दिल्ली एनसीआर के मानेसर से विकास की बातचीत साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से श्रमिक अफ़ज़ल से हुई। अफ़ज़ल ने बताया कि उनकी नौकरी अभी छूटी हुई है। उन्हें पैसो की समस्या आ रही है इसलिए पीएफ निकलवाना चाहते है परन्तु ठेकेदार द्वारा अप्रूवल नहीं मिलने के कारण पीएफ निकलवाने में समस्या आ रही है

हम सभी को पता है कि मजदूर कंपनियों की पूंजी बढ़ाने के लिए दिन-रात की परवाह किए बिना हाड़तोड़ मेहनत करते हैं। हम यह भी जानते हैं कि अधिकारियों द्वारा उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर कम मेहनताने में अधिक समय काम कर अत्यधिक उत्पादन करने का दबाव भी बनाया जाता है और विडम्बना यह कि बिना किसी कारण के उनका वेतन भी काट लिया जाता है। जहाँ एक तरफ़ लॉक डाउन के बाद से ही हमारे मज़दूर साथियों की रोज़ी-रोटी के ऊपर काले बादल मंडरा रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर उनके मेहनताने और पीस रेट में लगातार हो रही कटौती ने उनकी थाली में से निवाले कम कर दिए हैं। आइए, आगे हमारे श्रमिक साथी क्या कह रहे हैं जानने की कोशिश करते हैं- सुना आपने! किस तरह कम्पनियाँ लॉकडाउन का हवाला देकर मनमाने तरीके से रेट तय कर रही हैं! अभी आप भी हमें बताइये कि लगातार घट रहे पीस रेट से आने वाले दिनों में आप लोगों को किस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है? लॉकडाउन के बाद पीस रेट में किस तरह का अंतर आया है? क्या एक ही जैसा काम करने के बाद भी अलग-अलग कम्पनियों के पीस रेट में अंतर होता है? इस विषय पर अपना विचार हमसे ज़रूर साझा करें, अपने फ़ोन में नंबर 3 दबाकर

बीड़ी श्रमिकों ने कोटपा कानून के विरोध में गिद्धौर प्रखंड मुख्यालय में विरोध प्रदर्शन किया। विस्तार पूर्वक खबर सुनने के लिए ऑडियो क्लिक करें

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उत्तरप्रदेश राज्य के इलाहबाद ज़िला से पूजा सरोज,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि महँगाई बढ़ती ही जा रही है

उत्तरप्रदेश राज्य के कुशीनगर ज़िला से तन्मय कुमार ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि बहुत से श्रमिकों को लॉक डाउन के बाद काम नहीं मिल रहा है एवं कई कंपनियों से छटनी भी हो रही है। लॉक डाउन में कई श्रमिकों ने उधार ले कर अपना जीवन बिताया है ,इसलिए उन्हें अब ज्यादा से ज्यादा नौकरी मिलनी चाहिए साथ ही उन्हें वेतन भी अधिक मिलना चाहिए ताकि उनका जीवन सामान्य स्थिति में आ जाए

हरियाणा राज्य के झज्जर ज़िला के बहादुरगढ़ से सतरोहन लाल कश्यप ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि पेट्रोल,डीजल व रसोई गैस के दाम में वृद्धि होने से लोग परेशान है। सरकार ,सरकारी कर्मचारियों के लिए तो महँगाई भत्ता बढ़ा देती है परन्तु प्राइवेट कंपनियों में कार्यरत कर्मचारियों के बारे में नहीं सोचती