जोहार साथियों , मोबाइल वाणी लेकर आया है रोजगार समाचार। यह नौकरी उन लोगों के लिए है जो बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स से जुड़कर ग्रुप बी और सी के कुल 41 पद के पर कार्य करना चाहते है। न्यूनतम 10 वीं पास वैसे व्यक्ति इन पदों के लिए आवेदन कर सकते है जिन्होंने किसी मान्यता प्राप्त संस्था से आईटीआई किया हो , इसके साथ ही उम्मीदवार की आयुसिमा न्यूमतम 18 वर्ष व अधिकतम 25 वर्ष तक होनी चाहिए। इन पदों पर वेतनमान नियम अनुसार दिया जाएगा। इच्छुक उम्मीदवार अपना आवेदन ऑनलाइन भर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए आवेदनकर्ता इस वेबसाइट पर जा सकते हैं। वेबसाइट है https://rectt.bsf.gov.in योग्य उम्मीदवारों का चयन ऑनलाइन परीक्षा के आधार पर होगा। याद रखिए इन पदों पर आवेदन करने की अंतिम तिथि 15 -04 -2024 है। तो साथियों,अगर आपको यह जानकारी लाभदायक लगी, तो मोबाइल वाणी एप्प पर लाइक का बटन दबाये साथ ही फ़ोन पर सुनने वाले श्रोता 5 दबाकर इसे पसंद कर सकते है। नंबर 5 दबाकर यह जानकारी आप अपने दोस्तों के साथ भी बाँट सकते हैं।

मेरा नाम टिंकू है मैं गढ़वा जिले के कांडे प्रखण्ड बलियारी पंचायत से बोल रहा हूँ मुझे बिजली की बहुत समस्याएँ हैं, दुख की बात है कि गाँव में बिजली नहीं मिल पा रही है, बहुत समस्याएँ हैं।

सुनिए डॉक्टर स्नेहा माथुर की संघर्षमय लेकिन प्रेरक कहानी और जानिए कैसे उन्होंने भारतीय समाज और परिवारों में फैली बुराइयों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई! सुनिए उनका संघर्ष और जीत, धारावाहिक 'मैं कुछ भी कर सकती हूं' में।

झारखण्ड राज्य के रामगढ़ से डॉ आशीष कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि नकारी कॉलोनी के नागरिकों को पीने का पानी नहीं दिया जा रहा है जिससे उन्हें काफी परेशानी हो रही है

"गांव आजीविका और हम" कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ कपिलदेव शर्मा असली डीएपी की पहचान करने के बारे में जानकारी दे रहे है अधिक जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें 

Transcript Unavailable.

Transcript Unavailable.

हमारी सूखती नदियां, घटता जल स्तर, खत्म होते जंगल और इसी वजह से बदलता मौसम शायद ही कभी चुनाव का मुद्दा बनता है। शायद ही हमारे नागरिकों को इससे फर्क पड़ता है। सोच कर देखिए कि अगर आपके गांव, कस्बे या शहर के नक्शे में से वहां बहने वाली नदी, तालाब, पेड़ हटा दिये जाएं तो वहां क्या बचेगा। क्या वह मरुस्थल नहीं हो जाएगा... जहां जीवन नहीं होता। अगर ऐसा है तो क्यों नहीं नागरिक कभी नदियों-जंगलों को बचाने की कवायद को चुनावी मुद्दा नहीं बनाते। ऐसे मुद्दे राजनीति का मुद्दा नहीं बनते क्योंकि हम नागरिक इनके प्रति गंभीर नहीं हैं, जी हां, यह नागरिकों का ही धर्म है क्योंकि हमारे इसी समाज से निकले नेता हमारी बात करते हैं।

Transcript Unavailable.

Transcript Unavailable.