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जिला दुमका के काठीकुंड प्रखंड से अवनीश कुमार ने झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है की आज यह देखा जाता है की महिला घरेलु हिंसा यौनिक हिंसा और मानशिक हिंसा का शिकार हो रही है इसका असर अब काठीकुंड में भी देखा जा रहा है।कुछ साल पहले एक महिला की शादी हुई लेकिन शादी के कुछ ही दिनो के बाद महिला को ससुराल वालो के द्वारा प्रताड़ित किया जाने लगा महिला बचाव के अपने मायके में रहने लगी महिला ने इसकी जानकारी थाना में कराई लेकिन किसी तरह की सहायता नहीं किया गया।ऐसी कई प्राथमिकी थाना में दर्ज की गई है जिस पर कोई पहल नहीं किया जाता है।अत:महिलाओ के लिए और भी कड़ी कानून बनाने की आवश्यकता है।
दुमका: अवनीश कुमार झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते हैं कि महिलाओं के साथ हो रही यौनिक हिंसा एक गंभीर समस्या है और यह भी घरेलु हिंसा का एक भयावह रूप है. वे कहते हैं कि न सिर्फ देश में बल्कि हमारे राज्य में भी महिला आयोग बना हुआ है महिलाओं के संरक्षण के लिए तो महिलाएं अपनी रक्षा के लिए महिला आयोग के सरन में जा सकती हैं हां इसके लिए जरुरी महिलाओं को जागरूक करने का.
दुमका: अवनीश कुमार काठीकुंड दुमका झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि घरेलु हिंसा की खबरे दिनों दिन अधिक सुनने और पढ़ने को मिल रहा है वे कहते हैं कि घरेलु हिंसा के एक कारन तो खुद महिलाये है क्योंकि इसके लिए जितना जिम्मेदार एक पुरुष होता है उतना ही जिम्मेदार एक महिला भी होती है चुकी महिला जब चुप चाप अपने साथ हो
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दुमका:अवनीश कुमार ने काठीकुंड दुमका से झारखण्ड मोबाइल वाणी को बताया कि काठीकुंड प्रखंड अंतर्गत सुखाड़ प्रभावित परिवारों को 21 किलो प्रतिमाह निःशुल्क राशन देने का प्रावधान है लेकिन अब कुछ लोगो को नही दिया जा रहा है और जिन लोगो को दिया भी जा रहा है उन्हें 21 किलो के जगह पर २० किलो ही दिया जा रहा है. इस योजना का लाभ BPL परिवारों को मिल रहा है जबकि उन्हें देने का प्रावधान नही है.इतना ही नहीं लाभुकों से डीलर द्वारा इसके पैसे भी वसूले जाते हैं राशन देने के समय 20 रूपए और कूपन देने के समय 20 रूपए।
अवनीश कुमार दुमका से झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से बेटियो पर आधारित एक कविता प्रस्तुत कर रहे है
जिला दुमका,काठीकुंड से अवनीश कुमार झारखंड मोबाईल वाणी के माध्यम से कहते है की आज अधिकतर महिलाये घरेलू हिंसा का शिकार हो रही है। और सबसे बड़ी वजह है की महिलाये इसको बर्दास्त करती है और जब तक महिलाये इसको बर्दास्त करेंगी पुरूषो द्वारा इनको प्रताड़ित करने की प्रवृत्ति और बढ़ेगी।इस सबके विरुद्ध महिलाओ को आवाज उठाना होगा उन सशक्त होना होगा।अगर महिलाये सशक्त रहेंगी तो पुरुष भी उन्हें प्रताड़ित करने से डरेंगे।जैसे की समाज में आगे आना,कोई घटना के विरुद्ध थाने में शिकायत दर्ज करना। महिलाओ के लिए तो इतने सारे कानून बने है और अगर महिलाये इसका लाभ नहीं उठायेंगी तो फिर उन्हें ही भुगतना पड़ेगा।
