पर्यावरण को गति ही आनंदित करती है जैसे लहराते खेत खलियान, झूमता बारिश, सरसरती हवाये, खुशनुमा बाग बगीचे इत्यादि जो हमें काल्पनिक दुनिया से वास्तविक दुनिया का अनुभूति करती हे। जो हर लोगों को आनंदित करती है।
झारखंड में 28,404 उधोगों के संचालन की है अनुमति, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दी है स्वीकृति।उद्योगों के संचालन के लिए कुल 52780 आवेदन प्राप्त हुए जिनमें से चौदह हजार बावन आवेदन अस्वीकार कर दिए गए।
आज के समय पर्यावरण नाम समर्पित है इसे कहना अनुचित नही होगा। प्रकृति ही जान और जहान है।
प्रकृति कभी किसी के भाव से नहीं चलता, इसका संरक्षण बहुत जरूरी है। किसी भी वस्तु का अत्यधिक होना या उसके पीछे भागना नुकसान देह है। प्यार और भावना हमे पर्यावरण से जोड़ता जरूर है, पर उसके प्रति झुकाव होना जरूरी है।
जे एल के एम का वनभोज सह कार्यकर्ता मिलन समारोह सम्पन्न।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
सकल घरेलू उत्पाद का प्रमुखता शहरी क्षेत्र से ग्रामीण क्षेत्र के उत्पाद पर निर्भरता, आज के दौर में ये दर्शाता हे कि आने वाला कल ग्रामीण उत्पादों का है। इसलिए उनके माध्यमों का संरक्षण अतिआवश्यक है।
झारखंड राज्य के बोकारो जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता शिवनारायण महतो जानकारी दे रहे हैं कि धवाटांड़ नीचे टोला में पानी की समस्या से लोग परेशान हैं ,ग्रामीणों ने चापाकल मरम्मत कराने की मांग रखी है। लगभग दो महीने से यह जर्जर अवस्था में है, लेकिन किसी भी लोक प्रतिनिधि के पास इस समस्या के सामाधान का समय नहीं है।
बोकारो स्टील प्लांट में हुई दुर्घटना में ठेकाकर्मी की मौत, आश्रित को नियुक्ति पत्र मिला। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
प्राकृतिक जीवन के हर पहलू को एक साथ ले चलने की आवश्कता है।इसलिए कृषि का वैज्ञीकरण अतिआवश्य होना भी एक जरूरत हे।
ऊर्जा का श्रोत कभी नहीं मरता, इसलिए प्राकृति को बचना अतिआवश्यक है, जिसतरह प्राकृति नहीं मरणशील उसी प्रकार ऊर्जा। यही ऊर्जा के अविनाशिता सिद्धांत है।
