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शहीद भगत सिंह सुखदेव एवं राजगुरु का शहादत दिवस मनाया गया। देश के युवाओं को इन क्रांतिकारी शहीदों के नक्शेकदम पर चलने और उनके विचारों को लागू करने की आवश्यकता है । विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
हेमंत सोरेन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 1 अप्रैल को होगी सुनवाई।उनका मामला न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है ।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
झारखंड राज्य के बोकारो जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता जे एम रंगीला ने हिरामन महतो से बातचीत की जिसमें उन्होंने जानकारी दी की कोई भी लोगों के लिए कुछ नहीं कर रहा है , ये आत्म - धर्मी लोग अपने स्वार्थ के लिए खुद का समर्थन कर रहे हैं , वे किसी तरह सत्ता हासिल करने के लिए फेरबदल कर रहे हैं या दलबदल कर रहे हैं । उनके बाद उनके बेटे , उनके बेटे या उनके किसी रिश्तेदार के पास यह शक्ति है , तो क्या आज की राजनीति में पार्टियां इसके लिए काम कर रही हैं। राजनेता देश को लूटने का काम कर रहे हैं , वे अब अपने स्वार्थ के लिए सब कुछ कर रहे हैं। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के बारे में एक महिला क्या सोचती है... यह जानना बहुत दिलचस्प है.. चलिए तो हम महिलाओं से ही सुनते हैं इस खास दिन को लेकर उनके विचार!! आप अपने परिवार की महिलाओं को कैसे सम्मानित करना चाहेंगे? महिला दिवस के बारे में आपके परिवार में महिलाओं की क्या राय है? एक महिला होने के नाते आपके लिए कैसे यह दिन बाकी दिनों से अलग हो सकता है? अपने परिवार की महिलाओं को महिला दिवस पर आप कैसे बधाई देंगे... अपने बधाई संदेश फोन में नम्बर 3 दबाकर रिकॉर्ड करें.
पिछले 10 सालों में गेहूं की एमएसपी में महज 800 रुपये की वृद्धि हुई है वहीं धान में 823 रुपये की वृद्धि हुई है। सरकार की तरफ से 24 फसलों को ही एमएसपी में शामिल किया गया है। जबकि इसका बड़ा हिस्सा धान और गेहूं के हिस्से में जाता है, यह हाल तब है जबकि महज कुछ प्रतिशत बड़े किसान ही अपनी फसल एमएसपी पर बेच पाते हैं। एक और आंकड़ा है जो इसकी वास्तविक स्थिति को बेहतर ढ़ंग से बंया करत है, 2013-14 में एक आम परिवार की मासिक 6426 रुपये थी, जबकि 2018-19 में यह बढ़कर 10218 रुपये हो गई। उसके बाद से सरकार ने आंकड़े जारी करना ही बंद कर दिए इससे पता लगाना मुश्किल है कि वास्तवितक स्थिति क्या है। दोस्तों आपको सरकार के दावें कितने सच लगते हैं। क्या आप भी मानते हैं कि देश में गरीबी कम हुई है? क्या आपको अपने आसपास गरीब लोग नहीं दिखते हैं, क्या आपके खुद के घर का खर्च बिना सोचे बिचारे पूरे हो जाते हैं? इन सब सरकारी बातों का सच क्या है बताइये ग्रामवाणी पर अपनी राय को रिकॉर्ड करके
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