शिकारीपाड़ा इंटर कोलेज की लेक्चरर प्रमोदनी सोरेन ने झारखण्ड मोबाइल वाणी से आज इस्वर चन्द्र विद्या सागर के जन्म दिवस पर अपने विचार रखे.विद्यासागर समाजसुधारक होने के साथ साथ एक शिक्छा शास्त्री और स्वतंत्रता सेनानी भी थे.महिला शिक्छा और विधवा विवाह को बढ़ावा दिया .पुनर्विवाह कानून 1856 इन्होने लाया।अपने एक बेटे का विवाह इन्होने एक विधवा महिला से किया था.झारखण्ड में भी बाल विवाह जोरो पर है जिससे लड़कियां अच्छी शिक्छा से वंचित रह जाती हैं
