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जिला दुमका के शिकारीपारा प्रखण्ड से शैलेन्दर सिंहा जी ने झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से पप्पू चौबे जी से बाल विवाह एक अभिशापित प्रथा के बारे में बात की। उन्होने बताया कि इस कुप्रथा का बुरा प्रभाव स्त्री और बच्चे दोनो पे पड़ता है साथ ही बच्चा भी कुपोषण का शिकार होता है,इससे बचने के लिए हमें बाल विवाह के प्रति शिक्षा और जागरूकता को बढावा देना चाहिए।

शिकारीपाड़ा,दुमका से शैलेन्द्र सिन्हा ने कस्तूरबा गाँधी आवासीय विद्यालय की शिक्छिका अलका से बातचीत की.26 सितम्बर को ईश्वर चन्द्र विद्यासागर पर बोलते हुए कहा कि समाज में बाल विवाह पर पूरी तरह रोक लगना चाहिए।लड़कियों और उनके माता पिता के अशिकछित होने के कारण ही ये बाल विवाह हो रहे है.बाल विवाह रोकने में माता पिता का रोल अहम है

दुमका जिले के शिकारीपारा से शैलेन्द्र सिनहा ने झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है की सामाजिक कार्यकर्ता हाज़िर मुर्मू से बाल विवाह के मुद्दे पर बात की.संथाल में ज्यादा अशिक्छा होने के कारण यहाँ बाल विवाह ज्यादा होता है. जल्दी विवाह होने के कारण शारीरिक और बौद्धिक विकास रुक जाता है.लोग इसके बुरे प्रभाव को नहीं समझ रहे है.ग्राम प्रधान को बाल विवाह रोकने के लिए नियमावली बनानी चहिये तभी गाँव का सर्वांगीन विकास होग.

शिकारीपाड़ा इंटर कोलेज की लेक्चरर प्रमोदनी सोरेन ने झारखण्ड मोबाइल वाणी से आज इस्वर चन्द्र विद्या सागर के जन्म दिवस पर अपने विचार रखे.विद्यासागर समाजसुधारक होने के साथ साथ एक शिक्छा शास्त्री और स्वतंत्रता सेनानी भी थे.महिला शिक्छा और विधवा विवाह को बढ़ावा दिया .पुनर्विवाह कानून 1856 इन्होने लाया।अपने एक बेटे का विवाह इन्होने एक विधवा महिला से किया था.झारखण्ड में भी बाल विवाह जोरो पर है जिससे लड़कियां अच्छी शिक्छा से वंचित रह जाती हैं