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बिहार के एकंगनसराय प्रखंड से राजन जी ने जीविका मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि एकंगनसराय प्रखंड के विकास पदाधिकारी मनोज कुमार पंडित जी ने महिलाओं को लाभान्वित करने वाली योजनाओं के बारे में बताया कि अन्य महिलाओं की तरह ही जीविका से जुड़ी दीदियाँ वे सरकार द्वारा चलाये जा रहे विभिन्न योजनाओं का लाभ ले सकतीं हैं,जैसे इंदिरा गाँधी राष्ट्रिय वृद्धा पेंशन योजना जिसमे 400रूपए प्रति माह सरकार की ओर से महिला को दिया जाता है। इसके अतिरिक्त लक्ष्मीबाई सामाजिक सुरक्षा पेंशन है ,जो विधवा महिलाओं के लिए हैं,उन्हें भी 400रूपए प्रति माह सरकार की ओर से महिला को दिया जाता है।सरकार की ओर से बेटियों के लिए कन्या विवाह योजना चलाये जा रहे हैं जहाँ बेटियों की शादी के लिए 5000 हज़ार रूपए सरकार की ओर से दिए जाते हैं। इन सब के अलावा मुख्यमंत्री बालिका साईकिल योजना जो हाईस्कूल में बच्चियाँ पढ़ रही हैं वे इनका लाभ ले सकतीं हैं।उन्होंने बताया कि पेंशन योजनाओं के लिए आरटीजीएस काउंटर बनाये गए हैं जहाँ लाभुक अपने आवेदन जमा करते हैं एवं ऐसी कई योजनाओं की स्वीकृति के लिए अनुमंडल पदाधिकारी के पास भेजा जाता है। बिहार में पेंशन योजना एवं कन्या विवाह योजना की स्वीकृति प्रखंड स्तर में हो जाती है
बिहार राज्य के नालन्दा जिला के हिलसा प्रखंड से सुमन जी जीविका मोबाइल वाणी के माध्यम से बाल विवाह पर हिलसा प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी सुरेश जी से साक्षात्कार ले रहे है,जिसपर प्रभारी सुरेश जी ने कहा कि शादी की सही उम्र लड़की के लिए 18 वर्ष और लड़को के लिए 21 वर्ष है और यह वैज्ञानिक तत्व पर आधारित है। 18 वर्ष तक लड़की और 21 वर्ष तक लड़का का सही से शारीरिक विकास हो जाता है और अगर कम उम्र में शादी हो जाती है,तो उनके शरीर में कई तरह के प्रभाव पड़ता है। जैसे - जल्दी बच्चा पैदा होता है,जिससे बच्चे का वज़न कम होता है और वो शारीरिक रूप से काफी कमज़ोर हो जाता है। जिसमे अधिक मृत्युदर की संभावना होती है। खून की कमी भी होती है और शरीर का विकास भी सही तरीके से नहीं हो पाता है। जैसा की सभी को पता है कि माननीय मुख्यमंत्री जी का सपना है कि पूरा समाज बाल विवाह और दहेज़ प्रथा से मुक्त हो। इसके लिए इन्होने 2 अक्टूबर को अपने अधीन कर्मियों से सपथ दिलवाये है कि कम उम्र में शादी नहीं होने दें और दहेज़ न लें और बहु को बहु नहीं बल्कि बेटी समझे।इन्होने कहा कि बाल विवाह और दहेज़ प्रथा के बारे में सभी को प्रेरित करेंगे कि बाल विवाह न कराये और अपने बच्चो को पढ़ाये, ऐसा करने पर अपने बच्चो का ही भविष्य उज्जवल होगा।
बिहार राज्य के नालंदा जिला से संतोष जी जीविका के बी.पी.एम सोनाली आनंद जी से कम उम्र में शादी करने पर शरीर में क्या प्रभाव पड़ता है, इस विषय पर साक्षात्कार ले रहे है,जिसमे सोनाली जी ने कहा कि हमारे शरीर का विकास किशोरावस्था तक होती है,और अगर हम 18 वर्ष की बात करे,तो ये किशोरावस्था के अंतर्गत ही आता है,इसका मतलब 18 वर्ष में भी हमारे शरीर का विकास होता रहता है।अगर उस समय किसी लड़की की शादी होती है,तो उसके ऊपर मानसिक और शारीरिक दोनों दबाब होता है,जिसके वजह से शरीर का विकास नहीं हो पता है। जिसके कारण उन्हें कई प्रकार की बीमारियां हो जाती है।कम उम्र में अगर लड़कियों की शादी होती है,तो जल्दी माँ बनने का सम्भावना भी होता है,इससे उनके शरीर कमज़ोर हो जाता है,जिसका परिणाम उन्हें भुगतना पड़ता है। और अगर लड़को की बात करे,तो लड़को में परिवार चलाने का एक मानसिक दबाब होता है। अगर उनकी भी शादी कम उम्र में होती है,तो उन्हें भी बीमारी हो सकती है ।इसके जिम्मेवार सिर्फ और सिर्फ हम है और हमारे अभिवावक,क्योंकी हम इसका बढ़ावा देते है,उसका बहिष्कार नहीं करते है। हमें जानकारी होनी चाहिए कि ये कानून के खिलाफ है।पुरे बिहार में ये कार्यक्रम चल रहा है, इसलिए हमे पुराने ख्यालातों को बदलकर नयी बातों को समझना होगा। समय बदल रहा,हमे भी बदलना होगा।
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