बिहार के हरनौत प्रखंड से मेहताब जी ने जीविका मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि उन्होंने हरनौत प्रखंड के बीडीओ देवेंद्र जी से बाल विवाह एवं दहेज़ प्रथा के विषय में ख़ास बातचीत की ,जिसमें देवेंद्र जी ने कहा कि 2 अक्टूबर को बाल विवाह एवं दहेज़ प्रथा के खिलाफ एक अभियान चलाया जा रहा है और इस अभियान को सफल बनाने के लिए प्रत्येक पंचायत एवं घरों में प्रचार प्रसार किये जा रहे हैं ।देवेंद्र जी ने बताया की दुर्गा पूजा पंडालों में भी बैनर लगा कर लोगों से अपील की गयी कि बाल विवाह एवं दहेज़ प्रथा जैसी कुरीतियों को जड़ से हटाने में सभी सहयोग करें।इस अभियान को सफल बनाने हेतु शादियों में यह ध्यान रखा जाये कि लड़की की उम्र 18 वर्ष से कम और लड़के की उम्र 21 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए।
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बिहार राज्य के नालंदा जिला से संतोष जी रिजवान जी से बाल विवाह पर साक्षात्कार ले रहे है,जिसमे रिजवान जी ने कहा कि दहेज़ प्रथा पुरे समाज के लिए एक कुरीति है परन्तु 2 अक्टूबर से दहेज़ प्रथा पर कानून लागु हो गयी है, इसमें सभी लोगो की भागीदारी होनी चाहिए। लड़कियों की कम उम्र में अगर शादी होती है,तो उनके शरीर में कई तरह की बीमारियां हो जाती है,वे जल्दी माँ बन जाती है,वे शिक्षा से वंचित हो जाती है।इसी तरह से लड़के भी शारीरिक व बौद्धिक रूप से कमज़ोर हो जाते है। इसमें शिक्षा का अहम् योगदान है।हम सोचते है कि अगर हमारी बेटी है,तो दहेज़ नहीं देंगे और अगर बेटा है,तो सोचते है दहेज़ लेंगे, यह सोच बहुत ही गलत है। 2 अक्टूबर को मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बहु को बहु ना समझे बल्कि उन्हें बेटी समझे। जब ये सोच सभी में आएगी तो दहेज़ की मांग में भी कमी आएगी । बस एक सोच को बदलने की ज़रूरत है और इसका लाभ आने वाले दिनों में ज़रूर मिलेगा।
बिहार राज्य के नालंदा जिला से संतोष जी जया मिश्रा जी से बाल विवाह पर साक्षात्कार ले रहे है,जिसमे जया मिश्रा जी ने कहा कि 18 वर्ष के कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के का अगर शादी होता है,उसे बाल विवाह कहते है। कम उम्र में शादी होने के वजह से लड़कियों की पढ़ाई बाधित होता है और अगर तुरंत बच्चा ठहर जाता है, तो उन्हें तरह-तरह के दबाब और तनाव से गुजरना पड़ता है। आंगनवाड़ी केंद्र में दो अक्टूबर को सभी ने दहेज़ प्रथा एवं बाल विवाह के विरुद्ध सपथ लिया कि वे किसी भी बाल विवाह में शामिल नहीं होंगे और शादी में दहेज़ का विरुद्ध करेंगे।इनका सभी से कहना है क बेटियों को बोझ ना समझे,बेटियों को पढ़ाये और आगे बढ़ाये। इससे समाज में निश्चित रूप से बदलाव आएगा।
बिहार राज्य के नालंदा जिला से संतोष जी आशा कार्यकर्त्ता अंजू सिन्हा जी से बाल विवाह पर साक्षात्कार ले रहे है,जिसमे अंजू जी ने कहा कि बाल विवाह नहीं करना चाहिए क्योंकि बाल विवाह करने पर लड़कियों की ज़िंदगी अधूरी रह जाती है और उन्हें कई प्रकार की बीमारियां हो जाती है,जैसे एनीमिया आदि।जल्दी शादी होने पर जल्दी बच्चा भी हो जाता है और इससे लड़कियों की जान खतरे में आ जाती है।कम उम्र में शादी करने के कई वजह भी है,जैसे समाज में लोग कहते है कि बेटी जवान हो गयी,अभी तक शादी नहीं हुई है और उन लोगो की बुरी नज़र अपनी बेटी पर न पड़े,इसी डर से परिवार वाले उनकी जल्दी शादी कर देते है। गरीब आदमी के पास पैसे कम होते है,जिसके कारण भी वे अपनी बेटी की शादी कम उम्र में कर देते है। दहेज़ प्रथा को एक आदमी के द्वारा नहीं रोका जा सकता,इसके लिए सभी लोगो को जागरूक होना होगा और समाज में इस विषय पर आपस में बात करनी होगी। कई बार तो दहेज़ के कारण लड़कियों को प्रताड़ित किया जाता है और उन्हें मार दिया जाता है। जिस तरह शराब बंदी किया जा रहा है,उसी तरह दहेज़ प्रथा को बंद करना भी जरुरी है।
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