बिहार राज्य के नालंदा जिला से संतोष जी रिजवान जी से बाल विवाह पर साक्षात्कार ले रहे है,जिसमे रिजवान जी ने कहा कि दहेज़ प्रथा पुरे समाज के लिए एक कुरीति है परन्तु 2 अक्टूबर से दहेज़ प्रथा पर कानून लागु हो गयी है, इसमें सभी लोगो की भागीदारी होनी चाहिए। लड़कियों की कम उम्र में अगर शादी होती है,तो उनके शरीर में कई तरह की बीमारियां हो जाती है,वे जल्दी माँ बन जाती है,वे शिक्षा से वंचित हो जाती है।इसी तरह से लड़के भी शारीरिक व बौद्धिक रूप से कमज़ोर हो जाते है। इसमें शिक्षा का अहम् योगदान है।हम सोचते है कि अगर हमारी बेटी है,तो दहेज़ नहीं देंगे और अगर बेटा है,तो सोचते है दहेज़ लेंगे, यह सोच बहुत ही गलत है। 2 अक्टूबर को मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बहु को बहु ना समझे बल्कि उन्हें बेटी समझे। जब ये सोच सभी में आएगी तो दहेज़ की मांग में भी कमी आएगी । बस एक सोच को बदलने की ज़रूरत है और इसका लाभ आने वाले दिनों में ज़रूर मिलेगा।
