट नहीं हुआ तो वो खुद ही संबंधित लेबर कोर्ट में आपके केस को रेफर कर देंगे, इसे सेटलमेंट फेल भी कहा जाता है। इसके बाद आपका केस लेबर कोर्ट में चलेगा। लेबर ऑफिस में काम करवाना थोड़ा मुश्किल होता है, और अपना काम करवाने केलिए आपको लेबर ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं, और इसमें कई दिन भी लग सकते हैं, इसलिए हम आपको फिर से सुझाव देते हैं कि लेबर ऑफिस जाने से पहले यह ध्यान रखें कि आपके पास पुख्ता डाक्यूमेंट्स और यूनियन/लॉयर का साथ हो।
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आपको बताना चाहते हैं कि कोई भी कंपनी अपने मज़दूरों को बिना नोटिस और ठोस कारण के काम से नहीं निकाल सकती, अगर आपके साथ ऐसा हुआ है तो आप लेबर ऑफिस जा सकते हैं। लेकिन हम आपको सुझाव देते हैं कि आप लेबर ऑफिस तभी जाएं जब आपके पास पुख्ता सबूत मौजूद हों, क्योंकि कंपनियां अपने दस्तावेज़ इस तरह मेंटेन करती हैं की कोई भी उसमें ग़लतियाँ नहीं निकाल सकता। हम आपको यह सुझाव भी देते हैं कि पहले आप अपने नियोक्ता से यूनियनों के द्वारा बात करें, और अगर कोई समाधान नहीं मिलता है तभी यूनियन के साथ लेबर ऑफिस जाएं। पहले आपको एक सरल और संक्षेप लिखित शिकायत लेबर ऑफिस में देनी होगी, उसके साथ वह सभी दस्तावेज़ लगाएँ जो यह साबित करें कि आप उस कंपनी में काम कर रहे थे। कंपनी के साथ हुई बातचीत का कुछ लिखित दस्तावेज़ है तो वह भी इस शिकायत के साथ अटैच करें जो बोहत जरूरी होता है। लेबर कमिश्नर दोनों पाकशों को सुनने के बाद आपके और आपके कंपनी के बीच समझौता करने की कोशिश करते हैं, नियम के मुताबिक अगर 45 दिन में समझोता/सेटलमेंट नहीं हुआ तो वो खुद ही संबंधित लेबर कोर्ट में आपके केस को रेफर कर देंगे, इसे सेटलमेंट फेल भी कहा जाता है। इसके बाद आपका केस लेबर कोर्ट में चलेगा। लेबर ऑफिस में काम करवाना थोड़ा मुश्किल होता है, और अपना काम करवाने केलिए आपको लेबर ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं, और इसमें कई दिन भी लग सकते हैं, इसलिए हम आपको फिर से सुझाव देते हैं कि लेबर ऑफिस जाने से पहले यह ध्यान रखें कि आपके पास पुख्ता डाक्यूमेंट्स और यूनियन/लॉयर का साथ हो।
Feb. 10, 2021, 4:34 p.m. | Tags: govt entitlements int-PAJ industrial work workplace entitlements