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गोड्डा जिले से सुरेंदर सिंह जी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि मनरेगा में महिलाओं को पचास प्रतिशत हाजरी मिलता है। लेकिन महिलाओं को पूरी मजदूरी नहीं मिल पाता है। इसका मुख्य वजह है मनरेगा योजना के क्रियान्वयन में बिचौलियों का हावी होना।उन्होंने बताया कि मनरेगा का नाम पहले नरेगा था ,बाद में पिछली सरकार ने इसका नाम बदलकर मनरेगा यानि की महात्मा गाँधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम किया।इस योजना से जरुरत मंदो को लाभ न मिल कर , बिचौलिओं को लाभ मिल रहा है।महिलाओं को मुख्य रूप से बिचौलिये लूट रहे हैं,क्योंकि महिलाओं को इस योजना के विषय में विस्तृत जानकारी नहीं है।इस अज्ञानता का लाभ उठा कर बिचौलिये फल -फूल रहे हैं।गाँव में आ कर देखने और सुनने से पता चलेगा कि मरेगा में मुख्यतः किस प्रकार की धांधली हो रही है।

गिरिडीह जिले से महेश कुमार जी ने मोबाईल वाणी के माध्यम से बताया कि मनरेगा कार्यक्रम के विषय में इलाके के लोगों को जानकारी नहीं है। विशेषकर महिलाओं को बिलकुल भी जानकारी नही है, सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के बारे में।ज्ञान के अभाव में इस योजना का लाभ महिलाएँ नहीं उठा पा रही हैं।

झारखण्ड से बबन कुमार साहू जी ने मोबाईल वाणी के माध्यम से बताया कि मनरेगा से जुड़ी सुविधाएँ जरुरत मंदो तक नहीं पहुँच पाती है।कुछ खास लोगों को ही इसका लाभ मिल पता है ,बाकी लोग इसके लाभ से वंचित रह जाते हैं।मनरेगा के तहत लोगों को अपने जीविकोपार्जन के लिए बकरीपालन ,मुर्गी पालन ,भेड़ पालन इत्यादि क्र लिए सहायता राशि दिया जाता है।लेकिन सरकार द्वारा भेजी गई सहायता राशि,उन्हीं लोगों को मिलती है जो, पैसा या रिश्वत देते हैं।जो विरोधी पार्टी के लोग होते हैं ,उन्हें किसी भी प्रकार की कोई सुविधा नहीं दी जाती है ।इसके आलावा भी शिक्षा से सम्बंधित कई समस्याएँ हैं।स्कूलों में बच्चों को सही शिक्षा और भोजन मील पा रहा है या नहीं ,इसकी जानकारी जनता को नहीं मिल पाती है।साथ ही मनरेगा और स्कूलों का देख -रेख भी ठीक से नहीं किया जा रहा है।

झारखण्ड राज्य के पूर्वीसिंघभुम जिले के पोटका प्रखंड से चक्रधर भगत जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि मनरेगा योजना के तहत गरीब महिलाओं को रोजगार देने के लिए सरकार ने जो योजनाएं चला रही है, उसमे काफी अनियमितता देखीं जा रही है।पोटका प्रखंड के हान्थिबंधा पंचायत में मनरेगा के काम तो हो रहे है परन्तु श्रमिकों के लिए जो जॉब कार्ड बनवाये गए है ,वह संपन्न परिवारो के सदस्यों के बनाये गए है।इस योजना में बिचौलियाँ के माध्यम से हाजरी बनते है, अत : इस तरह से सरकारी लाभों व मनरेगा योजना की लूट हो रही है। मनरेगा योजना के तहत मजदूरों को और महिलाओ को जो सुविधाएं प्रदान करने की बात की जाती है, वह नाम मात्र की है । इसके अंतर्गत किसी भी कर्मियों को कोई सुविधा नहीं दी जाती है। इसके लिए सरकार को उचित कदम उठाने की आवश्यकता है,ताकि यह योजना सही दिशा पर चल सके। गांव में ग्रामसभा की बैठक भी नहीं होती है जिसके कारण लोगो को मनरेगा और अन्य योजनाओं की जानकारी नहीं मिल पाती है।

जिला गिरिडीह से दीपक वर्मा जी झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि मनरेगा का ज्यादातर काम जे.सी.बी या मशीनी उपकरण से किया जाता है।गाँवो में मनरेगा योजना के तहत ग्राम सभा का आयोजन नहीं किया जाता है। मनरेगा के तहत जो पैसे मजदुर को दिए जाते है वे दूसरे के बैंक खाते से पैसे दिए जाते है। इसलिए सरकार द्वारा ऐसी कोई व्यवस्था होनी चाहिए जिससे मनरेगा का काम सिर्फ मनरेगा मजदूरों को ही दी जाये साथ ही मजदुर का हक एवं पैसा दी जाये।

जिला मुरैना मध्य -प्रदेश से कालीचरण ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि मनरेगा योजना के अंतर्गत बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध करवाया जाता है।मनरेगा योजना में कई बार अनियमितता और गड़बड़ी समय -समय पर देखने को मिलती है। ऐसा भी देखने को मिलता है कि ,मजदूरों को समय से वेतन नहीं मिला है।जब तक कोई कानून या योजना ,व्यवस्थित और दृढ़ता से लागू नहीं किया जायेगा,तब -तक कोई भी कानून या योजना सफल नहीं होगा।साथ ही सरकार को समझना होगा कि किसी भी योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए,उस योजना से जुड़े लोगों की ठीक से जाँच -परख की जानी चाहिए और ईमानदार एवं योग्य लोगों को ही योजनाओं में शामिल करना चाहिए।बेरोजगार नव -जवानों और महिलाओं के लिए मनरेगा बहुत अच्छी योजना है,बशर्ते इस योजना को सही तरीके से कार्यान्वित किया जाये।

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जिला गोड्डा से सुरेंद्र सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि मनरेगा में मजदूरों से काम कराने के बाद उन्हें 150 रुपया ही दिया जाता है जिसमे 35 से 40 % कमीशन के रूप से मुखिया ले लेते हैं।जिसके कारण कोई भी मजदुर इस योजना में कार्य करने के इच्छुक नहीं रहते हैं