झारखण्ड राज्य के धनबाद जिला से झारखण्ड मोबाइल वाणी पर बीरबल महतो जी ने बताया कि अभिभावकों को केवल स्कूल के भरोसे नहीं रहना चाहिए। शिक्षा के लिए अभिभावकों के भी अहम योगदान होना अतिआवश्यक है।और शिक्षा के लिए अभिभावकों को घर पर अनकुल वातावरण बनाना चाहिए। अभिभावकों को इसकी महत्ता को समझ अपने बच्चों को शिक्षित करना चाहिए। विद्यालय व्यक्तित्व निर्माण में एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं, कारण यह है कि यहां मिलने वाली शिक्षा से व्यक्ति अपनी आगे की मंजिल निर्धारित करता है। परन्तु अभिभावकों को बच्चों लिए नैतिक मूल्यों की शिक्षा देना चाहिए सिद्धांतवादी बनाना सिखाना और अच्छा इंसान बनने की प्रेरणा देना चाहिए ।तभी जा कर एक अच्छे समाज का निर्माण होगा और देश में शिक्षा का स्तर में सुधार आएगा ।

राज्य झारखण्ड के जिला बोकारो प्रखंड जरीडीह से सुरेंद्र जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि माता को विशेष रूप से बच्चो की शिक्षा पर ध्यान देना पड़ेगा।पिता तो उतना ध्यान नहीं दे पाएंगे जितना माता दे पायेगी जैसे कि बच्चा स्कुल गया कि नहीं ,गृहकार्य बनाया या नहीं ,स्कुल गया या फिर कही और चला गया इत्यादि बातों का ख्याल माँ ही रख सकेगी।बच्चों की माता जिस तरह से चाहेगी वैसी शिक्षा बच्चे प्राप्त करेंगे ।

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झारखण्ड राज्य के बोकारो जिला से नेरेस महतो जी ने झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि सभ्य समाज का निर्माण करने में शिक्षा का होना बहुत जरुरी है।सरकार के द्वारा शिक्षा के प्रति चलाए जाने वाले साक्षरता योजना से या विद्यालय द्वारा सम्पूर्ण साक्षर नहीं बना सकतें है। इन सभी में अभिभावकों के भी अहम योगदान होना अतिआवश्यक है।व्यक्ति सुनहरे जीवन के पथ पर तभी अग्रसर हो सकता है, जब उसके पास शिक्षा रूपी अमोघ अस्त्र होगा। इसके द्वारा ही व्यक्ति समाज को सही राह दिखा सकता है और सभ्य समाज के निर्माण में अपने को परिलक्षित कर सकता है। अभिभावकों को इसकी महत्ता को समझ अपने बच्चों को शिक्षित करना चाहिए। यह शिक्षक कुम्हार की तरह होते हैं। शिक्षक अपने छात्रों को अपने ज्ञान रूपी चाक से उनके व्यक्तित्व का निर्माण करता है। विद्यालय व्यक्तित्व निर्माण में एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं, कारण यह है कि यहां मिलने वाली शिक्षा से व्यक्ति अपनी आगे की मंजिल निर्धारित करता है।

झारखण्ड राज्य के गिरिडीह जिला से राम चंद्र जी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि जब बच्चें विद्यालय से घर आते है, तो अविभावकों को बच्चों पर ध्यान देना चाहिए।परन्तु अविभावक बच्चे पर ध्यान नहीं देते है। कि बच्चे पढ़ाई कर रहे है, या मोबाइल पर ध्यान दे रहे है, चूंकि आज कल के बच्चे पढ़ाई पर काम मोबाइल पर ज्याद ध्यान देते है, और इस कारणवश बच्चों में पढ़ाई का स्तर गिरता जा रहा है। बच्चों पर अविभावकों को नजर रखनी चाहिए।बच्चे को दिया गया होम वर्क को चेक करना चाहिए और शिक्षक को बताना चाहिए कि बच्चे में पढ़ाई को लेकर सुधार है या नहीं। तभी जा कर देश और राज्य में शिक्षा के स्तर में सुधार होगा। और बच्चें शिक्षित होगें और देश का विकास होगा।

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झारखण्ड राज्य के धनबाद ज़िला के बाघमारा प्रखंड से बीरबल महतो मोबाइल वाणी के माध्यम से विद्यालय में शिक्षक की होती मनमानी पर आधारित कविता प्रस्तुत कर रहें हैं। इस कविता के माध्यम से यह कहना चाहते हैं कि निजी स्कूलों की मनमानी कर रहे हैं बेईमानी, यह है एक काला धन्धा जिससे अभिभावक हुए हैं मन्दा

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झारखण्ड राज्य के बोकारो जिला से झारखण्ड मोबाइल वाणी पर सुसमा कुमारी जी ने बताया कि बच्चों के लक्ष्य प्राप्ति में अभिभावकों को अधिक मेहनत करना पड़ता है। शिक्षा के लिए अभिभावकों को भी अहम योगदान देना होता है। उन्हें घर पर अनुकूल वातावरण बनाना होता है । अभिभावकों को इसकी महत्ता को समझ अपने बच्चों को शिक्षित करना पड़ता है । अभिभावकों ही बच्चें के जीवन और शिक्षा के कर्ता धरता होतें है। उन्हें मालूम होता है की बच्चों के लिए शिक्षा कितना महत्वपूर्ण है। शिक्षा से ही एक अच्छे इंसान का निर्माण होता है, और एक अच्छा समाज का विस्तार होता है। अभिभावक अपने बच्चों का होसला बढ़ा कर उन्हें शिक्षा की और अग्रसित करतें है। उन्हें नैतिक शिक्षा दे कर उन्हें समाज में कैसे रहना है, वे अपने बच्चे को बतातें है। जिससे एक अच्छा समाज का निर्माण हो,और वे अपनी मंजिल प्रप्त कर सकें।