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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि प्रत्येक महिला और लड़की को यौन और प्रजनन संबंधी अधिकार प्राप्त है।इसका अर्थ है कि उन्हें गर्भ निरोधक और सुरक्षित गर्भपात जैसी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँंच का अधिकार है। उन्हें यह चुनने का अधिकार है की वे कब,किससे और कैसे शादी करें।उन्हें यह भी तय करने का अधिकार है कि वे बच्चे पैदा करनाा चाहती हैं या नहीं। महिलाओं को लिंग आधारित हिंसा के भय के बिना जीने में सक्षम होना चाहिए।लेकिन सभी महिलाओं को इन अधिकारों का आनंद लेने में अभी लम्बा समय लगेगा।उदाहरण के लिए दुनियां भर में कई महिलाएं और लड़किया अभी भी सुरक्षित और कानूनी गर्भपात कराने में असमर्थ हैं।कई देशों में जो लोग गर्भपात करना चाहते हैं या जिन्हें इसकी आवश्यकता है,उन्हें अक्सर एक असंभव विकल्प चुनने के लिए मजबूर होना पड़ता है। ऐसे लोगों को या तो अपनी जान जोखिम में डालना पड़ता है या जेल जाना पड़ता है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से अनिज रावत ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि सदियों से और आज भी कार्यकर्ता महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।उनमे से एक है - महिलाओं का मताधिकार।1893 में महिलाओं के मताधिकार के लिए आंदोलन शुरू हुआ। न्यूजीलैंड (माओरी भाषा में ओटेरोवा) 1893 में राष्ट्रीय स्तर पर सभी महिलाओं को मताधिकार देने वाला दुनिया का पहला देश बना। यह आंदोलन विश्व भर में फैल गया और इस संघर्ष में शामिल सभी लोगों के प्रयासों के कारण आज महिलाओं को मताधिकार प्राप्त है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि कई वर्षों से महिला अधिकार आंदोलन असमानता को दूर करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।कानूनों में बदलाव के लिए अभियान चला रहे हैं। ताकि कानून अगर बदल जाए तो हम लोगों के लिए कुछ फायदेमंद हो या अपने अधिकारों के सम्मान की मांग करते हुए सड़कों पर उतर रहे हैं।डिजिटल युग में नए आंदोलन भी देखा जा रहा है। जैसे कि हैजमीटो अभियान,जो लिंग आधारित हिंसा और यौन उत्पीड़न की व्यापकता को उजागर करता है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि हम सभी को मानवाधिकार प्राप्त हैं।इनमें हिंसा और भेदभाव से मुक्त जीवन जीने का अधिकार है। शारीरिक और मानसिकता स्वास्थ्य के उच्तम संभव स्तर का आनंद लेने का अधिकार,शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार,संपत्ति रखने का अधिकार,मतदान करने का अधिकार और समान वेतन अर्जित करने का अधिकार भी शामिल है।लेकिन विश्व में आज भी कई महिलाओं और लड़कियों को लिंग और लैंगिक पहचान के आधार पर भेदभाव का सामना करना पड़ता है।लैंगिक आसमानता कई ऐसी समस्याओं की जड़ है जो महिलाओं और लड़कियों को प्रभावित करती है
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झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाएं अपने अधिकार नही ले पाती हैं। इसके कई कारण हैं।जैसे अशिक्षा,क़ानूनी जानकारी का अभाव, पितृ सत्तात्मक मानसिकता,इत्यादि।समाज और परिवार में पुरुषों को महत्व देने वाली सोच,महिलाओं की आवाज को दबा दिया जाता है।संपत्ति का स्वामित्व ना होना और रोजगार के अवसरों की कमी के कारण महिलाओं को आर्थिक रूप से पुरुषों पर निर्भर रहना पड़ता है।साथ ही सामाजिक दबाव,बदनामी और परिवार टूटने का डर, महिलाओं को अपने अधिकार के प्रति उदासीन रखता है।
The caller explains the process for getting a disability certificate, UDID card, and applying for disability pension for a child who cannot speak or hear.
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से अनुरुद्ध राजा ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाएं अपने अधिकार नही ले पाती हैं। इसके कुछ मुख्य कारण हैं।जैसे - ,रूढ़िवादी सामाजिक ढांचा,शिक्षा की कमी,क़ानूनी जानकारी का अभाव,आर्थिक निर्भरता और पितृ सतात्मक मानसिकता,इत्यादि।अशिक्षित महिलाओं को अपने अधिकार ना ले पाने का पछतावा होता है। समाज में व्यापक भेदभाव,घरेलू हिंसा का डर और न्याय पाने की लंबी महंगी प्रक्रिया भी उन्हें पीछे खींचती है।अपने अधिकार पाने के लिए महिलाओं को शिक्षित,जागरूक और क़ानूनी जानकर होना चाहिए ।
हरियाणा राज्य के फरीदाबाद से आकाश कुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि बेटी और बहू का प्रॉपर्टी में हिस्सा होना चाहिए।मायके वाले कहते हैं ससुराल वाले प्रॉपर्टी में हिस्सा देंगे और ससुराल वाले कहते हैं मायके वाले देंगे। महिला इधर से उधर भटकती रहती है।इसलिए दोनों पक्ष को महिलाओं का उनका हक़ देना चाहिए।
