झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि जिला बांदा,बल्लान और नागावा गाँव में लगभग दस किसान महिलाओं से बात की गई जिनमें से सिर्फ तीन ही ऐसी महिलाएं थी जिनके नाम पर खेती की जमीन थी और वो भी सिर्फ इसी वजह से थी क्योंकि उनके पिता या पति नहीं थे।गांव की 53 वर्षीय आमना कहती है कि उनके पास पांच बीघा जमीन है। जिसमें से ढाई बीघा जमीन उनके पति के मारने के बाद उनके नाम हो गई।बाकी की ढाई बीघा जमीन उनके सास के नाम पर है।वह रोपाई,बुआई,खेत आवंटन आदि सारे काम करती हैं। जब उनसे सरकारी योजनाओं से मिलने वाले लाभ के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि उन्हें सरकार की किसी भी योजना का लाभ नहीं मिला है।पैदावार अच्छा नही होने के कारण आजीविका चलाने में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि पंद्रह अक्टूबर महिला किसान दिवस के मौके पर खबर लहरिया टीम ने खबर दिया था कि जब महिला किसान से उसकी लागत के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि साऐ दस हजार खेती में लग जाते है खेती करने के लिए उन्हें अपने गहनों को भी गिरवी रखना पड़ता है। कई बार उन्हें कर्ज भी लेना पड़ता है।क्योंकि उनके पास खेती के लिए जरूरत के हिसाब से पैसे नहीं होते हैं।जब फसल अच्छी नहीं होती तो उन पर कर्ज और भी दोगुना हो जाता है। कर्ज लेकर खेती में पैसा लगा देते हैं। ऐसे में फसल खराब हो जाता है तो वह कर्ज दोगुना हो जाता है।छोटे किसानों को फसल से बहुत मुश्किल से जीविका चलती है।ऐसे में उनकी आय बिलकुल नही होती है।ऊपर से कर्ज का भार आय दिन बढ़ता रहता है।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि वह महिलाएं जो अपने जमीन पर खेती करती हैं,जो अपने पारिवारिक जमीन पर खेती करती हैं या जो किराए पर ली हुई जमीन पर खेती करती हैं,उनको महिला किसान कहा जाता है। अगर हम महिलाओं के नजरिए से देखें तो वो सभी महिलाएं जो खेत में किसी भी तरह का काम करती हैं,जैसे - बटाई,खेत में मजदूरी या पशुपालन,इत्यादि।सभी महिलाओं को महिला किसान कहेंगे ना कि किसी अन्य नाम से जानेंगे।महिला किसान अधिकार मंच की सुलेखा ने बताया कि जब पति कमाने के लिए बाहर जाता है तो वह खेती की सारी जिम्मेदारी महिला पर छोड़कर जाता है।लेकिन खेत उसके नाम नहीं करता है। महिला को किसी भी तरह की मान्यता नहीं मिलती है।ऐसी महिलाएं भी महिला किसान हैं जो मिट्टी के ढेर में से धान घर लाती हैं और घंटो मेहनत करके धान को साफ करती हैं। ताकि वो अपने परिवार का भरण - पोषण कर सके।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि भारतीय किसान यूनियन और बुंदेलखंड किसान यूनियन का कहना है वह कभी महिलाओं को अधिकार देने के सम्बन्ध में सोचे ही नहीं थे। महिलाओं को योजनाओं के बारे में पता ही नहीं है। लोगों को गूगल में सर्च करने के बाद योजनाओं के बारे में पता चला

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिला किसान के रूप में काम करती हैं लेकिन उनको अधिकार नहीं दिया जाता है। लगभग 70 प्रतिशत महिलाएं खेती करती हैं। महिलाओं को न तो किसान के रूप में देखा जाता है और न ही किसान के रूप में अधिकार दिया जाता है

He gave information about RRB Group D exam date.

Transcript Unavailable.

Information shared about doctor consultation advise

He gave information about the job, whoever wants to do the job can contact on the contact number given by him.

Naresh Kumar from Hisar, Haryana. My Group D selection and joining are done. When will the government quarter and first salary be given? I am receiving disability pension should I stop it now or after salary starts?